How did river Kaveri gets its name ? क्या आप जानते हैं दक्षिण भारत मे बहने वाली कावेरी नदी के रहस्य को ?

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River Kaveri | क्या आप जानते हैं दक्षिण भारत मे बहने वाली कावेरी नदी (River Kaveri) के रहस्य को, कैसे पड़ा इसका नाम कावेरी ? कौन थे ऋषि अगस्त्य? दक्षिण भारत में बहने वाली कावेरी नदी बहुत ही प्रसिद्ध है आपने धार्मिक और हिन्दुओ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों के लिए. कावेरी नदी (River Kaveri) से जुड़ी हुई कई धार्मिक पौराणिक कथाएं और रहस्य छुपे हुए हैं आज के अंक में हम जानेंगे एक रहस्य को.

कावेरी नदी (River Kaveri) के पीछे की पौराणिक कथा

एक दिन ऋषि अगस्त्य जंगल मे यात्रा कर रहे थे और उनके पितर देवता (पितर) जंगल के पेड़ों  पर उलटे लटके हुए थे, जब उन्होंने उनसे पूछा कि इस प्रकार क्यों लटके हुए हैं? ऐसा दुर्भाग्य उनके पास क्यों आया? तो उनके पितर देवता (पितर) ने उत्तर दिया “चूंकि ऋषि अगस्त्य का कोई पुत्र नहीं हैं, इसी कारण वह इस भयानक कष्ट भोगने के लिए मजबूर हैं”.

यह सुनकर ऋषि अगस्त्य ने उनसे वादा किया कि वह जल्द ही विवाह कर लेंगे. उन्होंने धरती पर मौजूद उन सभी चीजों को एकत्रित किया जो एक अच्छे इंसान में पाई जाती है और एक कन्या का निर्माण किया. उस समय विदर्भ के राजा संतान प्राप्त करने के लिए बहुत तपस्या एवं जप तप कर रहे थे. ऋषि अगस्त्य उनके पास पहुंचे और अपने द्वारा बनाई गई उस कन्या को राजा को आशीर्वाद स्वरूप दे दी. उस कन्या का नाम लोपमुद्रा रखा गया, साथ ही उस कन्या का लालन पालन राजसी वैभव और ऐश्वर्य के बीच किया गया। जब कन्या विवाह योग्य आयु की हुई, तो ऋषि अगस्त्य वहां पहुंचे और उन्होंने राजा विदर्भ से उस कन्या से विवाह करने की इच्छा जताई. यद्यपि राजा विदर्भ ऋषि से बहुत डरते थे, परन्तु फिर भी उन्होंने ऋषि को संकेत दिया कि वो अपनी पुत्री का विवाह उनसे नहीं करना चाहते, परन्तु इधर लोपमुद्रा ने अपने पिता से कहा कि वह ऋषि अगस्त्य से ही विवाह करना चाहती हैं.

पश्चात राजा ने लोपमुद्रा का विवाह ऋषि अगस्त्य से करवा दिया चुकी ऋषि अगस्त्य पहाड़ों, जंगलों और कटीले रास्तो की यात्रा करते थे और वे नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी इस कष्ट को सहन करे, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी को एक सूक्ष्म रूप देकर  उन्हें एक घड़े में रख लिया और जहां भी जाते अपने साथ उस घड़े को ले जाते थे. भगवान शिव की इच्छा के कारण ऋषि अगस्त्य ने दक्षिण की यात्रा की और वहीं बस गए, हालांकि यह यात्रा बहुत दुर्गम थी परंतु उन्होंने भगवान शिव का आदेश मानकर इसे पूरा किया.

भगवान शिव ने ऋषि अगस्त्य को वरदान दिया था कि उनके घड़े में हमेशा पानी भरा रहेगा। उस समय दक्षिण भारत का यह  क्षेत्र बेहद शुष्क था, जहां कभी कभी पानी बरसता था.

एक बार जब ऋषि अगस्त्य स्नान करने गए तो भगवान गणेश ने एक कौए  का रूप लेकर ऋषि अगस्त्य के घड़े को पलट दिया. घड़े के अंदर ऋषि की पत्नी लोपमुद्रा थीं जो घड़े के पलटने के कारण बारहमासी पानी के साथ शक्तिशाली कावेरी नदी में बदल गई.

ऋषि अगस्त्य की पत्नी लोपमुद्रा का नाम “कावेरी” इसलिए पड़ा क्योंकि उस घड़े का जल एक कौवे द्वारा फैलाया गया, यहां कावेरी का शाब्दिक अर्थ “का” अर्थात “कौवा” और “विरी” अर्थात “फैलाना” हैं.

इस लेख से जाना कावेरी नदी (River Kaveri) के बारे में कि कैसे ऋषि अगस्त्य की पत्नी लोपमुद्रा का नाम कावेरी पड़ा, ऐसे ही और जानकारी और रहस्य को जानने के लिए जुड़े रहे मधुरम के साथ.


FAQ – सामान्य प्रश्न

कावेरी नदी कहां से बहती है ?

यह दक्षिण-पश्चिमी कर्नाटक राज्य में पश्चिमी घाटों के ब्रह्मगिरी पहाड़ी पर उगता है , और दक्षिण-पूर्वी दिशा में बहती है,


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