Nirjala Ekadashi Upay | पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जाती है और यह एकादशी साल की सभी एकादशियों में सबसे बड़ा और कठिन माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत विधिवत और श्रद्धा भाव से रखता हैं तो उसे जीवन – मृत्यु के बंधन से मुक्ति पाने के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती हैं. कहा जाता है कि निर्जला एकादशी चंद्रमा की ऊर्जा से जुड़ी होने से इस दिन व्रत को करने से साधक को मानसिक संतुलन को बनाए रखने के साथ ही आध्यात्मिक क्षमता को बढ़ता है यही कारण है कि यह दिन गुरु और भगवान विष्णु की मजबूत करने के साथ ही यह ग्रहों को संतुलन रखने में भी सहायता करता हैं तो वहीं निर्जला एकादशी पर कुछ विशेष उपायों को करने से ना लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है जिससे कि जीवन में सुख – समृद्धि की प्राप्ति होती है.
जानते हैं निर्जला एकादशी के दिन किए गए उपायों को :
1) मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उपाय :
मान्यतानुसार मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भगवान विष्णु की प्रसन्नता भी आवश्यक होता हैं इसलिए माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए निर्जला एकादशी के पावन दिन भगवान विष्णु को तुलसी की मंजरी को अर्पित करना चाहिए जिससे कि भगवान विष्णु की कृपा बरसने के साथ ही मां लक्ष्मी का घर में आगमन होगा.
2) धन प्राप्ति के लिए उपाय :
निर्जला एकादशी की रात्रि मे साफ – स्वच्छ वस्त्र को धारण करके भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के समक्ष बैठे और एक पीले कपड़े में चांदी का एक सिक्का अगर यह संभव नहीं हो तो एक साधारण सिक्का और एक हल्दी गांठ को रखकर ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” मंत्र का 108 बार जाप करके इस पोटली को भगवान के चरणों में रात भर के लिए रख दें और अगली सुबह पूजा करने के पश्चात् इसे तिजोरी या फिर धन रखने के स्थान पर रखें लेकिन ध्यान रखें कि इस पोटली को छिपाकर रखना है, मान्यता है कि ऐसा करने से धन आकर्षित होने के साथ ही धन की प्राप्ति होती हैं.
3) घर से वास्तु दोष को दूर करने के लिए :
धार्मिक मान्यता है कि तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है. निर्जला एकादशी की शाम को तुलसी के पौधें के समक्ष घी का एक चौमुखी दीपक में कुमकुम और एक चुटकी अक्षत डालकर जलाएं और फिर तुलसी के ग्यारह बार परिक्रमा करके अपने कष्टों से मुक्ति मिलने की प्रार्थना करें लेकिन ध्यान रखें कि एकादशी के दिन को तुलसी को छूना नहीं चाहिए, माना जाता है कि इससे घर का वस्तु दोष फिर होने के साथ ही जीवन में सुख – शांति भी मिलती हैं.
4) ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति के लिए उपाय :
जिन घरों में अक्सर आए दिन कलह – क्लेश रहने से तनाव की स्थिति बनी रहती हो तो गंगाजल में थोड़ी सी केसर को मिलाकर इस जल को घर के मुख्य द्वार और मंदिर में छिड़के मान्यता है कि इस उपाय को करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा कम होने के साथ ही राहु – केतु के अशुभ प्रभाव को भी शांत करता हैं.
5) निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए उपाय :
निर्जला एकादशी के पावन दिन कार्य – स्थल या ऑफिस में शंख को बजाएं मान्यता है कि शंख की ध्वनि वातावरण को पवित्र करने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने के साथ ही निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत भी करता हैं.
6) आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उपाय :
निर्जला एकादशी के दिन से शुरू करके 108 दिनों तक सुबह स्नानादि करके सूर्योदय के समय लक्ष्मी सूक्त और श्री सूक्त का ग्यारह बार पाठ करें मान्यता है कि इन सूक्तों का पाठ करने से आर्थिक तंगी दूर होने के साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत भी होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) निर्जला एकादशी किस ग्रह की ऊर्जा से जुड़ा हुआ होता हैं ?
चन्द्रमा.
2) पंचाग के अनुसार निर्जला एकादशी कब मनाई जाती है ?
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि.
Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


