Pitra Paksha | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है जो कि सोलह (16) दिनों का समय होता है और इन दिनों पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. घर – परिवार के मृत सदस्य पितृ देव कहलाते हैं जो कि पितृलोक में वास करते हैं और पितृ पक्ष में जो भी चीजें पितरों को अर्पित किया जाता है वे उन तक इसी लोक में पहुंचती है लेकिन क्या जानते हैं कि इस पितर लोक के देवता कौन हैं और क्यों श्राद्ध और तर्पण के समय पितरों के देवता का नाम लिया जाता हैं.
कौन है पितरों के देवता ?
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार पितरों के देवता और पितर लोक के अधिपति अर्यमा है जो कि ऋषि कश्यप और देवमाता अदिति के बारह (12) पुत्रों अंशुमान, इंद्र, अर्यमन, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और त्रिविक्रम (वामन) में से तीसरे पुत्र है. अर्यमा या अर्यमन को आदित्य नामक सौर – देवताओं में से भी एक कहा जाता है जो आकाश में आकाश गंगा इन्हीं के मार्ग का सूचक होता हैं तो वहीं चंद्रमंडल में स्थित पितृलोक में अर्यमा सभी पितरों के अधिपति (स्वामी) नियुक्त होते हैं और यह हर कुल और परिवार के पितरों को पहचानने के साथ ही उनकी तृप्ति का भी ध्यान रखते हैं.
जानते हैं श्राद्ध और तर्पण क्यों अर्यमा के बिना अधूरा माना जाता है :
पितृ पक्ष में पिता पक्ष के और माता पक्ष के तीन पीढ़ियों तक पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है और इस जलदान और तर्पण करते समय पितरों के देवता अर्यमाजी का नाम लिया जाता हैं. दिव्य पितृ तर्पण, देव तर्पण, ऋषि तर्पण और दिव्य मनुष्य तर्पण के बाद पितृ तर्पण किया जाता है और पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते समय मंत्र
” ॐ अर्यमा न त्रिप्यताम इंद तिलोदकं तस्मै स्वधा नमः | ॐ मृत्योर्मा अमृततं गमय || “
अर्थात – हे अर्यमा! आप पितरों के देव है, हमें मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें और हमारे पूर्वजों की आत्माओं को शांति दें. मान्यता है कि अर्यमा के प्रसन्न होने पर ही पितरों को तृप्ति और शांति मिलती हैं.
पितृ पक्ष केवल एक धार्मिक कर्मकांड ही नहीं होती अपितु पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भी प्रतीक होता हैं. मान्यता है कि पितरों के देवता अर्यमा की उपासना करने और पितरों का तर्पण करने से न सिर्फ पितरों की आत्मा तृप्ति होती हैं बल्कि वंशजों के जीवन में सुख और समृद्धि का भी आगमन होता हैं. शास्त्रों के अनुसार केवल पुत्र ही नहीं बल्कि पुत्रियों और पौत्र भी पितरों का तर्पण कर सकती हैं तो पितर चाहे जिस यौनि में हो वे अपने वंशजों के द्वारा किया गया तर्पण स्वीकार करते हैं जिनसे पितृ को मुक्ति और संतोष मिलता है और परिवार में इनका आशीर्वाद और कृपा बरसता है.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
पितरों के देवता और अधिपति कौन हैं ?
अर्यमा.
अर्यमा किनके पुत्र हैं ?
ऋषि कश्यप और देवमाता अदिति.
पितृलोक कहां स्थित है ?
चंद्रमंडल.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


