Geeta Updesh | मनुष्य अपने पूरे जीवन भर कठिन परिश्रम तो करता हैं लेकिन उसके घर और जीवन में धन की कमी ही रहती हैं, योजनाएं बना कर कार्य करने के बावजूद भी सफलता नहीं मिलती हैं जिसके कारण से मन सदैव चिंतित और तनाव में रहता हैं. शास्त्रों के अनुसार जीवन में स्थिरता और समृद्धि को प्राप्त करने के लिए केवल मेहनत ही काफी नहीं है बल्कि सुबह की दिनचर्या और आदतें भी भाग्य और जीवन की ऊर्जा पर असर डालती हैं. श्रीमद्भगवद्गीता में उल्लेख किया गया है कि सुबह की कुछ विशेष आदतें मनुष्य के भाग्य को बदलने में सहायता करती हैं और यह आदतें केवल मन को ही नहीं शांत करते बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी लाती है इसलिए इन आदतों को अपनाकर जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बनाए जा सकता हैं.
गीता उपदेश से जानते हैं उन आदतों को जो सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि को बढ़ाता हैं :
1) ब्रह्ममुहुर्त में उठना :
श्रीमद्भगवद्गीता में “काल” अर्थात समय जिसको प्रबल शक्तिशाली और मूल्यवान कहा गया है. समय का सही इस्तेमाल करने वाला मनुष्य ही वास्तविक सफलता को प्राप्त करता हैं. ब्रह्ममुहुर्त यानि कि सूर्योदय से पहले का समय माना जाता है और ब्रह्ममुहुर्त में उठना न सिर्फ धार्मिक तौर पर शुभ और महत्व होता है बल्कि मानसिक दृष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बहुत लाभदायक सिद्ध माना जाता है. कहा जाता है कि सूर्योदय से पहले उठने वाला मनुष्य का मन तेज और स्थिर होने के साथ ही उसकी सोच स्पष्ट और योजनाएं जल्दी – जल्दी सफल होने लगती हैं क्योंकि यह समय आध्यात्मिक अभ्यास, ध्यान, योग और सकारात्मक बदलाव के लिए उचित माना जाता है.
2) उठते ही ईश्वर का ध्यान करना :
सुबह उठते ही मन शांत और कोमल होता हैं और सुबह जागने के तुरंत ही ईश्वर को ध्यान करने से पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती हैं. धार्मिक मान्यता है कि सुबह इन मंत्रों जैसे कि राधे – कृष्ण, सीता – राम या फिर नारायण – नारायण का जप करने के बाद हथेलियों के दर्शन करना चाहिए और यह आदतें न सिर्फ आस्था को जगाती हैं बल्कि आत्मविश्वास में भी वृद्धि करती हैं.
3) सूर्यदेव को जल अर्पित करना :
भगवान सूर्यदेव को ऊर्जा, बेहतर स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक कहा जाता हैं. मान्यतानुसार सुबह तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि इससे मन स्थिर होने के साथ ही नकारात्मक शक्तियां दूर भी रहती हैं. रोजाना नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने से घर में तनाव कम होने से सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता रहती हैं जिससे मन शांत रहता हैं और सही निर्णय ले पाता हैं.
4) भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और पूजा करना :
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा हैं – “मां शरणं वृज” अर्थात जो मेरी शरण में आता है, मैं उसका कल्याण करता है. सुबह श्रीकृष्ण की मूर्ति या फिर थाली में बने चंदन से “स्वास्तिक” और “ॐ” के चिह्न पर तुलसी पत्ते को अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि यह एक तरह की सकारात्मक ऊर्जा तंत्र बन जाता हैं और इससे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती हैं.
5) सकारात्मक कर्म और दान करें :
धार्मिक मान्यता है कि सुबह कुछ चीजों का दान करना और सकारात्मक कर्म, सेवा करना भी भाग्य बदलने में सहायता करती हैं क्योंकि यह न सिर्फ पुण्य के रास्ते को खोलता हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि में भी बढ़ोतरी करता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) भगवान श्रीकृष्ण ने ” मां शरणं वृज ” किसमें कहा है ?
श्रीमद्भगवद्गीता
2) सूर्यदेव को किसका प्रतीक माना जाता है ?
ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि.
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