Vidur Niti | महात्मा विदुर महाभारत के ऐसे अहम पात्र थे जो कि अपनी तेज बुद्धि के कारण से याद किए जाते हैं. महात्मा विदुर धृतराष्ट्र और पांडव के सौतेले भाई और एक दासी पुत्र थे जिनको संपूर्ण वेदों और शास्त्रों का ज्ञान था और इन्हीं सभी ज्ञानों का संग्रह विदुर नीति के नाम से विख्यात है. महात्मा विदुर ने अपनी इसी विदुर नीति में जीवन की उन विशेष आदतों को बतलाया है जो कि व्यक्ति को मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में डटे रहने और आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करने में सहायता करती है क्योंकि सफलता कभी भी हार मानने वाले को प्राप्त नहीं हो सकती हैं बल्कि उस व्यक्ति को मिलती हैं जो कि बड़ी से बड़ी मुश्किल में अपनी अच्छी आदतों को नहीं छोड़ते हैं और विदुर नीति कहती है कि जीवन के रास्ते चाहे कितनी भी मुश्किल और कठिन क्यों ना हो, सही आदतें उसको आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती हैं.
विदुर नीति के अनुसार अच्छी आदतें जो इंसान को कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननेदेते :
1) विवेकपूर्ण कर्म की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि विवेकी मनुष्य अपनी ताकत के अनुसार कार्य करता हैं. वह कभी भी छोटी सी छोटी वस्तुओं को तुच्छ नहीं समझता है बल्कि वो हर कार्य को पूरी निष्ठा से करता हैं और इन्हीं आदतों के कारण से मनुष्य धीरे – धीरे महान बनता जाता हैं क्योंकि उनकी यही छोटी – छोटी मेहनत बड़ी सफलता का आधार बनती हैं.
2) परिस्थितियों से ऊपर उठकर कार्य करने की आदतें :
विदुर नीति के अनुसार धनी – गरीबी, भय, अनुराग, सर्दी या गर्मी किसी भी परिस्थिति की परवाह किए बिना जो मनुष्य अपना कार्य करता हैं, वह एक दिन अवश्य सफल होता हैं इसलिए परिस्थितियों को बहाना ना बनाकर बस निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए.
3) दृढ़ निश्चय और अनुशासन की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि जो मनुष्य पहले से सोच – समझकर कार्य शुरू करता है, बीच में नहीं छोड़ता और समय का सही उपयोग करने के साथ अपने मन को वश में भी रखता है वही सफलता का असली स्वाद को चखता है.
4) धर्म और पुरुषार्थ की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि जिस मनुष्य की बुद्धि धर्म और अर्थ का अनुसरण करने के साथ भोग की बजाय पुरुषार्थ को अपनाता है वही मनुष्य लंबे समय तक सफलता को प्राप्त करता हैं तो वहीं सुख – भोग की खोज में लगे मनुष्य अक्सर रास्ते में भटक जाते हैं और पुरुषार्थी मनुष्य चुनौतियों का सामना करते हुए भी सदैव अपने लक्ष्य पर टिका रहता हैं.
5) विद्या और बुद्धि का सामंजस्य की आदतें :
विदुर नीति के अनुसार जिसकी विद्या बुद्धि का अनुसरण करती हैं, बुद्धि विद्या का साथ देती हैं और जो शिष्ट पुरुषों की मर्यादा का पालन करता हैं वह जीवन में अवश्य आगे बढ़ता है.
6) क्षमा और दान की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि ताकतवर होने पर भी क्षमा करने वाला और निर्धन होने पर भी दान देने वाला मनुष्य ना केवल स्वर्ग में मान – सम्मान प्राप्त करता हैं बल्कि इस संसार में भी सफल और सम्मानित होता हैं.
7) अच्छा श्रोता और समझदारी की आदतें :
विदुर नीति के अनुसार सफल मनुष्य सुनता है, तत्काल समझता हैं और फिर कर्तव्य बुद्धि से कार्य में लगता हैं. जो मनुष्य बिना पूछे दूसरों के मामलों में टांग नहीं घुसता और बेकार की बातों से दूर रहता हैं और यह सब गुण उसे सम्मान और विश्वास दिलाता हैं.
8) काम, क्रोध और लोभ से दूर रहने की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि काम, क्रोध और लोभ यह तीनों नरक के द्वार है और जो मनुष्य इस सब से बचता हैं और आत्मा को नष्ट होने से भी बचाता हैं तो यही मनुष्य सफलता की रास्ते पर आगे बढ़ता हैं.
9) गोपनीयता और रणनीति की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि सफल मनुष्य अपने कर्तव्य, योजना और विचारों को किसी को भी बताने की जल्दी नहीं करता है तब काम पूरा होने के बाद ही लोग उसे जान पाते है और यह गुण उसे अनावश्यक बाधाओं और ईर्ष्या से भी बचाता हैं.
10) धर्म, क्षमा और अहिंसा की आदतें :
विदुर नीति कहती है कि केवल धर्म ही परम कल्याणकारी हैं, क्षमा ही शांति का सबसे अच्छा उपाय है, विद्या ही संतोष देती हैं तो वहीं अहिंसा सच्चा सुख प्रदान करती हैं और इन गुणों को अपनाने वाला मनुष्य कभी भी हार नहीं मानता है.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) महात्मा विदुर किसके सौतेले भाई थे ?
धृतराष्ट्र और पांडव.
2) विदुर नीति के अनुसार कौन से गुण नरक के द्वार हैं ?
काम, क्रोध और लोभ.
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