Pashupati Vrat | सनातन धर्म में पशुपति व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत किसी भी माह के सोमवार से शुरू होकर पांच सोमवार तक किया जाता है और पशुपति व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव का एक नाम पशुपतिनाथ हैं जिनमें पशुपति का शाब्दिक अर्थ है ” इस ब्रह्मांड में रहने वाले समस्त जीवों का मालिक अर्थात जीवन का देवता “. नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान शिव पशुपतिनाथ स्वरूप में चार मुख वाले लिंग में आदिकाल से स्थापित है और इनके बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव का यह स्वरूप मनुष्यों के किसी भी मनोकामनाएं को पूरा करने की क्षमता रखते हैं. शिव महापुराण के अनुसार पशुपति व्रत को अगर कोई सच्चे श्रद्धा भाव और पूरे विधि विधान से जिस भी मनोकामनाएं को पूर्ण करने के लिए किया जाता है वो अवश्य पूर्ण होने के साथ ही जीवन के हर तरह के कष्टों से मुक्ति भी मिलती हैं.
पशुपति व्रत की पूजा विधि :
1) जिस भी सोमवार को पशुपति व्रत को शुरू करना है उस दिन सुबह स्नानादि करके स्वच्छ साफ वस्त्र को धारण करके पांच सोमवार व्रत करने का संकल्प लें.
2) इसके बाद घर के नजदीक के शिव मंदिर जाएं और साथ में पूजा की थाली में पूजन सामग्री जैसे कि जल, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, लाल चंदन, धूप और पंचामृत को रखें.
3) मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करें और इस पूजा थाली को घर आने पर ऐसे ही रख दें.
4) इसके बाद सुबह की इसी थाली में मीठा प्रसाद जिसे व्रती ने स्वयं बनाया हो, को रखने के साथ ही छह घी के दीपक को रखकर वापस वही शिव मंदिर जाएं जहां सुबह गएं थे.
5) अब प्रसाद को बराबर तीन हिस्सों में बांट लें जिनमें से दो हिस्से को भगवान शिव को चढ़ाएं और एक बचा हुआ हिस्सा अपने थाली में रख लें.
6) इसके बाद लाये हुए छः घी के दीपक को भगवान शिव के समक्ष रखें और उनमें से केवल पांच दीए ही भगवान शिव के समक्ष जलाएं और बिना जले दीए को अपनी पूजा थाली में रख लें.
7) अब बिना जले दिए को घर ले जाएं और इसे घर में प्रवेश करने से पहले मुख्य द्वार के दाहिने ओर जलाएं.
8) अब रात का भोजन करने से पहले मंदिर से लाया हुआ प्रसाद के हिस्से को पहले स्वयं ग्रहण करें लेकिन ध्यान रखें कि यह प्रसाद परिवार के किसी अन्य सदस्य को नहीं देना है.
9) पांचवे सोमवार को शाम की पूजा के समय प्रसाद और दीए जलाने के बाद एक नारियल और 108 चावल, बेलपत्र या फिर पुष्प को भगवान शिव को अर्पित करें और अपने व्रत को पूर्ण होने की कामना करें.
पशुपति व्रत के नियम :
1) पशुपति व्रत को कोई भी यानि कि पुरुष, स्त्री या फिर बच्चे भी कर सकते है.
2) इस व्रत में सुबह और शाम मंदिर जाना आवश्यक होता हैं और पांचों सोमवार एक ही शिव मंदिर में पूजा करनी होती है.
3) पशुपति व्रत रखने वाले व्रती को दिन में सोना नहीं चाहिए.
4) घर से मीठा प्रसाद जैसे कि हलवा, खीर या फिर मीठा भात स्वयं बनाना है, बाजार का बना प्रसाद नहीं लेना है.
5) किसी कारणवश बीच में कोई सोमवार छूट जाए जैसे कि बाहर जाना, शादी या पीरियड तो उस दिन व्रत न रखें.
6) उस सोमवार को छोड़कर अगले सोमवार से व्रत की गिनती करें और पांच सोमवार पूर्ण करें.
7) व्रत के दौरान भगवान शिव के मंत्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम” का जाप करें और मांस मदिरा जैसे तामसिक भोजन का सेवन न करें.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) पशुपति व्रत किस भगवान को समर्पित है ?
भगवान शिव.
2) पशुपति व्रत किस दिन से शुरू करना चाहिए ?
किसी भी महीने के सोमवार से.
3) पशुपति व्रत में कुल कितने सोमवार का व्रत रखा जाता हैं ?
पांच सोमवार.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


