Srimad Devi Bhagwat Niyam | शारदीय नवरात्रि में श्रीमद् देवी भागवत पुराण का पाठ करना अति फलदायक होता है. श्रीमद् देवी भागवत पुराण का पाठ केवल शारदीय नवरात्रि में ही नहीं बल्कि चैत्र नवरात्रि, माघ गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में भी करने का विशेष महत्व होता हैं. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति नवरात्रि के पावन दिनों में इसका पाठ करता है उसे धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होने के साथ ही पुत्र सुख की प्राप्ति होती है तो वहीं यह भी माना जाता है कि इस पुराण को जिस घर में विधिवत् पूजन करके रखे जाने के साथ इसका पाठ किया जाता है उस घर में धन की देवी मां लक्ष्मी और ज्ञान की देवी मां सरस्वती का हमेशा के लिए वास होने के साथ बुरी शक्तियां कभी घर में प्रवेश नहीं करती हैं लेकिन इस पुराण का पाठ करने के कुछ विशेष नियमों को बताया गया है जिसका पालन करके तब ही इनसे होने वाले फायदे को प्राप्त किया जा सकता हैं.
श्रीमद् देवी भागवत पुराण के पाठ करने के नियम :
1) पवित्रता :
सुबह स्नानादि करके स्वच्छ साफ वस्त्र को धारण करें, हो सकें तो पीले या फिर लाल रंग के वस्त्र को धारण करें.
2) शुभ स्थान :
श्रीमद् देवी भागवत पुराण को कभी भी सीधे भूमि पर नहीं रखें बल्कि इसे सदैव पूजा घर या फिर एक पवित्र चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें.
3) कलश स्थापना करना :
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करके देवी मां की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष नवग्रह और षोडशोपचार पूजन करने के बाद ही पाठ करने का संकल्प लें.
4) पाठ करने की दिशा :
पुराण का पाठ करते समय ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की तरफ होनी चाहिए.
5) अनुशासन और एकाग्रता :
पाठ के दिनों में मन को शांत रखने के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करें और पाठ को एकाग्रता और पवित्र मन से करें. पाठ करते समय बीच-बीच में अनावश्यक बातें भूलकर भी न करें.
6) समय :
श्रीमद् देवी भागवत पुराण का पाठ चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि के अलावा अन्य किसी भी दिन में नौ या दस दिनों में विधि विधान से पूर्ण करने को सबसे उत्तम माना गया हैं.
7) खान – पान :
पुराण का पाठ नवरात्रि के अलावा अन्य किसी दिन भी कर रहे तो पाठ करने के नौ दिनों में सात्विक भोजन ही करें अर्थात् बिना लहसुन प्याज का भोजन.
8) रोजाना नियम का पालन :
श्रीमद् देवी भागवत पुराण के अनुसार साधक को तप, संतोष, आस्तिक्य अर्थात देवताओं में विश्वास, देव पूजन, सिद्धांत श्रवण, दान, ह्री (शालीनता), मति (सद्बुद्धि), जप और हवन जैसे इन बातों का पालन करना चाहिए.
श्रीमद् देवी भागवत पुराण को पढ़ने के फायदे :
1) सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना :
धार्मिक मान्यता है कि श्रीमद् देवी भागवत पुराण का पाठ करने वाले साधक के घर में धन की देवी मां लक्ष्मी, बुधि की देवी मां सरस्वती और शक्ति की देवी मां का वास एक साथ होने से घर में सदैव सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती हैं.
2) सुख – समृद्धि की प्राप्ति :
मान्यता है कि इस पुराण का श्रद्धा भाव से पाठ करने से धन, यश और आरोग्य की प्राप्ति होने के साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं.
3) शत्रु नाश और भय से मुक्ति :
मान्यता है कि देवी भागवत पुराण का पाठ करने से मां महामाया की कृपा प्राप्त होती है जिससे कि शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होने के साथ ही नकारात्मक शक्तियां और बुरी आत्माओं का भय दूर होता हैं.
4) संतान सुख की प्राप्ति :
मान्यता है कि इस पुराण के पाठ करने या मात्र श्रवण करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होने के साथ ही योग्य संतान की भी प्राप्ति होती है.
5) पापों से मुक्ति :
धार्मिक मान्यता है कि इस श्रीमद् देवी भागवत के पाठ करने से जन्म – जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही आत्मा की शुद्धि भी होती हैं.
6) धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति :
मान्यता है कि श्रीमद् देवी भागवत महापुराण साधक को चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति करवाने के अलावा अंत में भगवती के परम् पद अर्थात मोक्ष की ओर अग्रसर करवाता है.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
श्रीमद् देवी भागवत पुराण का पाठ किन दिनों करना बहुत शुभ होता हैं ?
चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दोनों गुप्त नवरात्रि.
श्रीमद् देवी भागवत का पाठ किस दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए ?
पूर्व या उत्तर दिशा.
कितने दिन के बीच श्रीमद् भागवत पुराण के पाठ को पूरा करना चाहिए ?
दस दिन के बीच.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


