Blue Sapphire | रत्न शास्त्र में नौ (9) रत्नों का वर्णन किया गया है जिसका विशेष महत्व भी होता हैं. माना गया है कि रत्न भाग्य में वृद्धि करने के साथ ही रत्नों को धारण करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को यह दूर भी करता हैं क्योंकि हर एक रत्न का संबंध किसी न किसी ग्रह से अवश्य होता हैं और इन्हीं नौ रत्नों में एक है नीलम (Neelam Stone) जिसका संबंध शनि देव से होता हैं. नीलम रत्न जिसको ” ब्लू सफायर ” कहा जाता है इसके अलावा इस रत्न को बाकी नौ रत्नों में सबसे शक्तिशाली और बहुत जल्द ही परिणाम देने वाला भी कहा जाता है. मान्यता है कि यह रत्न जातक को ‘ राजा से रंक ‘ या फिर ‘ रंक से राजा ‘ बनाने की ताकत को रखता हैं लेकिन नीलम को धारण करना जितना लाभदायक होता हैं उतना ही इसके धारण करने के नियम भी कठिन भी होते हैं क्योंकि अगर इसको धारण करने में या फिर करने के बाद कुछ गलतियां हो जाएं तो शनि देव को नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता हैं.
जानते हैं नीलम रत्न को धारण करने के नियम को :
1) नीलम रत्न को हर कोई धारण नहीं कर सकते हैं इसके लिए सबसे पहले किसी जानकार ज्योतिषी को अपनी कुंडली में शनि की स्थिति अवश्य रूप से दिखानी चाहिए.
2) मकर और कुंभ राशि का ग्रह स्वामी शनिदेव होने के कारण से इस राशि के जातकों के लिए नीलम शुभ माना जाता है लेकिन इसके अलावा नीलम रत्न को वृष, मिथुन, कन्या और तुला राशि के जातक भी इसे धारण कर सकते हैं.
3) जिन जातक को नीलम रत्न को धारण करना है उन्हें धारण करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि रत्न उसके लिए शुभ है या नहीं, इसके लिए नीलम को धारण करने से पहले एक साफ नीले रंग के कपड़े में लपेटकर तकिए के नीचे रखें अगर जातक को अच्छी नींद आए तो नीलम उसके लिए शुभ है तो वहीं अगर सोने पर बुरे सपने दिखाई दे तो नीलम उसके लिए शुभ नहीं हैं.
4) जिन जातकों के लिए नीलम अनुकूल हो तो उसको शनिवार के दिन इस रत्न को धारण करना चाहिए क्योंकि शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है और नीलम का संबंध शनि देव से होता हैं.
5) नीलम धारण करने के लिए किसी जानकार ज्योतिषी से शनिवार के दिन का शुभ मुहूर्त को जान ले, मान्यता है कि शाम के समय नीलम रत्न को धारण करने के लिए शुभ मुहूर्त उत्तम होता हैं.
6) नीलम को धारण करने से पहले इसे दूध, गंगाजल और शहद के मिश्रित घोल में 10 से 15 मिनट तक डालकर रखें और इस बीच शनि के बीज मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
7) मंत्र जाप करने के बाद इस रत्न को दाहिने हाथ की बीच की उंगली में धारण करें और धारण करने के बाद हो सकें तो शनि ग्रह से संबंधित चीजों का दान अवश्य करें.
जानते हैं नीलम रत्न को धारण करने के फायदे को :
1) नीलम रत्न को धारण करने से आर्थिक समस्या से मुक्ति मिलने के साथ ही आर्थिक लाभ होने लगता हैं.
2) मान्यता है कि नीलम रत्न को धारण करने से नौकरी, कारोबार में तरक्की मिलने के साथ ही सफलता की प्राप्ति होती हैं.
3) नीलम को धारण करने से मन शांत होने के साथ ही तनाव कम होने के अलावा यह रत्न रात में होने वाली घबराहट, भय और समस्याओं से मुक्ति मिलती है.
4) मान्यता है कि नीलम रत्न को धारण करने से काली विद्या, तंत्र – मंत्र, जादू – टोना और भूत – प्रेत से रक्षा करता हैं.
5) नीलम रत्न को धारण करने से जातक कर्मठ और मेहनती बनाने के साथ ही यह वाणी में मिठास और धैर्य लाता हैं.
जानते हैं नीलम रत्न कौन सी राशि के लिए शुभ होता हैं :
शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी माने जाते हैं इसलिए इस राशि के जातकों के लिए नीलम शुभ होता हैं इसके अलावा वृष राशि, मिथुन राशि, कन्या राशि और तुला राशि के जातकों के लिए भी शुभ होता हैं.
जानते हैं नीलम को धारण करने के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए :
1) मान्यता है कि अगर नीलम धारण करने के बाद यह कहीं से चटक गया हो या फिर खंडित हो गया है तो इसे फौरन उतार देना चाहिए क्योंकि खंडित नीलम सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के बजाय नकारात्मकता का संचार करती है जिससे कि दुर्घटनाओं का खतरा होता हैं.
2) रत्न शास्त्र के अनुसार नीलम को कभी भी माणिक्य, मूंगा, मोती या फिर पीला पुखराज के साथ धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह रत्न एक दूसरे के शत्रु होते है और इनको साथ में धारण करने से जीवन में संकट आने की संभावना बढ़ती हैं.
3) नीलम रत्न का संबंध शनि देव से होता हैं इसलिए हो सकें तो इसे धारण करने के बाद ना तो किसी को परेशान करें और ना ही हिंसा ही करें.
4) नीलम रत्न को धारण करने के बाद मांस – मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए ना ही किसी को धोखा ही देना चाहिए और ना ही किसी से झूठ ही बोलना चाहिए.
उम्मीद है कि आपको नीलम रत्न से जुड़ा यह लेख पसंद आया होगा तो इसे अधिक से अधिक अपने परिजनों और दोस्तों के बीच शेयर करें और ऐसे ही रत्नों से जुड़े अन्य लेख को पढ़ने के लिए जुड़े रहे madhuramhindi.com के साथ.
FAQ – सामान्य प्रश्न
1) नीलम रत्न किस ग्रह से संबंधित होता हैं ?
शनि देव
2) नीलम को किस दिन धारण करना शुभ होता हैं ?
शनिवार.
3) नीलम रत्न को धारण करते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए ?
ॐ शं शनैश्चराय नमः
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


