Vidur Niti | महाभारत काल के महान विद्वान महात्मा विदुर थे जो कि हस्तिनापुर के महामंत्री होने के साथ ही यह धृतराष्ट्र और पांडव के सौतेले भाई थे. महात्मा विदुर ने अपने विदुर नीति में सत्य, संयम, ज्ञान और दया जैसे गुणों को जीवन का हिस्सा बनाने को प्रोत्साहित करते हैं क्योंकि इन सभी को अपनाने से मनुष्य को ना केवल समाज में मान – सम्मान मिलता है बल्कि जीवन भी सुखी और शांतिपूर्ण हो सकता है. विदुर नीति कहती है कि अगर मनुष्य कुछ विशेष बातों अपनाए तो न केवल वह समाज में मान – सम्मान प्राप्त करता हैं बल्कि उसके अन्दर आत्मविश्वास आती है जिससे कि मनुष्य मजबूत होने के साथ ही जीवन की हर चुनौती से लड़ता भी है.
विदुर नीति, जिसको अपनाकर प्राप्त करें समाज में खूब मान – सम्मान :
1) दयावान और करुणामय स्वभाव का होना :
विदुर नीति के अनुसार व्यक्ति के जीवन में दया और करुणा का विशेष महत्व होता है क्योंकि जो मनुष्य दूसरों के दुःख को समझता और उनकी सहायता करता हैं समाज में इसका सम्मान स्वाभाविक रूप से बढ़ता हैं. दयावान मनुष्य को न केवल लोग सम्मान देते हैं बल्कि उनकी बातों का भी आदर करता हैं तो वहीं स्वार्थी और निर्दयी मनुष्य हमेशा अकेला रह जाता हैं. दया का होना न केवल दूसरों को लाभ पहुंचाता है बल्कि स्वयं के मन को भी शांत रखने में सहायक होता है.
2) ज्ञान और विवेक का होना :
विदुर नीति कहती है कि ज्ञान मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत होता है. ज्ञानी मनुष्य को सदैव समाज में सम्मान को प्राप्त करता हैं क्योंकि हर कोई ज्ञानी मनुष्य से सलाह लेता है लेकिन किताबों से प्राप्त ज्ञान ही नहीं बल्कि विवेकपूर्ण ज्ञान भी आवश्यक होता हैं. विदुर नीति के अनुसार जो मनुष्य सही समय पर सही निर्णय लेता है, वह कभी भी शर्मिंदा नहीं है तो वहीं ज्ञानहीन मनुष्य चाहे कितना भी धनवान क्यों न हो अंत में उसका अपमान ही होता है.
3) सत्य की रास्ते पर चलना :
विदुर नीति के अनुसार मनुष्य के चरित्र की सबसे बड़ी पहचान उसका सत्य बोलना क्योंकि झूठ बोलने वाला मनुष्य चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो अंत में सबके सामने इसकी सच्चाई आ ही जाती हैं तो वहीं सत्य बोलने वाला मनुष्य को हमेशा समाज में सम्मान को पाता है और झूठ बोलने की आदत मनुष्य को बार – बार शर्मिंदा करने के साथ ही इनकी प्रतिष्ठा को भी हानि पहुंचाती हैं इसलिए मनुष्य को जीवन में सदैव सत्य का साथ देना चाहिए भले ही परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों ना हो.
4) दूसरों की सहायता करना :
विदुर नीति कहती है कि जो मनुष्य दूसरों की सहायता करता है, ईश्वर भी उसकी सहायता करता है. जरूरतमंद की मदद करना न केवल पुण्य का कार्य है बल्कि सम्मान बढ़ाने का भी कार्य करता है. विदुर नीति के अनुसार दान, सहानुभूति और सहयोग से मनुष्य का चरित्र को उज्ज्वल करता हैं और ऐसे मनुष्य समाज में आदर के पात्र बनते हैं जिससे कि वह कभी अकेले नहीं होता हैं.
5) इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखना :
विदुर नीति के अनुसार इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला मनुष्य ही सच्चा सम्मान पाता है. मनुष्य को क्रोध, काम, लोभ और मोह पर काबू पाना आवश्यक होता हैं क्योंकि अगर मनुष्य इन पर नियंत्रण नहीं रख पात है तो वह बार – बार गलत निर्णय लेता है जिसके कारण उसे बाद में पछताना पड़ता हैं तो वहीं इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला मनुष्य ना केवल स्वयं को संभालता बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
हस्तिनापुर के महामंत्री कौन थे ?
महात्मा विदुर.
विदुर नीति के अनुसार व्यक्ति को किन पर काबू रखना आवश्यक है ?
क्रोध, काम, लोभ और मोह.
विदुर नीति के अनुसार कौन सा गुण मनुष्य के चरित्र को उज्ज्वल करता है ?
दान, सहानुभूति और सहयोग.
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