Sita’s Swayamvar | रामायण हिंदू धर्म का एक ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जिनके बारे में कहा जाता है कि रामायण को सबसे पहले देवर्षि नारद जी ने वाल्मीकि को सुनाई और इस को सुनने के पश्चात् वाल्मीकि जी का हृदय परिवर्तन हुआ जिसके बाद इन्होंने रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथ की रचना किया. रामायण में सात कांड है जिनका अपना विशेष महत्व है और इन्हीं कांडों में बालकांड में सीता स्वयंवर का वर्णन किया गया है. रामायण के अनुसार राजा जनक ने सीता जी के वर का चयन करने और परखने के लिए सीता स्वयंवर का आयोजन इस शर्त पर किया था कि जो भी व्यक्ति विशेष भगवान शिव के धनुष को तोड़ेगा उसी से सीता का विवाह कर दिया जाएगा.
सीता स्वयंवर में कई साहसी राजकुमारों ने अपनी उपस्थिति दिया इन्हीं में लंका का रावण भी हिस्सा लिया लेकिन रावण भगवान शिव का धनुष नहीं उठा पाया जबकि वह स्वयं भगवान शिव का परम भक्त और इतना शक्तिशाली था कि एक बार उसने कैलाश पर्वत को उठा लिया था, तो आखिर किस कारण से शक्तिशाली रावण शिव धनुष को नहीं उठा पाया.
जानें भगवान शिव के धनुष के बारे में :
सीता जी के स्वयंवर में रखा गया भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारिक धनुष था जिसका नाम पिनाक था. कहा जाता है कि इस शक्तिशाली धनुष को स्वयं भगवान शिव ने अपने हाथों से बनाया था और जब भी भगवान शिव इस धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते थे तो उनकी एक टंकार से बादल फटने के साथ ही पर्वत हिलने लगता और भगवान शिव इस धनुष के एक तीर से ही त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को नष्ट कर दिया था. मान्यता है कि इस शक्तिशाली धनुष को भगवान शिव ने देवराज इंद्र को सौंप दिया और इंद्र ने इसके पश्चात् राजा जनक के पूर्वज देवराज को दिया, तभी से यह पिनाक धनुष राजा जनक के पास सुरक्षित रखी हुई थी.
आखिर क्यों इस शक्तिशाली धनुष को सीता जी के स्वयंवर में रखा गया था :
बाल्यावस्था में एक बार सीता जी ने जब इस शक्तिशाली को खेल – खेल में उठा लिया तो यह देखकर राजा जनक बहुत आश्चर्य हुए और तभी से तय किया कि जब उनकी पुत्री अपनी बाल्यावस्था में इस शक्तिशाली धनुष को उठाने का सामर्थ्य रखती हैं तो सीता का विवाह वह उन्हीं से कारेंगे जो इस शक्तिशाली धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा को चढ़ा देगा.
आखिर क्यों, सीता स्वयंवर में भगवान शिव के धनुष को रावण नहीं उठा पाया :
लंकापति रावण ने स्वयंवर में हिस्सा लिया था इस अहंकार में कि वह बहुत शक्तिशाली है जिसने एक बार कैलाश पर्वत को उठा लिया था लेकिन भगवान शिव के दिव्य पिनाक धनुष को उठाने के लिए शक्ति की नहीं बल्कि विनम्रता और आत्मिक शुद्धता की आवश्यकता थी, जो कि यह गुण रावण में नहीं थी. रावण जब धनुष को उठाने आया तो उसके मन में अपनी शक्ति को लेकर इतना अहंकार था कि उसने न तो उस धनुष को सम्मानपूर्वक देखा और न ही धनुष के प्रति कोई अच्छी सोच ही रखी यही कारण है कि इस दिव्य धनुष को रावण उठा नहीं पाया जबकि उसे उठाने के लिए वह जितना अधिक शक्ति लगाता धनुष उतना ही भारी होता गया यहां तक की रावण धनुष को हिला भी नहीं सका. भगवान शिव के पिनाक धनुष को उठाने की बारी जब भगवान राम की आई तो सर्वप्रथम उस धनुष को प्रणाम करके उसकी परिक्रमा किया और फिर आदरपूर्ण उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा कर धनुष को तोड़ दिया.
उम्मीद है कि आपको पौराणिक कथा से जुड़ा लेख पसंद आया होगा तो इसे अधिक से अधिक अपने परिजनों और दोस्तों के बीच शेयर करें और ऐसे ही पौराणिक कथाओं से जुड़े अन्य लेख को पढ़ने के लिए जुड़े रहे madhuramhindi.com साथ.
FAQ – सामान्य प्रश्न
1) रामायण ग्रंथ की रचना किसने किया है ?
वाल्मीकि जी.
2) भगवान शिव के धनुष का क्या नाम हैं ?
पिनाक.
3) सीता के स्वयंवर में शिवजी का धनुष किसने तोड़ा ?
भगवान राम.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


