Vidur Niti | महात्मा विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री होने के साथ यह अपनी बुद्धिमत्ता, न्यायप्रियता और दूरदर्शिता के लिए भी जाने जाते हैं तो वहीं इनको संपूर्ण वेदों के साथ शास्त्र का भी ज्ञान था और इन्हीं सभी ज्ञानों का संग्रह विदुर नीति के नाम से जानी जाती है और इसी विदुर नीति के अनुसार सफलता से अति आवश्यक है अच्छे चरित्र के साथ संतुलित व्यवहार को बनाए रखना क्योंकि जो मनुष्य अपनी बुरी आदतों पर काबू नहीं कर सकता वह धीरे – धीरे समाज में अपना सम्मान खोने के साथ ही जीवन भर भीतर से दुःखी भी रहता हैं.
जानते हैं उन गलत आदतों को जो केवल अपमानित ही नहीं करती बल्कि जीवन में दुःखी भी रखती हैं :
1) लोभ और लालच का होना :
लोभी और लालची मनुष्य कभी भी संतुष्ट नहीं होते हैं, वे सदैव ज्यादा प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं. लालच उसे अनैतिक रास्तों पर ले जाने का कार्य करती हैं जिससे कि मनुष्य को अंत में अपमान और हानि का सामना करना पड़ता है इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि लोभ से मुक्त होने के बाद ही सच्चा सुख को प्राप्त किया सकता हैं.
2) आलस्य और कर्महीनता का होना :
आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है. आलसी मनुष्य न केवल अपने कर्तव्यों से दूर रहता है बल्कि समय को भी बर्बाद करता है ऐसे में विदुर नीति कहती है कि जो मनुष्य आलस्य में हमेशा डूबा रहता हैं उसे ना तो सम्मान मिलता हैं और ना ही सफलता प्राप्त होता हैं तो वहीं मेहनत और क्रियाशीलता ही व्यक्ति के जीवन में सम्मान और सुख लाती हैं.
3) अहंकार और घमंड का होना :
विदुर नीति के अनुसार अहंकार व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन होता हैं क्योंकि अहंकारी मनुष्य कभी भी किसी की सलाह को ना तो सुनता है और ना ही मानता है बल्कि खुद को ही सर्वश्रेष्ठ समझता है. अहंकारी मनुष्य को शुरुआत में हर कोई सहन तो कर लेता हैं किन्तु बाद में वह अकेला ही पड़ जाता हैं क्योंकि अहंकार मनुष्य को अंधा बना देता हैं जिससे कि वह अपनी गलतियां को कभी स्वीकार नहीं कर पाता है.
4) ईर्ष्या और जलन का होना :
दूसरों की सफलता को देखकर दुःखी होना जलन और ईर्ष्या कहलाती हैं. ईर्ष्या रखने वाला मनुष्य कभी भी खुश नहीं रह सकता क्योंकि दूसरों की सफलता को देखकर खुद को छोटा महसूस करता है और ऐसे में विदुर नीति कहती हैं कि ईर्ष्या मनुष्य को न केवल अंदर ही अंदर खोखला करता हैं बल्कि उसके जीवन को तबाह भी कर सकती हैं.
5) क्रोध और बुद्धि का विनाश होना :
क्रोध बुद्धि को नाश कर देती हैं क्योंकि क्रोधी मनुष्य छोटी – छोटी बातों पर बिगड़ने के साथ ही ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल करता है जिससे कि बाद में उसे पछतावा होता है और ऐसे में विदुर नीति कहती है कि क्रोध ना केवल रिश्तों को तोड़ता है बल्कि समाज में उसे बदनाम भी कर देता हैं इसलिए क्रोध पर काबू रखना ही सच्ची बुध्दिमत्ता है.
उम्मीद है कि आपको विदुर नीति से जुड़ा यह लेख पसंद आया होगा तो इसे अधिक से अधिक अपने परिजनों और दोस्तों के बीच शेयर करें और ऐसे ही विदुर नीति से जुड़े अन्य लेख को पढ़ने के लिए जुड़े रहे madhuramhindi.com के साथ.
FAQ – सामान्य प्रश्न
1) हस्तिनापुर के महामंत्री कौन थे ?
महात्मा विदुर.
2) विदुर नीति के अनुसार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन क्या है ?
आलस्य और अहंकार.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


