Jagannath Rath Yatra | हिंदू धर्म के सबसे बड़े और भव्य धार्मिक आयोजनों में एक है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और यह यात्रा ओडिशा के पुरी में निकलते हैं जिसका हर साल इस पावन यात्रा का इंतजार करोड़ों श्रद्वालुओं को रहता हैं. भगवान जगन्नाथ पूरे साल मंदिर में बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान होते हैं लेकिन साल में केवल एक बार इन सभी के साथ भगवान जगन्नाथ मंदिर से बाहर निकलते है और यह यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होकर नौ दिनों तक मनाई जाती हैं. इस यात्रा में धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सामाजिक संदेशों का अद्भुत संगम देखने को मिलता हैं और इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा दिव्य और भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर तक यात्रा किया करते हैं, जिसको भगवान की मौसी का घर कहा जाता हैं.
भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा से जुड़े रहस्य
जानिए नौ दिवसीय आयोजन में कब क्या होता हैं :
प्रथम दिन : आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि और इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपनी दिव्य रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर को प्रस्थान के लिए जाते हैं.
अगले सात दिन : भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा गुंडीचा मंदिर में विश्राम करते हुए अपने भक्तों को दर्शन देते हैं.
नौवां दिन : इस दिन को बहुड़ा यात्रा के नाम से जाना जाता है जिसमें सभी देवता अपने मुख्य मंदिर श्रीमंदिर को लौट आते हैं.
जानिए साल में एक बार भगवान जगन्नाथ को मंदिर से बाहर आने की मान्यताएं :
1) भक्तों को दर्शन देना :
साल में एक बार रथ यात्रा (Rath Yatra) का सबसे बड़ा संदेश यही होता हैं कि भगवान स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए उनके बीच आते हैं. बाकी सामान्य दिनों में श्रीमंदिर में गैर – हिंदुओं या फिर अन्य श्रद्धालुओं को प्रवेश संभव नहीं होता इसलिए भगवान स्वयं रथ पर विराजमान होकर सभी भक्तों को दर्शन देने के लिए खुले मार्ग पर मंदिर से बाहर निकलते है.
2) समानता और मानवता का संदेश देना :
रथ यात्रा में शामिल होने और रथ को खींचने में कोई भेदभाव नहीं होता है, चाहे उसकी जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति चाहे कुछ भी हो यह आपसी भाईचारे और समानता का प्रतीक होता हैं.
3) मौसी का घर :
पौराणिक मान्यता अनुसार एक बार भगवान श्रीकृष्ण की छोटी बहन ने पुरी नजर को देखने और घूमने को इच्छा जाहिर किया तब अपनी प्रिय बहन की इच्छा को पूर्ण करने के लिए भगवान जगन्नाथ और भाई बलभद्र अपनी बहन सुभद्रा को लेकर रथ पर सवार होकर नगर घूमने निकले और इस रथ यात्रा के दौरान यह तीनों गुंडीचा मंदिर पहुंचते हैं और यह गुंडीचा भगवान की मौसी का घर माना गया है जहां कुछ दिनों तक विश्राम करने के बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से वापस भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा श्रीमंदिर को लौटते है.
4) विश्वास का प्रतीक :
भक्तों का अटूट विश्वास है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन करने से विशेष पुण्य फलों की प्राप्ति होने के साथ जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति भी मिलती हैं तो वहीं रथ यात्रा में रथों की रस्सी खींचने से सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही जन्म – मरण के बंधन से मुक्त हो जाता हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा कब निकलती हैं ?
आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि.
2) भगवान जगन्नाथ बड़े भाई और छोटी बहन के साथ किनके घर जाते हैं ?
मौसी के घर.
3) भगवान की श्रीमंदिर में आने की यात्रा क्या कहलाती हैं ?
बहुड़ा यात्रा.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


