Maa Dhari Devi Mandir | भारत में देवी – देवताओं को समर्पित कई ऐसे मंदिर है जहां हर दिन कोई न कोई चमत्कार देखने को मिलता है. एक ऐसा ही रहस्यमय मंदिर उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के बीचों – बीच स्थित धारी देवी का मंदिर शक्ति के पावन धामों में से एक है जो कि दस महाविद्या में से एक मां काली को समर्पित मंदिर है. धार्मिक मान्यता है कि मां धारी देवी को उत्तराखंड की संरक्षक देवी कहा जाता है अर्थात यह मंदिर चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की रक्षा बाढ़, भूकंप, भूस्खलन जैसी तमाम प्राकृतिक आपदाओं से करता हैं इसके अलावा यह मंदिर कई रहस्य और चमत्कारों से भी जाना जाता हैं.
जानते धारी देवी मां मंदिर से जुड़े रहस्यों को :
1) दिन में तीन बार देवी मां की मूर्ति अपना रूप बदलती हैं :
धारी देवी मां का मंदिर को द्वापर युग से संबंधित माना जाता है जहां आज भी हर दिन एक चमत्कार होता हैं जिससे देखकर हर कोई आश्चर्य में पड़ जाता हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित मां की मूर्ति दिन में तीन बार रूप बदलती है जिसमें सुबह के समय देवी मां एक कन्या के समान दिखती हैं, दोपहर में युवती तो वहीं शाम के समय बूढ़ी महिला के समान दिखाई देती हैं.
2) धारी देवी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा :
पौराणिक कथानुसार धारी देवी के माता – पिता की मृत्यु हो जाने से इनका पालन – पोषण इनके सातों भाइयों ने किया. धारी देवी को भी अपने भाइयों से बहुत स्नेह होने के साथ उनकी सेवा भी किया करती थी किंतु धारी देवी जब 13 साल की उम्र हुई तो उनके पांचों भाइयों की मृत्यु हुआ और बाकी भाइयों को यह गलत फहमी हुई कि उनकी बहन धारी देवी के ग्रह – नक्षत्र उनके आने वाले समय के लिए शुभ नहीं हैं ऐसा सोचकर एक रात धारी देवी के बचे भाइयों ने उनका सिर धड़ से अलग करके गंगा नदी में बहा दिया. धारी देवी के कटे हुए सिर अलकनंदा नदी में बहते हुए धारी गांव में पहुंचा तब वहां मौजूद किसी को लगा कि एक बच्ची डूब रही है लेकिन पानी की गहराई के वजह से यह व्यक्ति आगे नहीं बढ़ पाया.
तब कन्या के कटे हुए सिर से आवाज आई कि – डरो मत ! तुम निर्भय होकर किसी पवित्र भूमि पर मुझे स्थापित करो, ऐसा करने पर मैं तुम्हारी सदैव रक्षा करूंगी. इसके पश्चात उस व्यक्ति ने जब कटे हुए सिर को स्थापित किया तो कन्या का कटा हुआ सिर पत्थर की मूर्ति में बदल दिया और तब से ही धारी देवी में स्थापित करने से आज भक्तजन इनको धारी माता के नाम से पूजते हैं.
3) साल 2013 की आपदा के बाद धारी देवी मंदिर चर्चित हुआ :
कहा जाता है कि साल 2013 में एक बांध निर्माण परियोजना के वजह से धारी देवी मंदिर को तोड़ दिया गया और देवी मां की मूर्ति को उनके मूल स्थान कल्यासौड़ से हटा दिया गया था जिससे कि पूरे राज्य में विनाशकारी बाढ़ और आपदा आई थी जिसमें हजारों लोग मारे गए थे. मान्यता है कि धारी देवी मां की मूर्ति को 16 जून 2013 की शाम को हटाया गया था और मूर्ति हटते ही कुछ घंटे बाद ही राज्य में आपदा आई थी जिसके कारण से यह मंदिर चर्चा में आया लेकिन परिस्थिति और धार्मिक महत्व को लेकर वापस उसी स्थान पर पुनः मंदिर का निर्माण कराके मूर्ति को स्थापित किया गया.
4) धारी देवी मां मंदिर की विशेषता :
धारी देवी मां को उत्तराखंड की संरक्षक माना जाता है और धार्मिक मान्यता है कि चार धामों की रक्षा स्वयं मां धारी देवी ही करती हैं और इनके आशीर्वाद से ही चार यात्रा सफल होती हैं. इस मंदिर में नवरात्रों में विशेष भीड़ हुआ करती हैं वैसे आम दिनों में भी श्रद्धालू इनके दर्शन करने के लिए आते हैं वैसे मंदिर तक पहुंचने के लिए एक पुल से अलकनंदा नदी को पार करना पड़ता हैं. धारी देवी मां मंदिर रोजाना सुबह 06 बजे से शाम के 07 बजे तक खुला रहता हैं.
जानते हैं धारी देवी मां मंदिर कैसे पहुंचे :
धारी देवी मां मंदिर पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है जहां से मंदिर की दूरी 115 km हैं तो वहीं निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट हवाई अड्डा है जहां से मंदिर की दूरी मात्र 145 km की है वैसे हरिद्वार और देहरादून से भी धारी देवी मां मंदिर आसानी से बस या टैक्सी के द्वारा पहुंच सकते है.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) धारी देवी मां मंदिर किस राज्य में स्थित हैं ?
उत्तराखंड
2) धारी देवी मां मंदिर किस देवी मां को समर्पित हैं ?
काली मां.
3) उत्तराखंड का संरक्षक किस देवी को माना जाता हैं ?
धारी देवी मां.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


