Sankatnashan Ganesh Stotra PDF | संकटनाशन गणेश स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जो कि भगवान गणेश को समर्पित है और इसमें भगवान गणेश के बारह (12) विशिष्ट नामों के साथ उनके विभिन्न रूपों और गुणों का उल्लेख किया गया है. यह स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित हैं मान्यता है कि इसे महर्षि नारद जी ने भगवान शिव के निर्देश पर पाठ किया था,जब एक बार स्वयं नारद जी घोर संकट में फंस गए थे और इस स्तोत्र के पाठ से उनके सभी संकट दूर हो गए थे. कहा जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से विध्न, कष्ट और संकट दूर होने के साथ ही पूर्ण सिद्धि की भी प्राप्ति होती हैं. नारद पुराण से लिए गए संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ अगर संस्कृत में करना संभव नहीं हो पा रहा है तो हिंदी अर्थ का पाठ करके इस शक्तिशाली स्तोत्र के सम्पूर्ण लाभों को प्राप्त किया जा सकता हैं.
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ रोजाना करने से परिणाम बहुत जल्दी मिलते हैं, परंतु अगर आप रोजाना पाठ नहीं कर सकते तो तो इसे बुधवार के दिन अवश्य पढ़ें. आइए पढ़ते हैं संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी में और आप इसे PDF के रूप में डाउनलोड (Free PDF Download) भी कर सकते हैं और अपने मोबाइल या लैपटॉप में रख सकते हैं और नियमित तौर पर इसे पढ़ सकते हैं लिंक नीचे दिया हुआ है वहां से आप उसे जरूर डाउनलोड कर ले.
Sankatnashan Ganesh Stotra PDF In Hindi – संकटनाशन गणेश स्तोत्र
|| संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित ||
| श्री गणेशाय नमः |
| सिर झुकाकर गौरीपुत्र विनायक (गणेश जी) को प्रणाम करूं, जो भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।. उन्हें स्मरण करने से दीर्घायु, धन और इच्छित सिद्धि प्राप्त होती हैं ||1||
| गणेशजी के बारह नामों – पहला है वक्रतुंड (टेढ़ी सूंड वाले), दूसरा एकदंत (एक ही दांत वाले), तीसरा कृष्ण पिंगाक्ष (श्यामवर्ण और ताम्रवर्ण आँखों वाले) और चौथा गजवक्त्र (हाथी – मुख वाले) ||2||
| पांचवां नाम है लम्बोदर (बड़ा उदर वाले), छठा विकट (अत्यंत विशाल और प्रबल रूप वाले), सातवां विध्नराज (सभी विध्नों के अधिपति) और अथवा धूम्रवर्ण (धुएं के समान वर्ण वाले) ||3||
| नवां नाम है भालचंद्र (माथे पर चन्द्र धारण करने वाले), दसवां विनायक (सर्वश्रेष्ठ नेता), ग्यारहवां गणपति (गणों के स्वामी) और बारहवां गजानन (हाथी के समान मुख वाले) ||4||
| जो मनुष्य इन बारह नामों का स्मरण दिन में तीन बार (प्रातः, मध्यान्ह और सायं) करता हैं, उसे कभी विध्नों का भय नहीं होता हैं और उसे सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं ||5||
| विद्या चाहने वाले को विद्या, धन की इच्छा रखने वाले को धन, संतान चाहने वाले को संतान और मोक्ष चाहने वाले को मुक्ति मिलती हैं ||6||
| जो व्यक्ति नियमित रूप से इस गणपति स्तोत्र का जप करता हैं, मात्र छः महीने में उसे निश्चित फल मिलने लगता हैं और एक वर्ष के भीतर वह अपनी मनोकामनाएं की सिद्धि प्राप्त कर लेता है, इसमें किसी प्रकार का संशय (संदेह) नहीं है ||7||
| जो साधक इस स्तोत्र को लिखकर आठ ब्राह्मणों को श्रद्धा से भेंट करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से सभी प्रकार की विद्याएं और ज्ञान सहज ही प्राप्त हो जाते हैं ||8||
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FAQ – सामान्य प्रश्न
संकटनाशन गणेश स्तोत्र किस पुराण से लिया गया है ?
नारद पुराण.
नारद जी ने किनके निर्देश पर संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ किया था ?
भगवान शिव.
संकटनाशन गणेश स्तोत्र में गणेश जी के कितने नामों का उल्लेख है ?
बारह नाम.


