Temple Stairs | हिंदू धर्म में मंदिर जाकर भगवान की पूजा – अर्चना के साथ ही ध्यान और जप का विशेष महत्व होता है तो उतना ही महत्व होता हैं भगवान के दर्शन के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ समय के लिए बैठना. मंदिर की सीढ़ी पर बैठना केवल आराम का माध्यम ही नहीं बल्कि इसके पीछे एक विशेष परंपरा और उद्देश्य छुपा हुआ है. कहा जाता है कि कि पूर्व समय में मंदिर की सीढ़ी शांति, मंत्र और ध्यान का स्थान माना जाता था, जहां कुछ समय बैठकर मंत्र जाप किया जाता था जिससे कि जप करके पूजा को पूर्ण किया जा सके लेकिन वास्तव में इसके पीछे आध्यात्मिक, धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं समाहित हैं.
जानते हैं भगवान के दर्शन के बाद मंदिर की सीढ़ियों पर बैठने के कारण को :
1) दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा को अनुभव करना :
धार्मिक मान्यता है कि मंदिर में भगवान का वास होने से मंदिर के गर्भगृह में दिव्य, सकारात्मक और सात्विक ऊर्जा का संचार बहुत प्रबल होता हैं यही कारण है कि गर्भगृह में भगवान का दर्शन करते समय भक्त का मन सांसारिक बंधनों व विचारों से मुक्त होकर भगवान में एकाग्र हो जाता हैं और सीढ़ियों पर कुछ समय शांत भाव से बैठकर इन ऊर्जाओं को शरीर में अवशोषित करने का माध्यम होता है जिससे कि मन में उत्पन्न शांति स्थिर होने के साथ ही भक्त को परम शांति का अनुभव भी होता हैं.
2) पुराणों और ग्रंथों में सीढ़ी में बैठने का उल्लेख :
पुराणों और धर्म ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि ऋषि, मुनि और साधक देव – देवताओं के दर्शन करके फौरन सांसारिक जीवन में नहीं लौटकर मंदिर प्रांगण या फिर सीढ़ियों पर बैठकर ध्यान, जप के अलावा मौन साधना किया करते थे. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान की कृपा हृदय में समाहित होती हैं और अगर दर्शन करने के तुंरत साधक बाहरी दुनिया की दिनचर्या में लौट जाएं तो दर्शन का पूरा फल नहीं मिलता हैं.
3) अहंकार का त्याग करने की मान्यता :
मंदिर की सीढ़ियां वह जगह होता हैं जहां पर हर दर्जे के लोग एक साथ बैठते हैं और यह जगह हर किसी को महसूस कराता है कि भगवान के मंदिर में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता हैं. सीढ़ियों पर बैठने से हर किसी के अंदर का अहंकार का नाश होने के साथ यह बतलाता है कि मनुष्य उस परमेश्वर की संसार का एक छोटा सा मात्र हिस्सा है.
4) आयुर्वेद और योग की दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण होना :
आयुर्वेद और योग के अनुसार भगवान दर्शन के समय शरीर की इंद्रियां और मन बहुत अधिक सक्रिय हो जाने से ऊर्जा का संचार तेज हो जाता है तब ऐसे में कुछ समय शांत बैठना मन और शरीर को संतुलन प्रदान करता हैं और सीढ़ियों पर कुछ समय बैठना रक्तचाप सामान्य करने के साथ मन स्थिर रखता हैं जिससे कि एकाग्रता बढ़ती हैं यही कारण है कि साधक और वृद्धजन इस परंपरा का पालन किया करते हैं.
जानते हैं मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर किस मंत्र का जप करना चाहिए :
मंदिर की सीढ़ी पर बैठकर इस विशेष मंत्र ” अनायासेन मरणम, बिना देंयेन जीवनम. देहान्त तव सानिध्यम, दहि में परमेश्वरम ” का जाप करना चाहिए जिसका अर्थ है कि हमारी मृत्यु बिना किसी तकलीफ के हो, हम बीमार होकर या फिर परेशान होकर न मरे इसके साथ ही जीवन ऐसा हो कि हमें किसी पर आश्रित नहीं रहना पड़े, अपने बलबूते पर जीवन व्यतीत करें और जब भी मृत्यु हो भगवान के समक्ष हमारे प्राण निकले और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो.
जानते हैं मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर क्या कार्य करना चाहिए :
मंदिर में भगवान के दर्शन करते समय आंखे खुली रखें जिससे कि भगवान के स्वरूप, चरण, चेहरों और श्रृंगार का पूर्ण आनंद प्राप्त किया जा सके लेकिन मंदिर से आने के बाद सीढ़ियों पर बैठकर आँखें बंदकर भगवान का ध्यान करते हुए पहले बताएं मंत्र का जाप करें. कहा जाता है कि मंदिर में खुले आंखों से भगवान का दर्शन और सीढ़ी में बैठकर आँखें बंद करके भगवान का ध्यान करना श्रद्धा, ध्यान और भक्ति का प्रतीक होता हैं.
जानते हैं मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर क्या कार्य नहीं करना चाहिए :
मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर कभी भी घर, राजनीति, धर्म से जुड़े विषयों पर बातचीत नहीं करना चाहिए जबकि शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि किसी मंदिर में भगवान के दर्शन करके बाहर आकर सीढ़ी पर बैठकर केवल भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) मंदिर के गर्भगृह में किस ऊर्जा का संचार प्रबल होता हैं ?
दिव्य, सकारात्मक और सात्विक ऊर्जा.
2) मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर किस मंत्र का जाप करना चाहिए ?
अनायासेन मरणम, बिना देंयेन जीवनम देहान्त तव सानिध्यम दहि में परमेश्वरम.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


