Geeta Updesh | श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने जो उपदेश अर्जुन को दिया था वो उपदेश आज भी मनुष्यों के जीवन में मार्गदर्शन का कार्य करती हैं. कहा जाता है कि जब जीवन में चारों ओर से मुश्किलें घेर ले तब गीता के उपदेश केवल हिम्मत ही नहीं देते बल्कि सही राह भी दिखाते हैं. श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवन जीने की राह दिखाने वाली ग्रंथ है लेकिन इनके उपदेश केवल पढ़ने के लिए नहीं है बल्कि जीवन में इन उपदेशों को अपनाने भी है, अगर बुरे समय में इन उपदेशों (गीता उपदेश) को याद रखें और अमल किया जायें तो जीवन की मुश्किलें में भी हमें मजबूत बनाने में सहायता करती हैं.
जानते हैं गीता के उन उपदेशों को, जो बुरे समय में हमें मजबूत बनाते हैं :
1) अहंकार से बचें और विन्रम बने रहें :
मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन अहंकार होता हैं. मनुष्य को जब अपने ज्ञान, धन और सफलता पर घमंड होने लगता हैं तब उसका विवेक और बुद्धि क्षीण होने लगता है. गीता के उपदेशों में साफ व स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अहंकार पतन का कारण बनती हैं इसलिए बुरे से बुरे समय और मुश्किलों में भी विन्रम बने रहना चाहिए और हो सकें तो दूसरों की भी बात को सुनना चाहिए क्योंकि दूसरों की बात सुनना हमें सही फैसला लेने में सहायता करना है.
2) फल की चिंता किए बिना कर्म करते रहो :
भगवान श्रीकृष्ण गीता का उपदेश में कहते हैं कि मनुष्य का अधिकार फल की चिंता किए बिना कर्म करने पर है. इंसान बुरे समय में अक्सर परिणाम को लेकर इतना तनाव में चिंतित हो जाता है कि कार्य करना ही कठिन हो जाता हैं और ऐसे में गीता का उपदेश सिखाती हैं कि निष्काम भाव से कर्म करते रहें फल स्वाभाविक रूप से अवश्य मिलेगा.
3) मन को हमेशा नियंत्रित करें :
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु होता है. मन को अगर नियंत्रित कर लिया जाए तो कठिन से कठिन मुश्किल भी आसान लगने लगता है क्योंकि लालच, क्रोध, भय और नकारात्मक विचार मन को कमजोर बनाते हैं इसलिए हो सकें तो आत्मसंयम और विचारों पर नियंत्रण करना चाहिए.
4) ध्यान और आत्म चिंतन को अपनाएं :
गीता का महत्वपूर्ण उपदेश कहता हैं कि मन की शुद्धि के लिए ध्यान और आत्म चिंतन को अपनाएं क्योंकि शांत मन ही सही निर्णय ले पाता है और मुश्किल परिस्थितियों को भी सही नजरिए से देख सकता हैं इसलिए नियमित रोजाना थोड़ा समय ध्यान और शांत मौन में बिताने से मानसिक तनाव कम होने के साथ ही आतंरिक शक्ति भी बढ़ती हैं.
5) अपनी गलतियों को स्वीकार करके सुधार करना :
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता उपदेश के द्वारा हर किसी को आत्म – निरीक्षण की सलाह दिया है जिसके अनुसार जो मनुष्य अपनी गलतियों को पहचान कर उसको सुधारने का प्रयास करता है वहीं मनुष्य आगे बढ़ता है वैसे तो हर कोई बुरे समय में अधिकतर लोग दूसरों को दोष दिया करते हैं जबकि गीता बतलाती है कि मनुष्य की समस्या का मूल कारण स्वयं उसके अंदर होता हैं इसलिए स्वयं को समझना ही बदलाव की शुरुआत है.
6) सत्य और ईमानदारी के रास्ते को कभी ना छोड़ों :
परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन हो, श्रीमद्भगवद्गीता सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दिया करती हैं. गलत मार्ग पर चलने से मिलने वाली सफलता अस्थायी होती हैं तो वहीं ईमानदारी और अच्छे कर्म जीवन भर मान – सम्मान ही दिलाते हैं इसलिए बुरे समय में भी सच का साथ नहीं छोड़ना ही असली जीत है.
7) सुख – दुःख अनित्य है, धैर्य बनाएं रखें :
गीता का उपदेश कहती है कि जीवन में सुख – दुःख आते जाते रहते हैं. कोई भी परिस्थिति सदैव एक समान नहीं रहती हैं इसलिए बुरे समय में घबराने की बजाय धैर्य बनाएं रखना चाहिए. जो मनुष्य धैर्य और आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करता हैं वह अंत में विजय प्राप्त करते हुए सफल होता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) गीता का उपदेश किसने किसको दिया है ?
भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र अर्जुन को
2) भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश कहां पर दिया था ?
कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि.
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