Karwa Chauth Niyam | सनातन धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व होता है और यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक होता है. पंचाग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का निर्जला व्रत विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं. इस व्रत में विवाहित महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत को रखती है और शाम को चंद्रोदय के बाद व्रत को खोलती है. धार्मिक मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होने के साथ ही वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है लेकिन विवाहित महिलाओं को करवा चौथ व्रत से जुड़ी कुछ विशेष नियमों का पालन अवश्य रूप से करना चाहिए क्योंकि नियम का पालन नहीं करने से महिलाएं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति नहीं होने के साथ ही वैवाहिक जीवन में कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता हैं.
जानते हैं करवा चौथ के उन नियमों को जिनका पालन विशेष रूप से करना चाहिए :
1) सरगी :
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले यानि की ब्रह्म मुहूर्त में विवाहित महिलाओं को सास के द्वारा दी गई सरगी को खाना होता है. इस सरगी में मेवे, फल, ड्राई फ्रूट्स, दूध और मिठाई के साथ श्रृंगार सामग्री होती हैं और इस सरगी को खाने के बाद रात्रि तक चंद्रदेव को अर्ध्य देने तक निर्जला व्रत किया जाता है लेकिन अगर किसी महिला के परिवार में सरगी की परंपरा नहीं हो तो, तब भी करवा चौथ के दिन सूर्योदय के बाद कुछ भी खाने या पीने से परहेज करके निर्जला व्रत का पूर्ण पालन करें.
2) सोलह श्रृंगार :
करवा चौथ के दिन सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है जिसमें मेंहदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़िया, बिंदी और बिछिया को अवश्य धारण करना चाहिए तो वहीं इस दिन लाल, पीली, गुलाबी और नारंगी रंग के वस्त्र को धारण करना चाहिए भूलकर भी काले, नीले या फिर सफेद रंग के चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करें. मान्यता है कि करवा चौथ के दिन सोलह श्रृंगार करके विधि – विधान से करवा माता की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होने के कारण वैवाहिक जीवन भी खुशमय बना रहता हैं.
3) पूजा करने की दिशा :
करवा चौथ की विशेष पूजा के लिए मंदिर इस तरह से लगाएं कि पूजा करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रहे और पीठ पश्चिम दिशा की ओर यानि कि करवा माता की चौकी पूर्व दिशा में स्थापित करें जिससे कि उनका मुख पश्चिम दिशा की ओर रहे. धार्मिक मान्यतानुसार करवा चौथ की पूजा हो या फिर अन्य मांगलिक कार्य की पूजा को सदैव पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए.
4) पूजन विधि :
करवा चौथ व्रत में मिट्टी के करवे लिए जाते हैं और उनसे पूजन किया जाता है. करवा चौथ में संध्या के समय चन्द्रोदय से लगभग एक घंटा पहले करवा माता के अलावा भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा किए जाने के साथ चंद्रदेव की भी पूजा करना आवश्यक होता हैं.
5) कथा सुनना या पढ़ना :
करवा चौथ की पूजा के दौरान व्रत से जुड़ी कथा सुनना या फिर पढ़ना बहुत आवश्यक होता हैं. मान्यता है कि व्रत की कथा सुनने या फिर पढ़ने से विवाहित महिलाओं को अखंड सुहागिन होने का आशीर्वाद मिलने के साथ ही घर में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होने के साथ संतान सुख की भी प्राप्ति होती है.
6) चंद्र दर्शन और अर्घ्य :
करवा चौथ पर चाँद को निकलने पर व्रती महिलाएं चंद्रमा को मिट्टी करवे से ही अर्घ्य दें क्योंकि मिट्टी का करवा शुद्ध होने के साथ यह धरती तत्व का प्रतीक माना जाता है. चांद उदय होने के बाद छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद उनको अर्घ्य दें और फिर उसी छलनी से व्रती महिलाएं अपने पति का चेहरे को देखती हैं.
7) व्रत को खोलना :
छलनी से व्रती महिलाएं अपने पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल पीकर और कुछ मीठा खाकर व्रत को खोले.
8) दान करना :
करवा चौथ व्रत का विधि विधान से पूजा करके दान करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है. करवा चौथ का व्रत करने वाली महिलाएं एक थाली में श्रृंगार सामग्री जैसे कि चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, वस्त्र (साड़ी या अन्य परिधान) और मिठाई इत्यादि अपनी सुहागिन सास को दे लेकिन इनकी जगह यह सभी चीजें जेठानी या फिर बड़ी ननद को भी दे सकती लेकिन ध्यान रखें जिन्हें दे रही है वो सुहागिन हो.
जानते हैं करवा चौथ में किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए :
1) सकारात्मक सोच :
करवा चौथ के दिन मन को शांत रखने के साथ ही वाद – विवाद और नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखें.
2) तामसिक भोजन से परहेज :
करवा चौथ के पारण में लहसुन – प्याज से बने भोजन का सेवन बिल्कुल ना करें.
3) पूजा की छलनी का उपयोग :
जिस छलनी से चांद और पति को देखती है, उस छलनी का घरेलू काम-काज में उपयोग बिल्कुल न करें.
4) नुकीली चीजों से दूर रहें :
करवा चौथ के दिन व्रती को नुकीली चीजों जैसे कि कैची, सुई और चाकू का उपयोग भूलकर भी नहीं करें.
5) बड़े – बुजुर्गों का आशीर्वाद :
करवा चौथ की पूजा समाप्त होने के बाद सास-ससुर या अन्य बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद लें.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
करवा चौथ का व्रत किस तिथि में रखा जाता है ?
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि.
करवा चौथ में किसकी पूजा किया जाता हैं ?
चंद्रदेव.
करवा चौथ में करवा माता की पूजा किस दिशा की ओर करना चाहिए ?
पूर्व दिशा.
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