Vishnu Purana | हिंदू धर्म के अठारह पुराणों में एक है विष्णु पुराण जो कि बाकी पुराणों की तुलना में सबसे छोटा है जिसमें केवल सात हजार श्लोक और छह अध्याय हैं. विष्णु पुराण कि रचना महर्षि वेद व्यास के पिता ऋषि पराशर ने किया है और इसमें श्रीहरि और उनके भक्तों से जुड़ी कथाओं का उल्लेख किया गया है. विष्णु पुराण के अंत में जहां प्रलय और मोक्ष के बारे में वर्णन किया गया है तो वहीं इसमें जीवन को सुखी और सफल को बनाने के रहस्य को बताने के साथ ही जीवन की समस्याओं का निवारण को भी बताया गया हैं.
जानते हैं विष्णु पुराण के अनुसार जीवन की सफलता का राज :
1) योग व व्यायाम को करना :
कहा जाता है कि मनुष्य की सफलता की कुंजी उसका स्वास्थ्य होता हैं क्योंकि मनुष्य हर काम सही तरीके से तभी कर सकता है जब वो शारीरिक रूप से स्वास्थ्य हो और स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम और योग बहुत आवश्यक है लेकिन यह भी आवश्यक होता हैं व्यायाम व योग कब तक और किया जाएं. विष्णु पुराण में वर्णित किया गया है कि व्यायाम हमेशा उत्तर ही करना चाहिए जितना कि शरीर सहन कर सकें.
2) सोना और जागना :
मनुष्य की नित्यक्रिया में सोना और जागना शामिल होता हैं लेकिन सफलता प्राप्त करने के लिए इन दोनों कामों को सही समय पर करना बहुत आवश्यक हैं. विष्णु पुराण में उल्लेख किया गया है कि ज्यादा समय तक सोना और ज्यादा देर तक जागना, यह दोनों ही कार्य घातक साबित हो सकते हैं क्योंकि सोने का समय अधिक या कम होने से स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना होती हैं इसलिए मनुष्य को स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए सदैव ब्रह्म मुहूर्त में जगाना चाहिए.
3) निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करें :
विष्णु पुराण के अनुसार निर्वस्त्र होकर स्नान करना जल देवता का अपमान माना जाता है. माना जाता है कि एक बार श्रीकृष्ण ने पानी में स्नान करते हुए गोपियों के वस्त्र छिपा दिए थे, लेकिन बाद में गोपियों को श्रीकृष्ण ने वस्त्र को वापस कर दिया था और यह घटना जलकांड कहलाया. गोपियां निर्वस्त्र स्नान कर रही थी इसी वजह से उनको परेशानी का सामना करना पड़ा इसकी विष्णु पुराण में वर्णित किया गया है कि मनुष्य को कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए.
4) गरीबों को सताना :
विष्णु पुराण में उल्लेख किया गया है कि निर्धन, गरीब, असहाय मनुष्यों को सताना या फिर नुकसान पहुंचाना पाप कहा जाता है इसलिए मनुष्य को इस पाप से खुद को बचाते हुए निर्धन, गरीब या असहायों को सताना नहीं चाहिए.
5) देर तक स्नान करना :
बेहतर स्वास्थ्य के लिए मनुष्य को रोजाना नियमित रूप से स्नान करना चाहिए लेकिन बहुत देर तक स्नान करने से शरीर पवित्र होने के बजाय बीमार हो सकता हैं इसलिए विष्णु पुराण के अनुसार स्नान जैसे कार्य को जल्दी से जल्दी करना चाहिए.
6) अधर्मी व्यक्ति से दूर रहना :
ऐसा मनुष्य जिसका चरित्र सही और ठीक नहीं रहता हैं यह अधर्मी कहलाता हैं और विष्णु पुराण के अनुसार अधर्मी मनुष्य से सदैव एक उचित दूरी बनाकर रखना चाहिए क्योंकि इन मनुष्यों की संगति से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
7) सरसों तेल :
विष्णु पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सरसों तेल का सौदा करता हैं उस पर कर्ज बढ़ता है तो वहीं सरसों तेल का दान करने से शनि का प्रकोप कम होने के साथ ही रोग – कष्ट से भी मुक्ति मिलती हैं.
8) नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहें :
विष्णु पुराण में उल्लेख किया गया है कि मनुष्य को सफलता प्राप्त करने के लिए नकारात्मक वातावर से दूर रहना चाहिए खासकर ऐसे स्थानों पर बिल्कुल नहीं जाना चाहिए जहां का माहौल नकारात्मक हो, विशेषकर रात्रि के समय भूलकर भी शमशान नहीं जाना चाहिए.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) विष्णु पुराण कि रचना किसने किया है ?
ऋषि पराशर.
2) विष्णु पुराण में कितने श्लोक और अध्याय हैं ?
सात हजार श्लोक और छह अध्याय
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