Kanakadhara Stotram Niyam | कनकधारा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित महालक्ष्मी का बहुत ही चमत्कारी स्तोत्र है जिसमें कनकधारा का अर्थ है “स्वर्ण की धारा” धार्मिक मान्यता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने इस स्त्रोत्र के द्वारा माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करके उन्होंने सोने की बारिश कराई थी. कनकधारा में सिद्ध मंत्र होने के कारण इसका पाठ बहुत जल्द फल देने वाला और दरिद्रता का नाश करने वाला है जिसके नियमित रूप से पाठ करने से घर से दरिद्रता दूर होने के साथ अपार धन – संपत्ति और सुख – समृद्धि प्राप्त होने के अलावा अटके काम भी बनने लगते हैं. कहा जाता है कि कनकधारा स्तोत्र पढ़ने से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है लेकिन यह तब ही हो सकता है जब इस स्तोत्र को नियमों के साथ पाठ किया जाए.
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने के नियम :
1) दिन :
कनकधारा स्तोत्र मां लक्ष्मी को समर्पित है और शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है इसलिए इस स्तोत्र को पढ़ने की शुरुआत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की शुक्रवार से करना चाहिए.
2) शुद्धता :
पाठ करने वाले दिन प्रातः काल स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र को धारण करें हो सकें तो इस दिन पीले रंग के वस्त्र को धारण करें.
3) पाठ करने का समय :
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने का सबसे शुभ समय सुबह या फिर शाम को करना चाहिए लेकिन सुबह में पाठ ब्रह्म मुहूर्त यानि कि सुबह के 04 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह के 06 बजे के बीच का समय में करें तो वहीं शाम में स्नान करके ही पाठ करें.
4) स्थान :
घर के पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के सामने पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करें.
5) पूजा सामग्री :
मां लक्ष्मी या कनकधारा यंत्र के सामने घी के दीपक, धूप को जलाएं और रोली, हल्दी, अक्षत और लाल पुष्प को अर्पित करें.
6) विधि :
पूजन सामग्री को अर्पित करके मां लक्ष्मी को भोग लगाएं और इसके पश्चात् मां लक्ष्मी का ध्यान करके कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें.
7) संख्या :
कनकधारा स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से रोजाना कम से कम एक बार करें लेकिन विशेष फल की प्राप्ति के लिए एक दिन में तीन बार यानि कि सुबह, दोपहर और शाम के समय पाठ करना अति फलदायक होता हैं.
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने के फायदे :
1) दरिद्रता से मुक्ति :
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने से यह घर से गरीबी और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक होने के साथ यह खुशी को लाने में सहायता भी करता हैं.
2) मनोकामनाएं को पूर्ण करने में सहायता करना :
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने वाले साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही जीवन में ऐश्वर्य की भी वृद्धि होती हैं.
3) कर्ज से छुटकारा दिलाना :
मान्यता है कि कनकधारा स्तोत्र को नियमित रूप से पाठ करने से पुराना से पुराना कर्ज से छुटकारा मिलने के साथ ही उधार से भी राहत मिलती हैं.
4) व्यापार में उन्नति :
बहुत मेहनत करने के बाद भी व्यापार में उन्नति नहीं हो रही है तो कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने से व्यापार में उन्नति मिलने के साथ ही नौकरी में पदोन्नति भी मिलती है.
5) मानसिक शांति मिलना :
कनकधारा स्तोत्र को पढ़ने से मन को संबल और आत्मिक शांति मिलने के साथ ही सकारात्मकता और मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
कनकधारा स्तोत्र किनके द्वारा रचित किया गया है ?
आदिगुरु शंकराचार्य.
कनकधारा स्तोत्र किस को प्रसन्न करने के लिए किया जाता हैं ?
मां लक्ष्मी.
कनकधारा स्तोत्र को किस दिन से शुरू करना चाहिए ?
शुक्रवार.
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