Sandhi Puja | शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाई जाती है जिसमें दुर्गा पूजा की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से होती हैं और दुर्गा पूजा में महाषष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी का विशेष महत्व होता हैं. शारदीय नवरात्रि के महाअष्टमी जिसे दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है और यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होने के साथ ही इस दिन देवी मां के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा आराधना करने के साथ ही इसी दिन संधि पूजा को सबसे अहम माना जाता हैं.
जानें शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर होने वाली संधि पूजा के रहस्य को :
संधि पूजा क्या होती है :
संधि यानी कि दो पहर, तिथि, दिन, पक्ष या अयन का मिलन. जैसे कि जब सूर्यास्त होता है तब दिन और रात्रि के मध्य के समय को संध्याकाल कहा जाता है ठीक उसी तरह जब एक तिथि खत्म होकर दूसरी तिथि की शुरुआत हो रही हो तो इस काल को संधि कहते हैं और इसी काल में पूजा करने को संधि पूजा कहा गया हैं.
संधि पूजा क्यों की जाती है :
संधि पूजा शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि की समाप्ति और नवमी तिथि की शुरुआत के मध्य किया जाता है यानि कि अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि की शुरुआत के 24 मिनट अर्थात कुल 48 मिनट के पवित्र काल संधि काल कहलाती हैं. मान्यता है कि इस काल में देवी दुर्गा मां ने असुर चंड – मुंड का वध किया तो वहीं अगले दिन देवी मां ने महिषासुर का वध किया था यही कारण है कि संधि काल को पूजा और हवन के लिए बहुत ही शुभ माने जाने के साथ ही संधि काल को शक्ति की साधना का सबसे शक्तिशाली और पवित्र माना गया हैं. मान्यता है कि संधि पूजा मनोवांछित कामना को पूर्ण करने वाली और साधकों को सुख – समृद्धि व आरोग्यता को प्रदान करती हैं.
मां चामुंडा के अवतार का संधि पूजा से जुड़ा रहस्य :
पौराणिक कथानुसार जब असुर शुंभ – निशुंभ के सेनापति चंड और मुंड ने तीनों लोकों में आतंक मचाया तब सभी देवता मां भगवती जगदंबा के शरण में जाकर उनकी उपासना करने लगे. देवता गणों की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां कौशिकी अवतरित हुई और चंड – मुंड को युद्ध के लिए ललकारा लेकिन असुर चंड – मुंड ने ही देवी कौशिकी पर आक्रमण किया तब मां कौशिकी के क्रोध से उनके माथे से मां चामुंडा का प्राकट्य हुआ जो कि देवी मां का अत्यंत उग्र और भंयकर रूप वाला था और इसी रूप में मां चामुंडा ने तत्काल ही चंड – मुंड असुर का वध किया. शास्त्रों के अनुसार मां चामुंडा ने संधि काल में चंड – मुंड का वध किया था और इन असुरों के वध करने के बाद से मां दुर्गा को “चामुंडा” के नाम से पुकारा जाने लगा चुकी संधि काल में ही चंड – मुंड का संहार मां चामुंडा ने किया था यही कारण है कि संधि पूजा में मां चामुंडा की पूजा आराधना किया जाता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
शारदीय नवरात्रि में संधि पूजा कब की जाती है ?
महाष्टमी और महानवमी तिथि को.
संधि पूजा में मां दुर्गा के किस स्वरूप की पूजा किया जाता है ?
मां चामुंडा.
मां चामुंडा ने किस असुर का वध किया था ?
चंड और मुंड असुर.
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