Parma Ekadashi 2026 | हिंदू धर्म में सभी एकादशियों में से एक मानी जाती है परमा एकादशी जो कि अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती हैं. परमा एकादशी जिसमें “परमा” का अर्थ है सबसे श्रेष्ठ या सर्वोच्च होता है इसी कारण से इस एकादशी को सर्वोच्च एकादशी भी कहा जाता है. मान्यता है कि अधिकमास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी सबसे शक्तिशाली और आध्यात्मिक रूप से समृद्धि देने वाली एकादशियों में से एक है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और पुरुषोत्तम भगवान की पूजा के लिए बहुत ही शुभ होने के साथ ही इस दिन के व्रत को भी बहुत ही पुण्य दायक माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि परम एकादशी के दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करने से जीवन में आने वाली समस्यायां, दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होने के साथ ही साधक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद और कृपा की प्राप्ति होती हैं.
जानते हैं साल 2026 में परमा एकादशी कब है और क्या है शुभ मुहूर्त :
परमा एकादशी अधिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है और पंचाग के अनुसार अधिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत होगी 11 जून 2026 दिन गुरुवार की सुबह 12 बजकर 58 मिनट से लेकर 11जून 2026 दिन गुरुवार की रात्रि के 10 बजकर 36 मिनट तक.
साल 2026 में परमा एकादशी 11 जून 2026 दिन गुरुवार को मनाई जाएगी तो वहीं व्रत का पारण किया जाएगा 12 जून 2026 दिन शुक्रवार की सुबह 05 बजकर 44 मिनट से लेकर सुबह के 08 बजकर 25 मिनट तक.
परमा एकादशी की पूजा विधि :
1) परम एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके साफ स्वच्छ वस्त्र को धारण करें और फिर व्रत का संकल्प लें.
2) इसके बाद एक चौकी पर पीला रंग का कपड़ा बिछाकर उसे पवित्र करके उस पर भगवान विष्णु या फिर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्थापित करें.
3) अब भगवान के समक्ष घी के दीपक को जलाएं और उन्हें पीला पुष्प, फल और मिठाई को अर्पित करें लेकिन ध्यान रखें कि भोग में विशेष रूप से तुलसी पत्ते को अर्पित करें क्योंकि बिना तुलसी पत्ते के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं.
4) अब इसके पश्चात् परम एकादशी व्रत कथा को पढ़ें या फिर सुने और फिर “ॐ नारायणाय” या “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए क्योंकि इस दिन इन मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता हैं.
5) परम एकादशी के व्रत में पूरा दिन निराहार व्रत रख सकते हैं लेकिन अगर यह संभव नहीं हो सकें तो फल, दूध या फिर हल्का सात्विक भोजन ले सकते हैं.
6) अब दूसरे दिन यानि कि द्वादशी तिथि में पुनः भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और फिर ब्राह्मण या फिर किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र का दान करके पारण मुहूर्त में व्रत का पारण करें.
परमा एकादशी व्रत के नियम :
1) परम एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से मानी जाती है अर्थात् दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए.
2) परम एकादशी के दिन सात्विक भोजन करें भूलकर भी लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं करें.
3) इस दिन मन, वाणी और व्यवहार को पवित्र रखने के साथ ही इस दिन झूठ बोलने, क्रोध करने और नकारात्मक विचारों से खुद को बचाकर रखें.
4) परम एकादशी के पावन दिन रात्रि में भगवान विष्णु का भजन और कीर्तन को करना बहुत ही शुभ माना गया हैं.
परमा एकादशी के महत्व :
हिंदू पुराणों में परम एकादशी को बहुत ही प्रभावशाली व्रत बताया गया है विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण ने स्कंद पुराण में अर्जुन को इस व्रत की महिमा को बताया था कि इस दिन व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. अधिक मास में पड़ने के कारण से इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता हैं धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी व्रत करने से आर्थिक समस्याओं, कष्टों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलने के साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती हैं और जीवन में सुख – समृद्धि का आगमन होता हैं इसके अलावा इस व्रत के प्रताप से पिछले जन्मों के पाप कम होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग भी खुलते हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) परमा एकादशी कब मनाई जाती हैं ?
अधिकमास की कृपा पक्ष की एकादशी.
2) साल 2026 में परमा एकादशी कब मनाई जाएगी ?
11 जून 2026 दिन गुरुवार.
3) परम एकादशी को और किस नाम से जाना जाता हैं ?
सर्वोच्च एकादशी.
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