Devi Durga Suktam PDF | देवी दुर्गा सूक्तं (तांत्रोक्तम देवी सूक्तम) देवी माहात्म्य के दुर्गा सप्तशती के पांचवे अध्याय के पहले श्लोक से लेकर 82 वें तक वर्णित किया गया हैं और इस को देवताओं ने देवी भगवती को प्रसन्न करने के गया था. इस शक्तिशाली स्तोत्र का नियमित पाठ करने से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ ही जीवन में धन, ऐश्वर्य, वैभव, आनंद और शांति की प्राप्ति होने के अलावा यह जीवन की सभी बाधाएं, संकटों से मुक्ति मिलने के साथ यह स्तोत्र शत्रु बाधा का भी निवारण करती हैं.
Devi Durga Suktam in Hindi PDF | देवी दुर्गा सूक्तं
|| देवी दुर्गा सूक्तं संस्कृत और हिंदी अनुवाद ||
| नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः |
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणतः स्म ताम ||1||
अर्थ : देवी को नमस्कार है, महादेवी शिवा को सर्वदा नमस्कार है. प्रकृति एवं भद्रा को प्रणाम है, जगदम्बा को नियमपूर्वक नमस्कार है.
| रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः |
ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिन्यै सुखायै सततं नमः ||2||
अर्थ : रौद्रा को नमस्कार है, नित्या, गौरी एवं धात्री को बारम्बार नमस्कार है. ज्योत्स्नामयी, चन्द्ररूपिणी एवं सुखस्वरूपा देवी को सतत प्रणाम है.
| कल्याण्यै प्रणतां वृद्धयै सिद्धयै कुर्मों नमो नमः |
नैऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वान्यैं ते नमो नमः ||3||
अर्थ : शरणागतों का कल्याण करने वाली, वृद्धि एवं सिद्धिरूपा देवी को बारम्बार नमस्कार है. नैऋती (राक्षसों की लक्ष्मी), राजाओं की लक्ष्मी तथा श्रवाणी (शिवपन्नी) – स्वरूपा आप जगदम्बा को बारम्बार नमस्कार है.
| दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै |
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः ||4||
अर्थ : दुर्गा, दुर्गपारा (दुर्गम संकट से बाहर निकलने वाली), सारा (सबकी आधारभूता), सर्वकारिणी, ख्याति, कृष्णा और धूम्रादेवी को सर्वदा नमस्कार है.
| अतिसौम्यतिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः |
नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः ||5||
अर्थ : अत्यंत सौम्य तथा अत्यंत रौद्र रूपा देवी को (मै) नमस्कार करता हूं, उन्हें हमारा बारम्बार प्रणाम है, जगत की आधारभूता कृति देवी को बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||6||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में विष्णुमाया के रूप में कही जाती है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु चेतन्यभिधीयते |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||7||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों से चेतन कहलाती है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||8||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||9||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में निद्रा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||10||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में क्षुधा (भूख) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||11||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में छाया रूप में स्थित है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषुशक्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||12||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||13||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में तृष्णा (प्यास) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||14||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में क्षान्ति (क्षमा) के रूप में स्थित है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||15||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में जाति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||16||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में लज्जा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||17||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में शान्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||18||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में श्रद्धा रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||19||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में कान्ति (प्रकाश) रूप में स्थित हैं. उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||20||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में लक्ष्मी रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||21||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में वृत्ति (स्वभाव) रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||22||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में स्मृति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||23||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में दया रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||24||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में तुष्टि रूप में स्थित है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||25||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में माता रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||26||
अर्थ : जो देवी सभी प्राणियों में भ्रान्ति रूप में स्थित है, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानां चाखिलेषु या |
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्ति देव्यै नमो नमः ||27||
अर्थ : जो जीवों के इन्द्रिय वर्ग की अधिष्ठात्री देवी एवं सब प्राणियों में सदा व्याप्त रहने वाली है, उन व्याप्ति देवी को बारम्बार नमस्कार है.
| चितिरूपेण या कृत्सनमेतद व्याप्त स्थिता जगत् |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||28||
अर्थ : जो देवी चैतन्य रूप से सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त करके स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है.
| स्तुता सुरै: पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रण दिनेषु सेविता |
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद: ||29||
अर्थ : पूर्वकाल में अपने अभीष्ट की प्राप्ति होने से देवताओं ने जिनकी स्तुति की तथा देवराज इंद्र ने बहुत दिनों तक जिनकी सेवा की, वह कल्याण की साधनभूता ईश्वरी हमारा कल्याण और मंगल करें तथा सभी आपत्तियों का सर्वनाश करें.
| या साम्प्रतं चोद्वतदैत्यतापितैरस्माभिरीशा च सुरै सुरैर्नमस्यते |
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभि: ||30||
अर्थ : उद्दंड दैत्यों से सताये हुए हम सभी जिन परमेश्वरी की इस समय नमस्कार करते हैं तथा जो भक्ति से विनम्र पुरुषों द्वारा स्मरण की जाने पर तत्काल ही सम्पूर्ण विपत्तियों का नाश कर देती हैं, वे जगदम्बा हमारा संकट दूर करें.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
देवी दुर्गा सूक्तं किस नाम से जाना जाता हैं ?
तन्त्रोक्तं देवी सूक्तम.
देवी दुर्गा सूक्तम किस ग्रंथ से लिया गया हैं ?
दुर्गा सप्तशती.
दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय में देवी दुर्गा सूक्तं को वर्णित किया है ?
पांचवे अध्याय के पहले श्लोक से 82 वें श्लोक.
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