Vastu rules for planting Neem tree | भारतीय संस्कृति में पेड़ – पौधों को जीवन रक्षक माना गया हैं तो वहीं ज्योतिष शास्त्र और वास्तु शास्त्र में पेड़ – पौधों को पूजनीय माना जाता हैं जिसमें हर एक पेड़ – पौधों का अपना विशेष महत्व होता है और इनको घर पर लगाना बहुत ही शुभ होता हैं. इन्हीं में से एक है नीम का पेड़ जिनको आयुर्वेद से लेकर धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान माना गया हैं. नीम के पेड़ की सबसे खासियत है कि इनकी पत्तियों, छाल और लकड़ी का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है तो वहीं धार्मिक मान्यता है कि नीम का पेड़ भगवान विष्णु को अति प्रिय हैं यही कारण है कि इसका वेदों और पुराणों में इसका उल्लेख मिलता हैं लेकिन नीम के पेड़ को लगाने के कुछ विशेष नियमों को वास्तु में बताया गया है जिसका पालन करना चाहिए.
जानते हैं नीम पेड़ को लगाने की सही दिशा :
वास्तु के नियमानुसार नीम पेड़ को लगाने के लिए दक्षिण दिशा को सही और शुभ माना गया हैं क्योंकि यह दिशा ऊर्जा को संतुलन करने में सहायक होती हैं इसके अलावा इसको उत्तर – पश्चिम दिशा में भी लगाया जा सकता है क्योंकि यह दिशा स्वास्थ्य के लिए उत्तम मानी जाती है लेकिन ध्यान रखें कि नीम पेड़ को हमेशा घर के बाहर लगाना चाहिए. घर के मुख्य द्वार के नजदीक इसको लगाना नहीं चाहिए कब से कब घर की मुख्य दीवार या बाउंड्री वॉल से 15 से 20 फीट की दूरी पर लगाएं जिससे कि इसकी जड़ें घर की नींव को हानि नहीं पहुंचाएं.
जानते हैं नीम पेड़ को लगाने के महत्व और लाभ को :
1) नकारात्मक ऊर्जा का नाश होना :
वास्तु शास्त्र के अनुसार नीम पेड़ में वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की क्षमता होती हैं और यह पेड़ अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं जिसके कारण से इनकी पत्तियां हवा को पवित्र करती हैं तो वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नीम पेड़ की सबसे बड़ी खासियत होती हैं कि यह अन्य पेड़ों की तुलना में ज्यादा ऑक्सीजन यानि कि यह पेड़ 24 घंटे में कम से कम 20 घंटे तक ऑक्सीजन का निर्माण करती हैं.
2) राहु – केतु से मुक्ति पाना :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु पापी ग्रह का प्रतीक होता हैं. मान्यता है कि राहु – केतु के नकारात्मक असर से छुटकारा पाने में नीम का पेड़ सहायक होता है क्योंकि यह राहु और केतु के नकारात्मक प्रभावों को सोखता है जिससे कि इन ग्रहों से संबंधित समस्याओं से जातक को मुक्ति मिलती हैं.
3) औषधीय गुणों का होना :
नीम की पत्तियों हवा को पवित्र करने का कार्य करती हैं. नीम की पत्तियों में जीवाणुरोधी और कीटाणुनाशक गुण पाया जाता है जो कि घर के आसपास से कीड़ों को दूर रखने में सहायक होती हैं. माना जाता है कि अगर नीम की पत्तियां से गुजरकर आने वाली हवा मुख्य शयनकक्ष में प्रवेश करें तो घर परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बेहतर रहता हैं.
4) शनि प्रकोप से मुक्ति :
धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव को कर्मफल का दाता और न्यायधीश ग्रह कहलाता हैं. कहा जाता है कि नीम के पेड़ को घर की पश्चिम दिशा में लगाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के असर को कम करने के साथ ही शनिदेव की कृपा प्राप्त होती हैं विशेषकर मकर और कुंभ राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलता हैं.
5) मंगल दोष को दूर करने में सहायक होना :
धार्मिक मान्यता है कि नीम पेड़ की पूजा नियमित रूप से करने से मंगल दोष का असर कम होने के साथ ही इस दोष को दूर करता हैं तो वहीं इस में जल को अर्पित करने से हनुमान जी की कृपा भी मिलती हैं.
जानते हैं नीम पेड़ से जुड़े नियम को :
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर नीम पेड़ सुख गया हो तो इसे फौरन हटा देना चाहिए क्योंकि सुखा नीम पेड़ घर में तनाव और आर्थिक तंगी का कारण बनती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) नीम पेड़ को घर की किस दिशा में लगाना चाहिए ?
घर की दक्षिण दिशा.
2) नीम पेड़ को घर की पश्चिम दिशा के लगाने से किस दोष से मुक्ति मिलती हैं ?
शनि दोष.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


