Vastu For Bathroom | घर केवल चार दीवारों और छत ही नहीं होता बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और बेहतर स्वास्थ्य का प्रतीक भी होता हैं. वास्तु का घर के हर कोने से संबंध होता हैं जिसमें घर का बाथरूम भी शामिल होता हैं वैसे बाथरूम को सुविधा के अनुसार बनाया जाता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम की सही जगह और रंग के साथ ही अन्य चीजें घर में रहने वाले सदस्यों के जीवन पर असर डालती हैं. कहा जाता है कि बाथरूम का गलत दिशा में बनना, रिसाव, गंदगी या फिर दर्पण का गलत जगह में होना नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं जिसके कारण से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी जैसे समस्याएं का सामना करना पड़ता है लेकिन बाथरूम का सही तरीके से स्थापित होना केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा ही नहीं लाता बल्कि घर में ताजगी, स्वास्थ्य और खुशहाली भी लाती हैं.
जानें वास्तु के अनुसार घर में बाथरूम को बनाने के नियम को :
1) बाथरूम को बनाने की सही दिशा :
बाथरूम की सही दिशा बहुत महत्वपूर्ण होता हैं. बाथरूम को पश्चिम या उत्तर – पश्चिम दिशा में होना चाहिए क्योंकि इससे अपशिष्ट निपटान में आसान होने के साथ ही घर में ऊर्जा भी संतुलित बनी रहती है लेकिन भूलकर भी बाथरूम को उत्तर – पूर्व, उत्तर या फिर दक्षिण – पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए क्योंकि यह दिशा घर की सकारात्मकता और पवित्रता से जुड़ा हुआ होता हैं.
2) बाथरूम में सही रंगों का इस्तेमाल :
बाथरूम में कभी भी गहरे और रंगों विशेषकर काले, गहरा नीला या फिर लाल रंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सभी रंग नकारात्मक ऊर्जा के संचार को बढ़ाते हैं. वास्तु के अनुसार बाथरूम में हमेशा हल्के, तटस्थ रंग जैसे कि सफेद, हल्के नीले या फिर नीला रंग का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यह रंग घर में ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं.
3) बाथरूम का दरवाजा :
बाथरूम का दरवाजा को सदैव बंद रखना चाहिए जिससे कि यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकें और घर में स्वच्छता को भी बनाएं रखें इसके साथ ही बाथरूम का दरवाजा ऐसा बनाएं कि दरवाजा अंदर की ओर खुलें.
4) बाथरूम में दर्पण की सही जगह :
बाथरूम में दर्पण को कभी भी दरवाजे के सामने बिल्कुल नहीं लगाएं क्योंकि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती हैं इसलिए दर्पण को बाथरूम की अंदर वाली दीवार लगाएं जिससे कि यह सौहार्द और सकारात्मक माहौल बनाने में सहायता करें.
5) पानी का रिसाव :
बाथरूम का रिसाव केवल पानी की बर्बादी ही नहीं होती बल्कि यह वित्तीय तंगी का भी कारण बनती है इसलिए बाथरूम में पानी के रिसाव को रोकने के लिए फौरन मरमत कराएं और समय – समय पर पाइप लाइन की जांच कराते रहें.
6) टॉयलेट सीट की सही दिशा :
टॉयलेट सीट की दिशा उत्तर या दक्षिण दिशा में होना चाहिए जिससे कि घर में शुद्धता और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़े लेकिन भूलकर भी टॉयलेट सीट का मुख पूर्व या उत्तर – पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए.
7) बाथरूम की व्यवस्था सही होना :
बाथरूम को हमेशा साफ – स्वच्छ, वेंटिलेटेड और इसमें हल्का सामान को रखना घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है तो वहीं बाथरूम में बहुत सारा सामान और कम वेंटिलेशन नकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रवाह करता है इसके साथ ही बाथरूम में भूलकर भी पोछा, झाडू जैसी चीजें को खुला नहीं रखना चाहिए.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) बाथरूम घर की किस दिशा में होना चाहिए ?
पश्चिम या उत्तर – पश्चिम दिशा.
2) बाथरूम में टॉयलेट सीट की सही दिशा क्या होनी चाहिए ?
उत्तर या दक्षिण दिशा.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


