Durga Kavach PDF | श्री दुर्गा कवच अठारह पुराणों में से सबसे शक्तिशाली पुराण मार्केंडेय पुराण का हिस्सा है. यह कवच माँ दुर्गा के 47 श्लोकों का संग्रह है जो माँ दुर्गा की सुरक्षात्मक ऊर्जा का आह्वान करने के साथ यह भक्तों को नकारात्मक शक्तियों, दुर्भाग्य और रोगों से बचाता है. मान्यता है कि इस कवच को ब्रह्माजी ने ऋषि मार्केंडेय को सुनाया था जिसमें ब्रह्माजी ने देवी पार्वती के नौ (9) अलग – अलग रूपों को बताया गया है, जिसको पढ़ने और सुनने से अकाल मृत्यु टलने के साथ यह आध्यात्मिक शक्ति, साहस और निर्भरता प्रदान करने के अलावा दुष्टों से रक्षा भी करता है कहा जाता हैं कि जो भी इस कवच का नियमित रूप से पाठ करता है उसे माँ भगवती दुर्गा से आशीर्वाद मिलता है.
|| श्री दुर्गा कवच (हिंदी में ) ||
ऋषि मार्केंडेय ने पूछा जभी ! दया करके ब्रह्माजी बोले तभी !!
के जो गुप्त मंत्र है संसार में ! हैं सब शक्तियां जिनके अधिकार में !!
हर एक का कर सकता जो उपकार हैं ! जिसे जपने से बेड़ा पार हैं !!
पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का ! जो हर काम पूरे करें सवाली का !!
सुनो मार्केंडेय मैं समझता हूं ! मैं नवदुर्गा के नाम बतलाता हूँ !!
कवच की मैं सुंदर चौपाई बना ! जो अत्यंत हैं गुप्त देयुं बता !!
नवदुर्गा का कवच यह ,पढ़े जो मन चित लाये ! उस पर किसी प्रकार का, कभी कष्ट न आये !!
कहो जय जय जय महारानी की ! जय दुर्गा अष्ट भवानी की !!
पहली शैलपुत्री कहलावे ! दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे !!
तीसरी चंद्रघण्टा शुभ नाम ! चौथी कुष्मांडा सुखधाम !!
पांचवी देवी स्कंद माता ! छटी कात्यायनी विख्याता !!
सातवी कालरात्रि महामाया ! आठवी महागौरी जग जाया !!
नौंवी सिद्धिरात्रि जग जाने ! नव दुर्गा के नाम बखाने !!
महासंकट में बन में रण में ! रूप होई उपजे निज तन में !!
महाविपत्ति में व्योवहार में ! मान चाहे जो राज दरबार में !!
शक्ति कवच को सुने सुनाये ! मन कामना सिद्धि नर पाए !!
चामुंडा है प्रेत पर, वैष्णवी गरुड़ सवार ! बैल चढी महेश्वरी, हाथ लिए हथियार !!
कहो जय जय जय महारानी की ! जय दुर्गा अष्ट भवानी की !!
हंस सवारी वारही की ! मोर चढी दुर्गा कुमारी !!
लक्ष्मी देवी कमल असीना! ब्रह्मी हंस चढ़ी ले वीणा !!
ईश्वरी सदा बैल सवारी ! भक्तन की करती रखवारी !!
शंख चक्र शक्ति त्रिशूला ! हल मूसल कर कमल के फूला !!
दैत्य नाश करने के कारन ! रूप अनेक किन्हें धारण !!
बार बार मैं सीस नवाऊं ! जगदम्बे के गुण को गाऊँ !!
कष्ट निवारण बलशाली माँ ! दुष्ट संहारण महाकाली माँ !!
कोटी कोटी माता प्रणाम ! पूरण की जो मेरे काम !!
दया करो बलशालिनी, दास के कष्ट मिटाओ! चमन की रक्षा करो सदा, सिंह चढी माँ आओ !!
कहो जय जय जय महारानी की ! जय दुर्गा अष्टभवानी की !!
अग्नि से अग्नि देवता ! पूरब दिशा में येंदरी !!
दक्षिण में वाराही मेरी ! नौविधी में खड्ग धारिणी !!
वायु से माँ मृग वाहिनी ! पश्चिम में देवी वारुणी !!
उत्तर में माँ कौमारी जी ! ईशान में शूल धारिणी !!
ब्रहामानी माता अर्श पर ! माँ वैष्णवी इस फर्श पर !!
चामुंडा दसों दिशाओं में, हर कष्ट तुम मेरा हरो ! संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!
सम्मुख मेरे देवी जया ! पाछे हो माता विजैया !!
अजीता खड़ी बाएं मेरे ! अपराजिता दायें मेरे !!
नवज्योतिनि माँ शिवांगी ! माँ उमा देवी सिर की हो !!
मालाधारी ललाट की, और भ्रूकुटी कि यशवर्थिनी ! भ्रूकुटी के मध्य त्रेनेत्रायम घँटा दोनों नासिका !!
काली कपोलों की कर्ण , मूलों की माता शंकरी ! नासिका में अंश अपना, माँ सुगंधा तुम धरो !!
संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!
ऊपर वाणी के होठों की ! माँ चन्द्रकी अमृत करी !!
जीभा की माता सरस्वती ! दांतों की कुमारी सती !!
इस कठ की माँ चंदिका ! और चित्रघँटा घन्टी की !!
कामाक्षी माँ ढोढ़ी की ! माँ मंगला इस बनी की !!
ग्रीवा की भद्रकाली माँ ! रक्षा करे बलशाली माँ !!
दोनों भुजाओं की मेरे , रक्षा करे धनु धरनी ! दो हाथों के सब अंगों की , रक्षा करे जग तारनी !!
शुलेश्वरी, कुलेश्वरी, महादेवी शोक विनाशानी ! जंघा स्तनों और कन्धों की ,रक्षा करे जग वासिनी !!
हृदय उदार और नाभि की, कटी भाग के सब अंग की ! गम्हेश्वरी माँ पूतना,जग जननी श्यामा रंग की!!
घुटनों जंघाओं की करे, रक्षा वो विध्यवासिनी! टकखनो व पावों की करे , रक्षा वो शिव दासनी !!
रक्त मांस और हड्डियों से , जो बना शरीर ! आंतो और पित्त वात में , भरा अग्न और नीर !!
बल बुद्धि अहंकार और, प्राण ओ पाप समान ! सत रज तम के गुणों में, फंसी है यह जान !!
धार अनेकों रूप ही ,रक्षा करियो आन ! तेरी कृपा से ही माँ , चमन का है कल्याण !!
आयु, यश और कीर्ति धन, सम्पत्ति परिवार ! ब्राह्मणी और लक्ष्मी , पार्वती जग तार !!
विद्या दे माँ सरस्वती, सब सुखों की मूल! दुष्टों से रक्षा करो, हाथ लिए त्रिशूल !!
भैरवी मेरी भार्या की ,रक्षा करो हमेशा ! मान राज दरबार में, देवें सदा नरेश !!
यात्रा में दुःख कोई न , मेरे सिर पर आये ! कवच तुम्हारा हर जगह, मेरी करे सहाय !!
है जग जननी कर दया , इतना दो वरदान ! लिखा तुम्हारा कवच यह ,पढ़े जो निश्चय मान !!
मन वांछित फल पाएं वो, मंगल मूर्ति बसाए ! कवच तुम्हारा पढ़ते ही , नवनिधि घर में आये !!
ब्रह्माजी बोले सुनो मार्केंडेय ! यह दुर्गा कवच मैंने तुमको सुनाया !!
रहा आज तक था गुप्त भेद सारा ! जगत की भलाई को मैंने बताया !!
सभी शक्तियां जग की करके एकत्रित ! है मिट्टी की देह को इसे जो पहनाया!!
चमन जिसने श्रद्धा से इसको पढ़ा जो ! सुना तो भी मुंह माँगा वरदान पाया !!
जो संसार में अपने मंगल को चाहे ! तो हरदम कवच यही गाता चला जा !!
दयाबान जंगल दिशाओं दर्शों में ! तू शक्ति की जय जय मनाता चला जा !!
तू जल में तू थल में तु अग्नि पवन में! कवच पहन कर मुस्कुराता चला जा !!
निडर हो विचर मन जहां तेरा चाहे! चमन पाव आगे बढ़ता चला जा !!
तेरा मान धन धान्य इससे बढ़ेगा ! तू श्रद्धा से दुर्गा कवच को जो गाए !!
यही मंत्र यंत्र यही तंत्र तेरा ! यही तेरे सिर से हर संकट हटायें !!
यही भूत और प्रेत के भय का नाशक ! यही कवच श्रद्धा व भक्ति बढ़ाये !!
इसे निसदिन श्रद्धा से पढ़ कर ! जो चाहे तो मुंह माँगा वरदान पाएं !!
इस स्तुति के पाठ से पहले कवच पढ़े! कृपा से आदि भवानी की , बल और बुद्धि बढ़े !!
श्रद्धा से जपता रहें , जगदम्बे का नाम ! सुख भोगे संसार में , अंत मुक्ति सुखधाम !!
कृपा करो मातेश्वरी, बालक चमन नादाँ !तेरे दर पर आ गिरा, करो मैया कल्याण !!
!! जय माता दी !!
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