Varahi Devi | हिंदू धर्म पुराणों में कई देवी – देवताओं का उल्लेख मिलता हैं जिनकी उत्पत्ति की कथा हर किसी को आश्चर्य में डाल देती हैं और इन्हीं अनूठी और महत्वपूर्ण देवियों में एक है वाराही देवी. वाराही देवी एक योद्धा देवी होने के साथ ही यह असुरों से युद्ध के दौरान दुर्गा मां के सेना की सेनापति भी थी जिनका मुख वराह का और शरीर स्त्री का है. यह देवी भगवान विष्णु के वराह अवतार की शक्ति हैं जो ” गुप्त वाराही ” के नाम से भी जानी जाती हैं. मान्यता है कि वाराही देवी कष्ट निवारण, सुरक्षा, धन और बुद्धि देने वाली देवी कहलाती है जिनके दर्शन करने मात्र से ही सारे कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही आयु और धन में वृद्धि होती हैं, तो चलिए जानते हैं वाराही देवी के स्वरूप और इनके शक्तिपीठ से जुड़ी मान्यताएं जो कि बहुत ही अद्भुत है.
कौन हैं वाराही देवी ?
हिंदू धर्म में वाराही देवी को सप्तमातृका देवियों में से एक है, सप्तमातृकाएं अर्थात वो सात माताएं जो कि विभिन्न देवताओं की शक्तियों का प्रतिनिधित्व किया करती है. मान्यता है कि वाराही देवी को शक्ति और साहस का प्रतीक कहा जाता है जिनका उल्लेख देवी भागवत, मार्कण्डेय और वराह पुराण में मिलता हैं जिनके अनुसार इन्होंने अंधकासुर, रक्तबीज, शुंभ और निशुंभ जैसे असुरों का विनाश करने में हिस्सा लिया था. वाराही देवी एक उग्र स्वरूप वाली है जिनको भगवान विष्णु के वराह अवतार की शक्ति कहा जाता हैं जिन्होंने असुरों के विरुद्ध युद्ध के समय देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी की सेना की सेनापति थी. पौराणिक कथानुसार देवी ललिता के धनुष और बाण से पांच अलग – अलग विशिष्ट शक्तियां उत्पन्न हुई, जिनको मिलाकर वाराही देवी का निर्माण हुआ.
वाराही देवी के स्वरूप :
वाराही देवी का स्वरूप बहुत ही अद्वितीय हैं और भगवान विष्णु के वराह अवतार के समान ही इनका मुख वराह (सूअर) का और शरीर स्त्री का है जो कि भैंसे यानि कि महिष पर विराजमान है. वाराही देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें एक तलवार, एक बड़ा दंड, एक ढाल और एक हल है. मान्यता है कि वाराही देवी की पूजा आराधना करने से साधक को सुरक्षा, शक्ति और बुद्धि की प्राप्ति होती है तो वहीं यह देवी अपने सुरक्षात्मक स्वरूप के लिए जानी जाती है इसलिए बाधाओं और विजय को प्राप्त करने के लिए वाराही देवी की पूजा किया जाता हैं.
जानते हैं वाराही देवी से जुड़ी कथा को :
पौराणिक कथानुसार एक समय पृथ्वी पर राक्षसों का आतंक था जिससे कि राक्षसों के अत्याचारों से देवता और मनुष्य दोनों ही परेशान और दुःखी थे. तब वाराही का जन्म भगवान विष्णु के वराह के रूप में हुआ था. सप्तमातृकाएं का रूप जो कि विभिन्न देवताओं की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं. वाराही देवी में अपार अद्वितीय शक्ति से उन राक्षसों का नाश किया जो संसार को अधर्म की ओर ले जा रहे थे.
जानते हैं वाराही देवी के महत्व को :
वाराही देवी की विशेष रूप से पूजा रात्रि में किया जाता है और इनकी पूजा विशेष रूप से तंत्र साधन के लिए किया जाता है. मान्यता है कि इनकी पूजा आराधना करने से भक्त को असीम शक्ति और साहस की प्राप्ति होने के साथ ही नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं. वाराही देवी की पूजा विशेष रूप से वाराही जयंती पर किया जाता है जिसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्रों का जाप और हवन किया जाता है. कहा जाता है कि वाराही देवी की पूजा विधिपूर्वक वाराही जयंती पर करने से सभी तरह के भय दूर होने के साथ ही साधक को आत्मविश्वास और मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं.
जानते हैं वाराही देवी के शक्तिपीठ के बारे में :
देवभूमि उत्तराखंड में वाराही देवी का शक्तिपीठ स्थित हैं जहां पर देवी वाराही को समर्पित दो पूजा स्थल हैं जिनमें एक गुह्वोश्वरी तो दूसरी गुप्तेश्वरी और इन स्थलों पर देवी वाराही को सुख, धन और शक्ति की देवी के रूप में पूजन किया जाता है. इस शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां देवी सती का एक अंश मिला था जिसमें एक सूअर का दांत भी था और कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पूर्व इस स्थल पर आकर पांडवों ने अपनी जीत के लिए इनका आशीर्वाद लिया था. धार्मिक मान्यता है कि इस शक्तिपीठ के दर्शन करने मात्र से ही रोगी व्यक्ति कई गंभीर रोगों से मुक्त होने के साथ ही भक्त के सारे कष्ट दूर होती हैं जिससे कि भक्त के आयु और धन में वृद्धि होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) वाराही देवी किस भगवान के अवतार की शक्ति कहा जाता हैं ?
भगवान विष्णु के वराह अवतार.
2) सप्तमातृकाएं कितनी माताएं की शक्तियों का सामना करती हैं ?
सात माता
3) दुर्गा मां की सेना की सेनापति कौन देवी थी ?
वाराही देवी.
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