Ashtadal kamal | अष्टदल अर्थात ” आठ पंखुड़ियों वाला कमल ” और यह भारतीय संस्कृति के अलावा पूजा अनुष्ठान में प्रयोग होने वाला एक पवित्र प्रतीक होता हैं जिसको लक्ष्मी जी के अलावा अन्य देवताओं की पूजा के लिए चावल से या फिर रंगोली से बनाया जाता है. अष्टदल मुख्य रूप से देवी – देवताओं के आसन का प्रतीक होने के साथ ही यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और पवित्रता के लिए आवश्यक माना जाता हैं. मान्यता है कि यह दिव्य शक्ति, समृद्धि और आठ दिशाओं का संतुलन होता हैं जिस पर देवी – देवताओं की मूर्ति या फिर कलश को स्थापित करने से पूजा का फल कई गुना मिलता हैं.
जानते हैं अष्टदल को कैसे बनाया जाता है :
अष्टदल को मुख्य रूप से चावल (अक्षत) या फिर चावल के आटे के अलावा हल्दी या सिंदूर से बनाई जाती है जिसमें आठ पंखुड़ियां को चावल (अक्षत) या फिर चावल के आटे से बनाया जाता है तो बीच में एक केंद्रीय हिस्सा होता है जिसको हल्दी या फिर सिंदूर से सजाया जाता हैं. माना जाता है कि अक्षत से बनाएं गए अष्टदल भी अक्षत के समान ही सकारात्मक ऊर्जा को धारण करने की शक्ति को रखता हैं.
पूजा में अष्टदल के महत्व :
1) दैवीय आसन के रूप में :
अष्टदल भगवान के बैठने के लिए सबसे पवित्र आसन के रूप में उपयोग किया जाता है खासकर मां लक्ष्मी की पूजा में किया जाता है. माना जाता है कि यह पूजा अनुष्ठान में इनको आमंत्रित करने का एक दिव्य प्रतीक होता हैं.
2) दिशाओं का संतुलन बनाए रखने में :
अष्टदल आठ दिशाओं और आठ दिव्य शक्तियों (अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, गरिमा, ईशित्व, वशित्व और प्राकाम्य) का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही यह पूजा स्थल को संतुलन करने के अलावा यह लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा को घर में आमंत्रित करने में सहायक होता हैं.
3) सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करने में :
पूजा स्थान पर अष्टदल बनाने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता हैं जिससे कि यह धन – समृद्धि को आकर्षित करने के साथ ही पूजा को बहुत प्रभावशाली और फलदायक बनाता हैं.
4) अखंडता और पवित्रता का प्रतीक :
अष्टदल को अक्षत यानि कि साबुत चावल से बनाया जाता हैं जो कि अखंडता का प्रतीक होता हैं तो वहीं अक्षत सफेद रंग का होने के कारण से यह शांति व पवित्रता का प्रतीक होने से यह सकारात्मक कंपन को आकर्षित करने में सहायता करता है.
5) पूजा में पूर्ण करने में :
धार्मिक मान्यता है कि हिंदू धर्म में अष्टदल को पूजा – अनुष्ठान के लिए बहुत ही शुभ होता है और इसके बिना पूजा को अधूरी ही माना जाता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) अष्टदल किसका प्रतीक माना जाता है ?
देवी – देवताओं के आसन का प्रतीक.
2) अष्टदल किन – किन का प्रतिनिधित्व करता है ?
आठ दिशाओं और आठ दिव्य शक्तियों का.
3) अष्टदल किससे बनाया जाता है ?
अक्षत (अखंड चावल).
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


