Navratri | शारदीय नवरात्रि का पर्व मां भगवती दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित होता हैं और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग – अलग स्वरूपों की पूजा की जाती हैं तो वहीं नौ देवी मां की पूजा में उनको प्रसन्न करने के लिए अलग – अलग फूल अर्पित किए जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि देवी मां को उनके प्रिय फूल को अर्पित करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होती है और अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद देकर उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं.
जानिए नवरात्रि के नौ दिनों तक किस देवी मां को कौन सा फूल अर्पित करें :
1) पहला दिन (मां शैलपुत्री) :
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा आराधना किया जाता है और इस माता को सफेद पुष्प जैसे कि सफेद कनेर या चमेली और लाल गुड़हल के पुष्प को अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ ही जीवन में सुख, शांति और स्थिरता की प्राप्ति होती हैं.
2) दूसरा दिन (मां ब्रह्मचारिणी) :
नवरात्रि के दूसरे दिन तपस्या की प्रतीक मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती हैं और इस मां को सफेद पुष्प जैसे कि मोगरा और कमल के फूल बहुत प्रिय हैं. माना जाता है कि इन फूलों को मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित करने से ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होने के साथ ही तप, संयम और एकाग्रता की भी प्राप्ति होती है.
3) तीसरा दिन (मां चंद्रघंटा) :
नवरात्रि के तीसरे दिन साहस और पराक्रम की देवी मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है और इनको गेंदा का फूल बहुत ही प्रिय है लेकिन इनको गेंदा फूल के अलावा कमल या चमेली के फूल भी अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि गेंदा फूल को अर्पित करने से शत्रु पर विजय की प्राप्ति होने के साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती हैं.
4) चौथा दिन (मां कूष्मांडा) :
नवरात्रि के चौथे दिन सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है और इनको लाल गुड़हल या फिर पीले कनेर के फूल को अर्पित करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन फूलों को अर्पित करने से आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होने के साथ ही रोग – शोक से भी मुक्ति मिलती हैं.
5) पांचवां दिन (मां स्कंदमाता) :
नवरात्रि के पांचवें दिन संतान सुख की दात्री मां स्कंदमाता की पूजा आराधना किया जाता है. स्कंदमाता को कमल, गुड़हल और गुलाब के फूल बहुत ही प्रिय हैं विशेषकर कमल के फूल को अर्पित करने से संतान सुख की प्राप्ति होने के साथ संतान से जुड़ी मुश्किले भी छुटकारा मिलती हैं.
6) छठवां दिन (मां कात्यायनी) :
नवरात्रि के छठें दिन कन्या रूपी कात्यायनी माता की पूजा आराधना किया जाता है और इनको लाल गेंदा, लाल गुड़हल और कमल के फूल को अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता हैं. मान्यता है कि इन फूलों को अर्पित करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने के साथ ही मनचाहे वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन भी खुशमय बना रहता हैं.
7) सातवां दिन (मां कालरात्रि) :
नवरात्रि के सातवें दिन भय और शत्रु विनाशिनी मां कालरात्रि की पूजा आराधना किया जाता है और कालरात्रि मां को अपमार्ग, लाल गुड़हल और रातरानी के फूल बहुत ही प्रिय है. मान्यता है कि इन फूलों को अर्पित करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होने के साथ ही भय और बाधाओं से मुक्ति भी मिलती हैं.
8) आठवां दिन (मां महागौरी) :
नवरात्रि के आठवें दिन पवित्रता और सौंदर्य की देवी मां महागौरी की पूजा आराधना किया जाता है और महागौरी माता को सफेद रंग के फूल बहुत ही प्रिय हैं विशेषकर मोगरा, बेला को अर्पित करना बहुत ही शुभ माना गया है. मान्यता है कि इन फूलों को अर्पित करने से पापों से मुक्ति मिलने के साथ पारिवारिक सुखों की प्राप्ति होने के अलावा सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं.
9) नौवां दिन (मां सिद्धिदात्री) :
नवरात्रि के अंतिम दिन यानि कि नौवें दिन सिद्धि और ज्ञान को देने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा आराधना किया जाता है. मां सिद्धिदात्री को कमल के फूल, लाल गुड़हल और चंपा के फूल बहुत ही प्रिय हैं और इन फूलों को अर्पित करने से सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होने के साथ जीवन में सफलता और ऐश्वर्य की प्राप्ति होने के अलावा जीवन में दिव्य ऊर्जा का संचार भी होता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
किस देवी मां को भय और शत्रु विनशिनी कहा जाता है ?
कालरात्रि मां.
कात्यायनी मां को गेंदा फूल अर्पित करने से किस चीज की प्राप्ति होती है ?
मनचाहे वर और दांपत्य सुख की प्राप्ति.
सृष्टि की अधिष्ठात्री किस देवी मां को कहा जाता है ?
मां कूष्मांडा.
शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए मां चंद्रघंटा को कौन सा फूल अर्पित करना चाहिए ?
गेंदा का फूल.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


