Garuda Purana | सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार होता है अंतिम संस्कार जिसे अंत्येष्टि भी कहा जाता है और यह मृतक के पार्थिव शरीर को सम्मान के साथ विदाई के साथ ही उसकी आत्मा की शांति के लिए किया जाने वाले कार्य होते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार सिर्फ मृतक को अंतिम विदाई नहीं है, जबकि यह एक आध्यात्मिक और भावनात्मक यात्रा भी होती हैं जिसमें शोकाकुल परिवार के द्वारा अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने का आखिरी मौक़ा होता हैं तो वहीं अंतिम संस्कार के माध्यम से मृतक की आत्मा को परलोक की यात्रा के लिए तैयार किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि अंतिम संस्कार से पहले मृतक के शरीर के साथ कुछ विशेष परंपरा को निभाया जाता है जिसमें से एक है अंतिम संस्कार से पहले मृतक को नए वस्त्र पहनाए जाने की परंपरा. इससे जुड़ी कई मान्यताएं और कारण है जिनमें कुछ धार्मिक, सामाजिक हैं तो वहीं कुछ मनोवैज्ञानिक कारण भी होते हैं.
जानते हैं अंतिम संस्कार से पहले मृतक को नए वस्त्र पहनाएं जाने के मान्यताओं :
धार्मिक मान्यता :
हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है. इस पुराण में मृत्यु और मृत्यु के पश्चात् आत्मा की यात्रा के साथ अंतिम संस्कार से जुड़े रहस्यों का उल्लेख किया गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी मनुष्य की मृत्यु होती है तो आत्मा फौरन शरीर को त्याग करके एक नई यात्रा पर निकलती है जिसमें आत्मा को कई लोकों से गुजरना होता है और आत्मा को यात्रा की तैयारी के लिए नए वस्त्र पहनाएं जाते हैं तो वहीं माना जाता है कि मृत्यु के समय शरीर अपवित्र हो जाते हैं और नए वस्त्र पहनाने से इस अपवित्रता को दूर किया जाता है और मृतक को नए एवं स्वच्छ वस्त्र पहनाने से मृतक की आत्मा पवित्र होती है जिससे कि उसे परलोक में शांति की प्राप्ति होती हैं.
मान्यता है कि जब किसी मनुष्य की मृत्यु होती है तो वह धरती लोक से दूर हो जाने से उसको देव तुल्य मानकर उनको नए वस्त्र पहनाकर उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है, ठीक उसी प्रकार से जैसे कि देवता के पूजन में उनको स्नान कराके उनको नए वस्त्रों से सुसज्जित किया जाता है.
सामाजिक मान्यता :
मृतक को अंतिम संस्कार से पहले नए वस्त्र पहनाकर उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा को बताने का एक महत्वपूर्ण प्रकिया माना जाता है. माना जाता है कि अंतिम संस्कार से पहले मृत शरीर को पवित्र करके धूप – दीप को दिखाकर उनको नए वस्त्र को पहना कर उनको नकारात्मक ऊर्जा से बचाया जाता हैं तो वहीं अंतिम संस्कार से पहले मृतक को नए वस्त्र पहनाकर विदाई दिया जाता हैं जो कि यह मृतक के सांसारिक जीवन से उनकी अंतिम विदाई का प्रतीक होता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) हिंदू धर्म में कितने संस्कारों का उल्लेख किया गया हैं ?
सोलह संस्कार.
2) किस पुराण में मृत्यु और मृत्यु के बाद होने वाले रहस्यों को बताया गया है ?
गरुड़ पुराण.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


