Shri Krishna | भगवान विष्णु के आठवें अवतार में श्रीकृष्ण ने पृथ्वी लोक पर अवतार लिए थे जो कि 64 कलाओं में दक्ष होने के साथ सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे. श्रीकृष्ण जहां द्वंद्व युद्ध में माहिर और निपुण थे तो वहीं इनके पास ऐसे शक्तिशाली अस्त्र – शस्त्र थे जो इतने प्रलयकारी थे जिनके आगे ब्रह्मांड में कोई नहीं टिक पाता था.
भगवान श्रीकृष्ण के शक्तिशाली और अचूक अस्त्र-शस्त्र :
1) सुदर्शन चक्र :
सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के सबसे दिव्य और शक्तिशाली शस्त्र था जो कि मन की गति से चलता जिसका निशाना कभी भी नहीं चूकता था और यह बुराई और लक्ष्य का नाश करके वापस श्रीकृष्ण के पास लौट आता था. धार्मिक मान्यता है कि सुदर्शन चक्र को भगवान शिव ने भगवान विष्णु को उस दौरान भेंट किया था जब विष्णुजी असुरों से युद्ध लड़ रहे थे.
2) ब्रह्मास्त्र :
श्रीकृष्ण के पास सबसे दिव्य शस्त्रों में एक ब्रह्मास्त्र था जिसको विनाश का सबसे बड़ा और शक्तिशाली शस्त्र माना गया हैं जिसमें पूरे ब्रह्मांड की शक्ति थी. मान्यता है कि ब्रह्मांड को भगवान श्रीकृष्ण के सबसे शक्तिशाली शस्त्रों में एक माना जाता है जिसमें सभी प्राणियों को पराजय करने और संसार को खत्म करने का शक्ति रखता था.
3) कौमोदकी गदा :
पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को कौमोदकी गदा वरुण देवता ने महाभारत काल में खांडव वन के जलने से पहले दिया था. कौमोदकी गदा बहुत की शक्तिशाली अस्त्र था जिसकी गर्जना इतनी भंयकर मात्र से ही शत्रु भयभीत होने के साथ ही इसके प्रहार से बड़े – बड़े योद्धा और असुर समाप्त भी हो जाते थे. भगवान श्रीकृष्ण कीे कौमोदकी गदा ज्ञान और बुद्धि की शक्ति को दर्शाने के साथ ही यह शारीरिक बाधाओं को दूर करने के अलावा यह आध्यात्मिक अंधकार और अज्ञानता को मिटाने की क्षमता भी रखता हैं.
4) पंचजन्य शंख :
भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख का नाम पंचजन्य शंख था जो कि पंच तत्वों का प्रतीक माना जाता है. पंचजन्य शंख की ध्वनि से युद्ध की शुरुआत किया जाता था और इसकी गूंज से शत्रुओं का हौसला टूटने के साथ उनके हृदय में कंपकंपी छूटने लगती और शत्रु शक्तिहीन हो जाते थे. पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध की शुरुआत कुरुक्षेत्र में पंचजन्य शंख से किया था.
5) शारंग धनुष :
श्रीकृष्ण के दिव्य धनुष का नाम शारंग धनुष था और इस धनुष को भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था जिसका भगवान विष्णु और उनके कई अवतारों ने उपयोग किया था. शारंग धनुष के द्वारा छोड़े गए बाण अचूक निशाना साधते थे और यह शत्रुओं का विनाश करने में सक्षम भी था, पौराणिक मान्यता है कि इसी शारंग धनुष का इस्तेमाल श्रीकृष्ण ने जरासंध और शाल्व जैसे राजाओं के खिलाफ किया था.
6) नारायणास्त्र :
नारायणास्त्र एक तरह की आकाशीय मिसाइल थी जो कि अति शक्तिशाली होने के साथ ही यह विनाशकारी ताकतों से परिपूर्ण थी. इस शस्त्र की शक्ति इसकी दिव्य बुद्धि में बताई गई है और यह शत्रुओं पर अचूक निशाना साधता था. नारायणास्त्र ऐसे शस्त्र था जो कि चलाने वाले की इच्छा के अनुसार ढल जाता था.
7) नंदक तलवार :
यह श्रीकृष्ण की चमकती और दिव्य तलवार हैं जिसको ऋषि विश्वकर्मा ने भगवान विष्णु को भेंट किया था. नंदक तलवार एक ऐसी अविनाशकारी तलवार है जो कि युद्धभूमि में अजेय होने के साथ ही यह शत्रुओं का तुरंत संहार करती थी और नंदक तलवार भगवान की शक्ति, ज्ञान और बुराई को काटने की शक्ति का प्रतीक माना गया हैं.
8) दिव्य रथ :
भगवान श्रीकृष्ण के पास एक विशेष रथ था जो कि शक्तिशाली एवं दिव्य ऊर्जाओं से परिपूर्ण जैत्र और गरुड़ ध्वज नाम के थे जिनको खींचने वाले घोड़ों में भी विशेष गुण थे, श्रीकृष्ण के दिव्य रथ के झंडे पर कपिध्वज थे जो कि बहुत ही शक्तिशाली होने के साथ ही आसमानी शस्त्रों का सामना भी कर सकता था.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) महाभारत युद्ध की शुरुआत किस शंख से की गई थी ?
पंचजन्य शंख.
2) सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु को किसने दिया था ?
भगवान शिव.
3) श्रीकृष्ण के कौन सा शस्त्र चलाने वाले की इच्छा से ढल जाता था ?
नारायणास्त्र.
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