Padmini Ekadashi Vrat katha | अधिकमास शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी पद्मिनी एकादशी कहलाती है जो कि तीन साल में एक बार आती हैं. यह एकादशी अधिकमास में आती हैं जिसके कारण से इस एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता हैं. अधिकमास जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस मास के स्वामी श्रीहरि विष्णु हैं और समस्त एकादशी तिथि भी भगवान विष्णु को समर्पित होता हैं और ऐसे में पद्मिनी एकादशी का व्रत रखकर पूजा करने से पुण्य फलों के साथ ही भक्त को संतान सुख का वरदान और कीर्ति की भी प्राप्ति होती है. पद्मिनी एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही व्रत कथा का श्रवण करना चाहिए जिससे कि पुण्य फलों की प्राप्ति होने के साथ ही मृत्यु के पश्चात् बैकुंड की भी प्राप्ति होती हैं.
जानते हैं पद्मिनी एकादशी की कथा को :
बहुत ही पुण्यदायक पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथानुसार त्रेया युग में महिष्मति पुरी में हैहय नामक राजा के वंश में कीर्तवीर्य नाम का राजा राज्य करता था जिसको एक हजार (1,000) परम् प्रिय रानियां थी, लेकिन उसमें से किसी को भी संतान नहीं थी जो कि राजा कीर्तवीर्य के जाने के बाद उसके राज्य को संभाल सकें. राजा कीर्तवीर्य को कोई संतान नहीं होने से उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए देवता, पितृ, सिद्ध और अनेक चिकित्सा के द्वारा बहुत कोशिश किया परंतु यह सब असफल रहा.
राजा कीर्तवीर्य ने इन सभी में असफल होने के बाद तपस्या करने का निश्चय किया इसके लिए उन्होंने अपने साथ अपनी परम प्रिय रानी पद्मिनी जो कि इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न राजा हरिश्चंद्र की कन्या थी. राजा कीर्तवीर्य अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर राजसी वेष त्यागकर अपनी रानी पद्मिनी के साथ गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चला गया लेकिन दस हजार तक उस पर्वत पर तपस्या करने के पश्चात् भी पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई.
पतिव्रता रानी पद्मिनी से तब एक बार देवी अनुसूया ने कहा – ” बारह मास से अधिक महत्वपूर्ण अधिकमास होता हैं जिसको मलमास भी कहा जाता है और यह 32 मास के बाद आता हैं, उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत रखने से तुम्हारी सभी पूर्ण होगी इसके साथ ही इस व्रत को करने से भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान भी देंगे. रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया और इस एकादशी में निराहार रहकर रात्रि जागरण किया जिसके फलस्वरूप व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने रानी पद्मिनी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया.
अधिकमास में पड़ने वाली एकादशी के प्रभाव से पद्मिनी के घर कार्तवीर्य का जन्म हुआ जो बलवान इतना कि उनके समान तीनों लोकों में कोई भी बलवान नहीं था, भगवान के सिवाय तीनों लोकों में कार्तवीर्य को पराजित करने वाला कोई नहीं था, अर्थात जो भी व्यक्ति अधिकमास या मलमास के शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत करके कथा को पढ़ते या फिर सुनते हैं वह यश का भागी होकर संतान सुख को भोगकर विष्णुलोक को प्राप्त करता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) अधिकमास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का क्या नाम हैं ?
पद्मिनी एकादशी.
2) अधिकमास के स्वामी कौन है ?
श्रीहरि विष्णु
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