Vastu Dosh Nivaran Yantra | वास्तु शास्त्र में पांच तत्व जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश होते है और इनके बीच संतुलन होना आवश्यक होता हैं लेकिन जिस स्थान पर असंतुलन उत्पन्न हो जाएं तो यह वास्तु दोष कहलाता है जिसके कारण से नकारात्मक ऊर्जा पनपने लगती है और जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आने लगती हैं जैसे कि धन हानि, मेहनत का फल नहीं मिलना, बार – बार असफल होना, स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां और रिश्तों में कलह – क्लेश का होना. वास्तु शास्त्र में ऐसी स्थिति से बचने के लिए कई नियमों को बताने के साथ ही वास्तु दोष निवारण यंत्र के बारे में भी बताया गया है. मान्यता है कि वास्तु दोष निवारण यंत्र बहुत ही शक्तिशाली होता हैं और इसको घर में रखने से वास्तु दोष दूर होने के साथ ही घर में सुख – समृद्धि का आगमन होता हैं.
क्या है वास्तु दोष निवारण यंत्र :
वास्तु दोष निवारण यंत्र एक चौकोर आकार का यंत्र होता हैं जो कि अष्टधातु से बनाया जाता है और इस यंत्र की सबसे बड़ी खासियत है कि किसी भी तरह की तोड़ – फोड़ किए बिना और ज्यादा बदलाव किए बिना यह स्थान के सभी वास्तु दोषों को दूर कर देता हैं. माना जाता है कि वास्तु दोष निवारण यंत्र बहुत जल्द ही उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने की क्षमता होती हैं जिसका शुभ प्रभाव जीवन के हर पहलू पर दिखाई देता हैं क्योंकि अष्टधातु से बना यह चौकोर यंत्र अति लाभ देने के साथ ही यह जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को लाता हैं.
वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने के नियम :
1) वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने से पहले इसको गंगाजल से पवित्र करके इसके समक्ष धूप और दीपक को जलाएं.
2) वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने की सही दिशा उत्तर – पूर्व दिशा सबसे पवित्र और शुभ मानी जाती है. इसको घर के मुख्य द्वार के पास या फिर घर के पूजा घर में स्थापित किया जा सकता हैं लेकिन इसको स्थापित करते समय ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यंत्र का मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए लेकिन इस दिशा में संभव न हो तो इसे दक्षिण – पूर्व की दीवार पर स्थापित किया जा सकता है.
3) इस यंत्र को स्थापित करने के बाद इसकी नियमित रूप से पूजा करने के साथ ही इसके मंत्र का जाप करना चाहिए मान्यता है कि ऐसा करना इसके असर को सक्रिय रखता हैं.
4) वास्तु दोष निवारण यंत्र कभी भी टॉयलेट के नजदीक, बेडरूम या फिर किसी शीशे के बिल्कुल विपरीत दिशा में नहीं लगाएं.
5) वास्तु दोष निवारण यंत्र को कभी भी लोहे या फिर पत्थर से बने यंत्र को घर में स्थापित नहीं करना चाहिए और ना ही इसे कभी भी रविवार या मंगलवार को स्थापित करना चाहिए.
वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने के फायदे :
1) वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने से घर में केवल धन लाभ ही नहीं होता जबकि यह घर परिवार का वातावरण को खुशहाल भी बनाता हैं.
2) मान्यता है कि यह यंत्र बुरी नजर, बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर करने के साथ ही यह घर में सकारात्मकता को बनाकर रखता हैं.
3) वास्तु दोष निवारण यंत्र को घर, दुकान या फिर ऑफिस में स्थापित करने से यह वहां पर मौजूद असंतुलित ऊर्जा को संतुलित करता हैं.
4) घर में इस यंत्र को स्थापित करने से यह घर के सदस्यों के बीच कलह – क्लेश को दूर करके उनके बीच आपसी प्रेम – स्नेह को बढ़ाता हैं.
5) मान्यता है कि घर में वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित करने से यह घर के वातावरण को खुशहाल बनाने के साथ ही यह घर के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होने के अलावा यह विद्यार्थी की एकाग्रता को भी बढ़ाता हैं.
उम्मीद है कि आपको वास्तु दोष निवारण यंत्र से जुड़ा यह लेख पसंद आया होगा तो इसे अधिक से अधिक अपने परिजनों और दोस्तों के बीच शेयर करें और ऐसे ही यंत्रों से जुड़े अन्य लेख को पढ़ने के लिए जुड़े रहे madhuramhindi.com के साथ.
FAQ – सामान्य प्रश्न
1) वास्तु दोष निवारण यंत्र को स्थापित किस दिशा में करना चाहिए ?
उत्तर – पूर्व दिशा.
2) वास्तु दोष निवारण यंत्र किसका बना होता हैं ?
अष्टधातु.
3) वास्तु विज्ञान में कौन से पांच तत्व होते हैं ?
जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


