Kuber Yantra | कुबेर यंत्र धन के देवता कुबेर को समर्पित एक ऐसा पवित्र ज्यामितीय चिन्ह है जिसको घर या कार्यस्थल में धन – संपत्ति, सुख – समृद्धि और सौभाग्य को आकर्षित करने के लिए स्थापित किया जाता है. कुबेर यंत्र को तांबे या फिर अष्टधातु पर बनाया जाता है और इस यंत्र को लेकर मान्यता है यह सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करने के साथ आर्थिक तंगी को दूर करके सौभाग्य को बढ़ाता हैं लेकिन इसके शुभ परिणाम तभी प्राप्त होते हैं जब इसे सही नियमों के साथ स्थापित किया जाए.
जानते हैं कुबेर यंत्र को स्थापित करने के नियमों को :
1) सही दिशा :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान कुबेर उत्तर दिशा के स्वामी कहलाते हैं इसलिए कुबेर यंत्र को घर या फिर कार्यस्थल (ऑफिस) में उत्तर दिशा में ही स्थिति करना चाहिए लेकिन अगर उत्तर दिशा में स्थान नहीं हो तो इसे ईशान कोण यानि कि उत्तर – पूर्व दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है क्योंकि उत्तर – पूर्व दिशा सबसे पवित्र दिशा होने से यहां से सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता हैं.
2) शुभ दिन :
कुबेर यंत्र को स्थापित करने के लिए सबसे शुभ दिन धनतेरस, दीवाली, अक्षय तृतीया के अलावा पूर्णिमा या गुरुवार या फिर शुक्रवार का दिन माना जाता है.
3) स्थान :
कुबेर यंत्र को पूजा घर में रखने के अलावा इसे तिजोरी के अंदर या फिर धन रखने वाले स्थान पर रखें.
4) पूजा विधि :
कुबेर यंत्र को सर्वप्रथम लाल कपड़े पर रखकर गंगाजल या कच्चा दूध से शुद्ध करके घी के दीपक और धूप जलाकर यंत्र की पूजा करें और कुबेर मंत्र ” ॐ श्रीं, ॐ ह्री श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नमः ” मंत्र का 108 बार जाप करें.
5) शुद्धता :
कुबेर यंत्र को सदैव साफ – स्वच्छ स्थान पर रखने के साथ ही इसकी रोजाना नियमित रूप से पूजा करें विशेषकर शुक्रवार के दिन.
जानते हैं कुबेर यंत्र को स्थापित करने के फायदे को :
1) आर्थिक समृद्धि :
कुबेर यंत्र की स्थापना से घर में धन – समृद्धि आने के साथ ही आय के नए स्त्रोत के रास्ते खोलने के अलावा यह यंत्र बचत वृद्धि करने और धन की रक्षा करने में भी मदद करता हैं.
2) व्यापार में तरक्की :
कार्यस्थल (ऑफिस) या फिर तिजोरी में इसको स्थापित करने से व्यापार में लाभ और सफलता मिलने के साथ ही नौकरी में पदोन्नति भी मिलती हैं.
3) रुका हुआ धन प्राप्त होना :
कुबेर यंत्र को स्थापित करने से और इसके प्रभाव से कहीं पर फंसा हुआ धन या फिर खोया हुआ धन वापस मिलने की प्रबल संभावना होती हैं.
4) वास्तु दोषों को दूर करने में सहायक होना :
मान्यता है कि कुबेर यंत्र को उत्तर दिशा में होने से यह वास्तु दोषों को दूर करने के साथ ही यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता हैं.
5) सौभाग्य में बढ़ोत्तरी :
मान्यता है कि कुबेर यंत्र भाग्य को चमकाने के साथ ही यह धन को आकर्षित करने में सहायक होता है जिससे कि अनचाही खर्चों और कर्जों से मुक्ति मिलती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) कुबेर यंत्र किस देवता को समर्पित होता है ?
भगवान कुबेरदेव
2) कुबेर यंत्र को किस दिन स्थापित करना चाहिए ?
गुरुवार या शुक्रवार.
3) कुबेर यंत्र को किस दिशा में स्थापित करना चाहिए ?
उत्तर दिशा या फिर उत्तर – पूर्व दिशा (ईशान कोण).
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


