Geeta Updesh | हिंदू धर्म के पवित्र ग्रँथों में से श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा दिव्य ग्रँथ हैं जो कई सालों से अपने आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा मनुष्यों को उस समय सहायता करता है जब उसको अपने जीवन में हर तरफ मुश्किलें ही नजर आती हैं क्योंकि कई बार कठिन मेहनत करने के बाद भी मनचाहा सफलता नहीं मिल पाती हैं जिसके कारण से मनुष्य हताश और निराश रहने लगता है जिससे उसके मन में कई तरह के गलत विचार आने लगता हैं और एक गलत कदम उसके भविष्य को प्रभावित कर सकता हैं यही कारण है कि जब मन में निराशा होने लगे और जब जीवन में कुछ भी समझ नहीं आएं तो मनुष्य को श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने को कहा जाता हैं क्योंकि मान्यता है कि श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ने से मनुष्य के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं तो ऐसे में जब जीवन में हर तरफ मुश्किल ही नजर आने लगे तो गीता के इन उपदेशों (गीता उपदेश) को याद रखना चाहिए जिससे कि यह परेशानी से निकालने का कार्य करें.
जानते हैं गीता के उन उपदेशों को जिसको ध्यान में रखकर परेशानी से मुक्ति मिल सकें :
1) परिणाम की चिंता किए बिना कार्य करें :
अक्सर ऐसा होता है कि अच्छे कर्म करने के बाद भी मनुष्य को मनचाहा फल की प्राप्ति नहीं हो पाती हैं लेकिन इस परिस्थिति में मनुष्य को निराश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना कार्य करते रहना चाहिए.
2) भगवान पर विश्वास करें :
कभी – कभी कठिन मेहनत करने के बाद भी कार्य में सफलता नहीं मिल पाने से मनुष्य का मन दुःखी हो जाने से वह टूट जाता है और फिर से मनुष्य कार्य करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है तब ऐसी स्थिति में मनुष्य को भगवान का स्मरण करना चाहिए और उन पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि जो मनुष्य भगवान पर विश्वास करता है उसके साथ भगवान सदैव रहते हैं.
3) मन को शांत रखें :
श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है कि जीवन में चाहे जैसी भी परिस्थिति आ जाएं मनुष्य को क्रोध करने से बचना चाहिए क्योंकि मनुष्य क्रोध में आकर अच्छे से अच्छे कार्य को भी बिगाड़ देता है इसलिए कहा भी गया है कि क्रोध मनुष्य के लिए नर्क के द्वार खोलने का कार्य करती हैं.
4) योजनाबद्ध तरीकें से कार्य करें :
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य को हर एक कार्य योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए क्योंकि इससे कार्य में कोई ही रुकावट पैदा नहीं होती हैं लेकिन वहीं अगर योजना बनाकर कार्य नहीं करने पे मनुष्य को कार्य में सफलता मिलने की संभावना कम होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) हिंदू धर्म का दिव्य ग्रँथ किसे कहा जाता हैं ?
श्रीमद्भगवद्गीता को.
2) श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ने से मनुष्य के मन में किस ऊर्जा का संचार होता हैं ?
सकारात्मक ऊर्जा का.
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