Hartalika Teej Vrat Niyam | हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है. इस व्रत में तीज माता यानि कि मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा किया जाता है और यह व्रत विवाहित महिलाओं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के साथ रखती है तो वहीं अविवाहित कन्याएं यह व्रत अच्छे वर को प्राप्त करने के लिए रखती है. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन में सुख – समृद्धि का आगमन होने के साथ ही सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद भी मिलता हैं लेकिन हरतालिका तीज व्रत का संपूर्ण फल को प्राप्त करने के लिए पद्म पुराण में बताएं गए विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता हैं.
हरितालिका तीज व्रत के नियम :
1) पहले व्रत के नियम का पालन करना :
नवविवाहित महिलाएं जब पहली बार हरितालिका तीज व्रत को रखती है तो उसे जीवन भर रखना होता हैं किसी भी परिस्थिति में व्रत को नहीं छोड़ा जाता हैं इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस नियम के साथ व्रत की शुरुआत किया है उनका पालन करना होगा जैसे कि अगर निर्जला व्रत रखा है तो सदैव जीवन में निर्जला व्रत ही रखें.
2) व्रत के दिन का पालन करना :
हरितालिका तीज व्रत के दिन सुबह स्नान करके साफ – स्वच्छ वस्त्र को धारण करने के बाद गणेशजी और भगवान शिव – पार्वती की मूर्ति या तस्वीर के सामने व्रत का संकल्प लें लेकिन ध्यान रखें कि पूजा का स्थान साफ और पवित्र होना चाहिए.
3) पूजा सही समय में करना :
हरितालिका तीज व्रत में तृतीया तिथि में ही भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करनी चाहिए. तृतीया तिथि में पूजा गोधूलि और प्रदोष काल यानि कि शाम के समय किया जाता है, यह वो समय होता हैं जब सूर्य डूबता है और रात्रि होने से पहले का समय होता हैं.
4) रात्रि जागरण करना :
हरितालिका तीज व्रत में रात्रि में सोने की मनाही होती है, व्रती महिलाओं को रात में जागकर भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करने के साथ ही रात्रि जागरण के दौरान भजन, कीर्तन और नृत्य करना चाहिए.
5) पूजा की विधि :
हरितालिका तीज पूजा में मां पार्वती, भगवान शिव और गणेशजी की मिट्टी से मूर्ति बनाकर रखें और उन्हें जल, दूध, गंगाजल, पुष्प, फल और मिठाइयों से स्नान कराके धूप और घी के दीपक को जलाएं.
6) सुहाग चीजों को अर्पित करना :
हरितालिका तीज में मां पार्वती को सुहाग की चीजों को चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. सुहाग चीजों में सोलह श्रृंगार की चीजें मां पार्वती को और भगवान शिव को धोती और अंगोछा को अर्पित करें.
7) सोलह श्रृंगार करना :
हरितालिका तीज व्रत में व्रती महिलाओं को सोलह श्रृंगार आवश्यक रूप से करना चाहिए. मान्यता है कि सोलह श्रृंगार करने से मां पार्वती प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाती है लेकिन ध्यान रखें कि व्रत के दौरान काले, नीले, भूरे या फिर सफेद रंग के वस्त्रों को धारण करने से बचना चाहिए.
8) व्रत कथा को सुनना :
हरितालिका तीज व्रत का पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए हरितालिका तीज व्रत कथा को जरूर पढ़ना या फिर सुनना चाहिए. कथा में मां पार्वती के कठोर तप का उल्लेख किया गया हैं जिसमें वह भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या किया था. मान्यता है कि इस कथा को सुनने से मन को शांति और प्रेरणा की प्राप्ति होती है.
9) पारण विधि :
हरितालिका तीज व्रत के अगले दिन सूर्योदय पर स्नान करने के पश्चात् मां पार्वती की मूर्ति को सिंदूर अर्पित करके पूजा किए गए मिट्टी की मां पार्वती, भगवान शिव और गणेशजी की मूर्ति का विसर्जन करें और इसके बाद ही व्रत का पारण करें.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
हरितालिका तीज व्रत कब रखा जाता है ?
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि.
हरितालिका तीज व्रत में किस भगवान की पूजा की जाती है ?
भगवान शिव, मां पार्वती और गणेशजी.
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