Shri Lakshmi Suktam Paath | श्रीलक्ष्मी सूक्त जिसे श्री सूक्त भी कहा जाता है और यह मां लक्ष्मी को समर्पित सबसे प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र हैं जिसे ऋग्वेद से लिया गया हैं. इसमें धन, समृद्धि और ऐश्वर्य को पाने के लिए 15 या 16 मंत्रों (ऋचाओं) का पाठ किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि श्रीलक्ष्मी सूक्त का पाठ करने वाले जातक को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है. श्रीलक्ष्मी सूक्त की रचना संस्कृत में किया गया है लेकिन अशुद्धिओं से बचने के लिए इनका पाठ हिंदी में भी कर सकते हैं इसलिए श्रद्धा भाव से नियमित रूप से इनका पाठ करना चाहिए विशेषकर इसको प्रत्येक शुक्रवार, नवरात्रि और दीवाली को किया जाएं तो इसका महत्व और भी अधिक बढ़ता हैं.
श्री लक्ष्मी सूक्त पाठ PDF को आप डाउनलोड कर अपने मोबाइल या लैपटॉप में रख सकते हैं और नियमित तौर पर इसे पढ़ सकते हैं. लिंक नीचे दिया हुआ है वहां से आप उसे जरूर डाउनलोड कर ले.
|| श्री लक्ष्मी सूक्तम पाठ हिंदी अनुवाद ||
|| हे लक्ष्मी देवी ! आप कमलमुखी, कमल पुष्प पर विराजमान, कमल – दल के समान नेत्रों वाली, कमल पुष्पों को पसंद करने वाली हैं. सृष्टि के सभी जीव आपकी कृपा की कामना करते हैं, आप सबको मनोनुकुल फल देने वाली है. हे देवी ! आपके चरण – कमल सदैव मेरे हृदय में स्थित हैं ||
|| हे लक्ष्मी देवी ! आपका श्रीमुख, ऊरु भाग, नेत्र आदि कमल के समान हैं. आपकी उत्पत्ति कमल से हुई है. हे कमलनयनी ! मै आपका स्मरण करता हूं, आप मुझ पर कृपा करें.
|| अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने. धनं में जूष तां देवि सर्वाकामांचश्च देहि मे ||
|| हे देवी ! अश्व, गौ, धन आदि देने में आप समर्थ हैं. आप मुझे धन प्रदान करें. हे माता! मेरी सभी कामनाओं को आप पूर्ण करें ||
|| हे देवी ! आप सृष्टि के समस्त जीयों की माता है. आप मुझे पुत्र – पौत्र, धन – धान्य,हाथी – घोड़े, गौ, बेल, रथ आदि प्रदान करें. आप मुझे दीर्घ आयुष्य बनाएं ||
|| हे लक्ष्मी ! आप मुझे अग्नि, धन, वायु, सूर्य, जल, बृहस्पति, वरुण आदि की कृपा द्वारा धन की प्राप्ति कराएं ||
|| हे वैनतेय पुत्र गरुड़ ! वृत्रासुर के वधकर्ता, इंद्र, आदि समस्त देव जो अमृत पीने वाले हैं, मुझे अमृतयुक्त धन प्रदान करें ||
|| इस सूक्त का पाठ करने वाले की क्रोध, मत्सर, लोभ व अन्य अशुभ कर्मों में वृत्ति नहीं रहती, वे सत्कर्म की ओर प्रेरित होते हैं ||
|| हे त्रिभुवनेश्वरी ! हे कमलनिवासिनी ! आप हाथ में कमल धारक किए रहती हैं. श्वेत, स्वच्छ वस्त्र, चंदन व माला से युक्त हे विष्णुप्रिया देवी ! आप सबके मन को जानने वाली हैं. आप मुझ दीन पर कृपा करें ||
|| भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी, माधवप्रिया, भगवान अच्युत की प्रेयसी, क्षमा की मूर्ति, लक्ष्मी देवी मै आपको बारंबार नमन करता हूं ||
|| हम महादेवी लक्ष्मी का स्मरण करते हैं. विष्णुपत्नी लक्ष्मी हम पर कृपा करें, वे देवी हमें सत्कार्यों की ओर प्रवृत्त करें ||
|| जो चंद्रमा की आभा के समान, शीतल और सूर्य के समान परम तेजोमय है उन परमेश्वरी लक्ष्मीजी की हम आराधना करते हैं ||
|| इस लक्ष्मी सूक्त का पाठ करने से व्यक्ति श्री, तेज, आयु, स्वास्थ्य से युक्त होकर शोभायमान रहता हैं. वह धन – धान्य व पशु धन सम्पन्न पुत्रवान होकर दीर्घायु होता हैं ||
|| इति श्रीलक्ष्मी सूक्तम संपूर्णम ||
| PDF Name | Shri Lakshmi Suktam Paath PDF |
| No. of Pages | 04 |
| Page Content | श्री लक्ष्मी सूक्तम पाठ |
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