Budhwa Mangal 2026 | हिंदू धार्मिक मान्यतानुसार हर माह में पड़ने वाली मंगलवार का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिन हनुमानजी को समर्पित होता हैं लेकिन ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली मंगलवार का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली हर मंगलवार बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहलाती हैं. मान्यता है कि ज्येष्ठ माह का मंगलवार भगवान हनुमान जी की उपासना करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि इस समय किए गए पूजा – आराधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि जो भी भक्त श्रद्धा भाव और विश्वास से ज्येष्ठ माह की मंगलवार को हनुमानजी पूजा आराधना करता हैं उसके जीवन की सभी समस्याएं धीरे – धीरे दूर होने के साथ ही सुख – समृद्धि के रास्ते खुलते हैं.
जानते हैं साल 2026 का बुढ़वा मंगल क्यों विशेष है :
ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा मंगल या फिर बुढ़वा मंगल कहा जाता हैं और यह दिन अंजनी पुत्र हनुमानजी को अति प्रिय हैं. मान्यता है कि इस दिन केसरीनंदन हनुमानजी की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से जीवन के सभी दुःख और कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही हनुमान जी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं लेकिन साल 2026 में ज्येष्ठ मंगल यानि कि बुढ़वा मंगल पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है और यह दुर्लभ संयोग इस साल होने वाला अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण से है. इस साल अधिक मास के होने से ज्येष्ठ माह एक नहीं बल्कि दो माह का होगा और पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ माह 02 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा जिससे कि इस साल ज्येष्ठ माह ज्येष्ठ अधिकमास कहलाएगा. धार्मिक मान्यतानुसार अधिकमास के स्वामी यानि कि अधिपति भगवान विष्णु कहे जाते हैं इसलिए अधिक मास लगने के कारण से हनुमान जी की पूजा के साथ – साथ भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद भी प्राप्त होगा.
जानते हैं साल 2026 बुढ़वा मंगल की शुभ तिथि को :
अधिक मास के कारण से साल 2026 में ज्येष्ठ माह 60 दिन को होगा जिससे कि इस बार आठ बुढ़वा मंगल होंगे :
1) पहला बुढ़वा मंगल : 05 मई 2026.
2) दूसरा बुढ़वा मंगल : 12 मई 2026.
3) तीसरा बुढ़वा मंगल : 19 मई 2026.
4) चौथा बुढ़वा मंगल : 26 मई 2026.
5) पांचवा बुढ़वा मंगल : 02 जून 2026.
6) छठा बुढ़वा मंगल : 09 जून 2026.
7) सातवां बुढ़वा मंगल : 16 जून 2026.
8) आठवां बुढ़वा मंगल : 23 जून 2026.
बुढ़वा मंगल की पूजा विधि :
1) बुढ़वा मंगल के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके साफ स्वच्छ वस्त्र को धारण करें, हो सकें तो इस दिन केसरी या फिर लाल रंग के वस्त्र को धारण करें.
2) अब हनुमान जी का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लेकर हनुमान जी के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाएं.
3) हनुमान जी को पुष्प अर्पित करने के बाद गुड़ – चने, लड्डू, नारियल और रोट का भोग लगाएं विशेषकर रोट का भोग अवश्य अर्पित करें क्योंकि हनुमानजी को रोट का भोग अति प्रिय हैं.
4) बुढ़वा मंगल को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर उनका लेप हनुमान जी को लगाना बहुत शुभ माना जाता है, हो सकें तो इस हनुमान जी को चोला चढ़ाएं.
5) अब अंत में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या फिर हनुमान अष्टक का पाठ करके हनुमान जी की आरती उतारें और अंत में सभी को प्रसाद बांटकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें.
बुढ़वा मंगल के महत्व :
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली मंगल को बड़ा मंगल या फिर बुढ़वा मंगल कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी और भगवान श्रीराम का मिलन पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुआ था यही कारण है कि यह पूरा माह हनुमान जी को बहुत प्रिय होता है और इस समय पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं तो वहीं एक पौराणिक कथानुसार महाभारत के दौरान भीम को अपने शक्ति पर बहुत घमंड था और इस घमंड को दूर करने के लिए हनुमान जी एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया और जब भीम उनकी पूंछ को भी हटा पाया तब भीम को अपनी गलती का एहसास हुआ इसी कारण से इस दिन को बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बहुत महत्व होता हैं और ऐसे में इस दौरान हनुमान जी की भक्ति करने से बल, शक्ति मिलने के साथ ही कष्टों से मुक्ति भी मिलती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली मंगलवार को क्या कहा जाता है ?
बुढ़वा मंगल
2) बुढ़वा मंगल किसको समर्पित होता हैं ?
हनुमान जी.
3) हनुमानजी और भगवान श्रीराम का पहला मिलन कब हुआ था ?
ज्येष्ठ माह के मंगलवार.
4) हनुमान जी किनके घमंड दूर करने के लिए वृद्ध वानर का रूप लिया था ?
पांडव पुत्र भीम.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


