Diwali | हर साल दीवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों को खरीदकर उनका पूजन किया जाता है. मां लक्ष्मी धन, संपत्ति और समृद्धि की देवी कहलाती हैं और इनके आशीर्वाद से जीवन में आर्थिक स्थिरता, सुख – समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है तो वहीं भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता के साथ ही विघ्नहर्ता भी कहलाते हैं क्योंकि यह बाधाओं को दूर करते हैं यही कारण है कि दीवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है लेकिन दीवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और गणेशजी की मूर्ति को खरीद रहे हैं तो कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है जिससे कि पूजा का शुभ फल की प्राप्ति हो सकें.
दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी – भगवान गणेश की मूर्ति लेते समय के नियम :
1) मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की अलग-अलग मूर्तियां :
दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी और गणेशजी की मूर्तियां खरीदते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि दोनों की मूर्तियां एक साथ जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए बल्कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति अलग – अलग होनी चाहिए.
2) मां लक्ष्मी का स्वरूप :
मां लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर विराजमान नहीं हो क्योंकि उल्लू पर विराजमान मां लक्ष्मी ” काली ” का प्रतीक माना जाता है इसलिए मां लक्ष्मी की वह मूर्ति खरीदे जिसमें मां कमल पर विराजमान हो. मान्यता है कि कमल पर विराजमान मां लक्ष्मी ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक होती हैं इसके अलावा मां लक्ष्मी की मूर्ति में मां लक्ष्मी का दाहिना हाथ वरमुद्रा में और बाएं हाथ से सोने की सिक्कों की वर्षा हो रही हो.
3) मां लक्ष्मी की खड़ी मूर्ति ना खरीदे :
मां लक्ष्मी की भूलकर भी खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति को नहीं खरीदे क्योंकि मां लक्ष्मी की खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति उनके जाने का प्रतीक होती है तो वहीं कमल पर बैठी मां की मूर्ति स्थिरता और स्थायी धन – समृद्धि का प्रतीक होती हैं.
4) भगवान गणेश का स्वरूप :
भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि गणेशजी के हाथ में उनका प्रिय भोजन मोदक हो क्योंकि मोदक वाली गणेश की मूर्ति घर में सुख – समृद्धि का लाने का कार्य करती है इसके अलावा गणेशजी की मूर्ति में उनका वाहन मूषक (चूहा) का भी होना आवश्यक होता हैं क्योंकि मूषक वाली गणेशजी की मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और समृद्धि का प्रतीक होता हैं.
5) भगवान गणेश की सूंड का सही होना :
घर में पूजन के लिए भगवान गणेश की मूर्ति का सूंड दाई ओर मुड़ी होनी चाहिए लेकिन व्यवसाय से जुड़े लोगों को दुकान के लिए गणेश जी की सूंड बाई ओर मुड़ी वाली मूर्ति खरीदनी चाहिए.
6) मूर्तियों की स्थिति :
दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी – गणेशजी की मूर्ति को घर के मंदिर में उपलब्ध स्थान को ध्यान में रखकर लें, मूर्तियां ऐसा खरीदे जिसे आसानी से मंदिर में स्थापित कर सकें इसके साथ ही मूर्ति कहीं से भी टूटी – फूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए और अगर मूर्ति पर रंग किया गया है तो देख लें कि रंग कहीं से उतर न रहा हो.
7) मिट्टी की मूर्तियां :
धार्मिक मान्यता है कि मिट्टी से बनी मूर्ति की पूजा सबसे अधिक फलदायक होती हैं क्योंकि मिट्टी की मूर्ति से पूजा से देवी – देवताओं की ऊर्जा और आशीर्वाद से घर में स्थिरता का आगमन होता है इसलिए दिवाली पूजन के लिए मिट्टी की बनी मां को – गणेशजी की मूर्तियां खरीदे लेकिन हर साल एक ही मिट्टी की बनी मूर्तियों से दिवाली पूजन करना चाहिए बल्कि पुरानी मूर्तियों को विसर्जित कर दें.
8) अन्य धातुओं की मूर्तियां :
दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी – गणेशजी की पीतल, चांदी या फिर सोने की मूर्तियां हो तो उसे बदला नहीं जाता बल्कि गंगाजल से साफ करके वापस दीवाली पूजन में इस्तेमाल किया जा सकता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
दीवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी की कैसी मूर्ति खरीदनी चाहिए ?
कमल पर विराजमान मूर्ति.
उल्लू पर विराजमान मां लक्ष्मी किसका प्रतीक मानी जाती हैं ?
काली.
भगवान गणेश की मूषक वाली मूर्ति किसका प्रतीक होती है ?
सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और समृद्धि का.
दुकान में गणेशजी मूर्ति का सूंड किस ओर होना चाहिए ?
बाई ओर सूंड.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.


