Devi Durga Stotra Niyam | धार्मिक ग्रंथों में मां भगवती आदिशक्ति को प्रसन्न करने और इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए दुर्गा स्तोत्र को बताया गया है. मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति हर संकट से मुक्त होने के साथ ही मां भगवती की विशेष कृपा बरसने के साथ ही भक्त के सभी मनोकामनाएं की भी सिद्धि होती हैं. नवरात्रि में विशेष रूप से पूजा के समय दुर्गा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए वैसे इस स्तोत्र का पाठ नवरात्रि के अलावा अन्य दिनों में भी किया जा सकता हैं. कहा जाता है कि जो भी निश्चल मन से एकाग्रचित होकर नियमित इस स्तोत्र का पाठ करता हैं उसे निश्चय ही सिद्धि और सफलता प्राप्त होने के साथ उसके जीवन में सुख – समृद्धि और धन की प्राप्ति होने के अलावा उसे शत्रु पर विजय की भी प्राप्ति होती है लेकिन इन सभी लाभों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि देवी दुर्गा स्तोत्र को नियमों के साथ पढ़ें.
देवी दुर्गा स्तोत्र को पढ़ने के नियम :
1) साफ – स्वच्छ वस्त्र को धारण करना :
दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से पहले स्नानादि करके साफ – स्वच्छ वस्त्र को धारण करें.
2) आसन :
घर के मंदिर की साफ सफाई करने के बाद देवी मां की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष कुशा के आसन पर पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठे.
3) पूजा विधि :
सबसे पहले कलश स्थापना करके भगवान गणेश की पूजा आराधना करने के बाद मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष घी के दीपक ओर धूप को जलाएं और देवी मां को पुष्प, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल और मिठाई को अर्पित करें, ध्यान रखें कि मां को भूलकर भी कनेर, धतूरा और मदार के पुष्प अर्पित न करें.
4) संकल्प लेना :
हाथ में लाल पुष्प, अक्षत और जल को लेकर अपने मन और विचारों को शुद्ध करके देवी दुर्गा स्तोत्र पाठ का संकल्प लें.
5) एकाग्रता और अनुशासन को बनाए रखना :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करते समय ना बीच में बोलें, ना ही इधर उधर देखें और ना ही अपने पैरों को स्पर्श ही करें, पूरी एकाग्रता के साथ पाठ करें.
6) ब्रह्मचर्य का पालन करना :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ के दिनों ब्रह्मचर्य का पालन करने के साथ ही सात्विक भोजन को ग्रहण करें.
7) क्षमा मांगना :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने के बाद देवी मां की घी के दीपक ओर कपूर से आरती अवश्य उतारें और पूजा के समय भूल चूक के लिए मां से क्षमा माँगे.
देवी दुर्गा स्तोत्र को पढ़ने के फायदे :
1) कष्टों से मुक्ति :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से भक्त को सारे कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही जीवन से जुड़े सभी तरह के संकट और विध्न – बाधाएं भी दूर होती हैं.
2) आत्मबल में वृद्धि :
मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से मन का भय खत्म होने के साथ ही सहस्म धैर्य और आत्मबल में वृद्धि होने के अलावा समाज में मान – सम्मान को प्राप्त करता हैं.
3) सकारात्मक ऊर्जा का वास :
धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ होता हैं उस घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर होने के साथ ही घर में सदैव सकारात्मक ऊर्जा का वास होता हैं.
4) शत्रुओ पर विजय की प्राप्ति :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से साधक को कोर्ट – कचहरी के मामलों में सफलता प्राप्त होने के साथ ही शत्रुओं पर विजय की भी प्राप्ति होती हैं.
5) प्रतियोगी परीक्षा में सफलता :
मान्यता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी को देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से शीघ्र ही उसे सफलता की प्राप्ति होती हैं.
6) तरक्की को पाना :
देवी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से करोबार में तरक्की मिलती है तो वहीं नौकरी से जुड़े जातकों को कार्यक्षेत्र में पदोन्नति की प्राप्ति होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
देवी दुर्गा स्तोत्र किसके द्वारा रचित किया गया है ?
वेद व्यास जी.
देवी दुर्गा स्तोत्र को और किस नाम से जाना जाता है ?
देवी भगवती स्तोत्र.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


