Pitra Paksha | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है. पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्मा शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. धार्मिक मान्यतानुसार पितृ पक्ष के दौरान किया गया हर कर्म सीधे पितरों तक जाता हैं और इसका पुण्य परिवार को प्राप्त होता है यही कारण है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे हिंदुओं को भी पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को तर्पण देने और श्राद्ध करने के लिए पवित्र स्थान पर जाते हैं जिनमें से एक है ओडिशा में स्थित जगन्नाथ पुरी.
चार धामों में एक जगन्नाथ पुरी जो कि अपने भव्य मंदिर और वार्षिक रथयात्रा प्रसिद्ध होने के साथ ही यह स्थान पितरों की आत्मा को मोक्ष और शांति दिलाने वाली स्थान के रूप में भी प्रचलित है यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में पितृ पक्ष के दिनों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए आते हैं.
आखिर क्यों जगन्नाथ पुरी को पितरों के लिए “मुक्ति का द्वार” कहा जाता है?
जगन्नाथ पुरी का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि यहां स्थित दो नदियों भार्गव और महानदी का संगम स्थल भी बहुत प्रसिद्ध हैं. धार्मिक मान्यता है कि जिस स्थान पर भार्गव और महानदी मिलती है उसे बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है और यह पुरी के पास बहती है चुकी पुरी समुद्र के किनारे बसा होने के कारण से नदी और समुद्र का संगम धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान माना गया हैं और इस स्थान पर पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष मिलने के साथ ही वे जन्म – मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. इन्हीं सब कारणों से पितृ पक्ष के दिनों में दूर – दूर से श्रद्धालु यहां आकर अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने आते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो मनुष्य अपने जीवन में कम से कम चार धामों की यात्रा करता हैं उसे सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है इसलिए पितरों के श्राद्ध के लिए यहां लोग पहुंचते हैं इसके अलावा यह भी माना जाता है कि संगम स्थल पर पिंड दान करने के बाद स्नान करने को भी बहुत शुभ माना गया हैं.
जगन्नाथ पुरी में पिंड दान करने के महत्व को :
1) जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियां पितृ अनुष्ठानों यानि कि श्राद्ध और तर्पण के लिए पवित्र माना जाता हैं.
2) जगन्नाथ पुरी में प्रसिद्ध श्मशान “स्वर्गद्वार” हैं जिसके बारे में मान्यता है कि यहां पर अंतिम संस्कार या पितृ कर्मकांड करने से मृत सदस्य को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं.
3) हिंदू चार धामों में से एक है जगन्नाथ पुरी और यहां पर भगवान जगन्नाथ का वास है यही कारण है कि यहां पर किए गए कर्मों का फल बहुत अधिक होता हैं.
4) जगन्नाथ पुरी भार्गव, महानदी और समुद्र का संगम स्थल होने के कारण से यहां पर पितरों का पिंडदान करने से पितृ जन्म – मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
चार धामों में किस धाम को पितरों की मुक्ति का द्वार कहा जाता है ?
जगन्नाथ पुरी
जगन्नाथ पुरी में किन नदियों का संगम स्थल है ?
भार्गव और महानदी.
जगन्नाथ पुरी में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से क्या पुण्य मिलता हैं ?
पितरों को शांति और मोक्ष मिलने के साथ जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होना.
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