Rudraksha Niyam | सनातन धर्म में रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली बीज माना गया है क्योंकि रुद्राक्ष केवल एक बीज ही नहीं बल्कि आस्था और शक्ति का प्रतीक होता है. रुद्राक्ष का शाब्दिक अर्थ जिसमें “रुद्र” अर्थात भगवान शिव तो वहीं “अक्ष” यानि आंसू. पुराणों में वर्णित है कि जब भगवान शिव ने कठिन ध्यान और तपस्या किया तो उनके आंखों से गिरे आंसुओं से धरती पर रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई और इस वृक्ष के बीजों को रुद्राक्ष कहा गया हैं यही कारण है कि भगवान शिव को रुद्राक्ष बहुत ही प्रिय हैं. मान्यता है कि जो भी रुद्राक्ष को धारण करता हैं उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती हैं. रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक होती हैं और इसको धारण करने से हर तरह के संकटों से मुक्ति मिलने के साथ ही कुंडली में ग्रहों की स्थिति भी मजबूत होती हैं लेकिन इसको धारण करने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए.
जानते हैं रुद्राक्ष को धारण करने के नियम को :
1) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रुद्राक्ष को धारण करने से पहले इसको पवित्र करके रुद्राक्ष मंत्र और रुद्राक्ष मूल मंत्र ” ॐ नमः शिवाय या ॐ हूं नमः ” का जाप करें और फिर धारण करें लेकिन जब भी कभी निकालें इसे पवित्र स्थान पर रखें.
2) रुद्राक्ष को धारण करते समय धागे के रंग का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी काले रंग के धागे में इसको धारण नहीं करना चाहिए बल्कि रुद्राक्ष को सदैव धारण करने के लिए पीले या फिर लाल रंग के धागे का इस्तेमाल करें.
3) हिंदू धर्म के अनुसार तुलसी की माला के समान ही रुद्राक्ष को पवित्र माना जाता है इसलिए इसको धारण करने के बाद मांस – मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए.
4) रुद्राक्ष को पहन कर कभी भी शमशान घाट नहीं जाना चाहिए और न ही किसी शोक सभा में जाना चाहिए लेकिन अगर इन स्थानों पर जाना जरूरी हो तो रुद्राक्ष को घर पर उतारकर जाना चाहिए.
5) रुद्राक्ष को धारण करने के बाद कभी भी किसी को अपना रुद्राक्ष बिल्कुल नहीं देना चाहिए और ना ही दूसरे के दिए हुए रुद्राक्ष की माला को ही पहनें.
6) धार्मिक मान्यतानुसार गर्भवती महिलाओं को रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए लेकिन अगर किसी महिला को रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दिया गया है तो उसे बच्चे के जन्म के बाद सूतक काल खत्म होने तक रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए.
7) रुद्राक्ष का धागा अगर खराब या फिर गंदा हो जाएं तब इसे बदल देना चाहिए और बदलने के बाद इसे गंगाजल से धो लें जिससे कि यह पवित्र बने रहें.
8) रुद्राक्ष को धारण करके कभी भी सोना नहीं चाहिए जबकि सोते समय इसे उतार कर तकिए के नीचे रख दें, माना जाता है कि रुद्राक्ष को तकिए के नीचे रख कर सोने से बुरे सपने नहीं आते हैं.
जानते हैं रुद्राक्ष को धारण करने के फायदे को :
1) रुद्राक्ष को धारण करने से मन स्थिर रहने के साथ नकारात्मक विचार कम होने के अलावा आत्मविश्वास में वृद्धि होती हैं जिससे कि मानसिक संतुलन बना रहता हैं.
2) रुद्राक्ष एक सुरक्षात्मक कवच का कार्य करती हैं जिससे कि रुद्राक्ष को धारण करने वाले को बुरी शक्तियों से यह बचाता हैं.
3) रुद्राक्ष को आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में रुद्राक्ष के कंपन में शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने की शक्ति होती हैं जिससे कि यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द और अनिद्रा जैसे समस्याओं से मुक्ति दिलाने में मदद करता है.
4) रुद्राक्ष को धारण करने से आत्मविश्वास और निर्णय की क्षमता बढ़ती है जिससे कि कार्यक्षेत्र और व्यापार में सफलता प्राप्त करने में लाभकारी होता हैं.
5) रुद्राक्ष को धारण करने से आत्मिक ऊर्जा का विकास होता है जिससे कि यह साधना, ध्यान और भक्ति मार्ग पर चलने में सहायता करती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) रुद्राक्ष की उत्पत्ति किससे हुआ है ?
भगवान शिव के आंसुओं से.
2) रुद्राक्ष को किस रंग के धागे में धारण करना शुभ होता हैं ?
लाल या पीले रंग.
3) रुद्राक्ष कितने मुखी वाला होता हैं ?
एक से इक्कीस मुखी.
4) रुद्राक्ष को धारण करते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए ?
ॐ नमः शिवाय या ॐ हूं नमः
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


