Shiv Raksha Stotra | शिव रक्षा स्त्रोत ऋषि याज्ञवल्क्य द्वारा रचित है जिसका पाठ करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सदैव सुरक्षित रखने के साथ ही उनके सभी संकटों, दुखों और नकारात्मक शक्तियों से उनको बचाते हैं. मान्यता है कि शिव रक्षा स्त्रोत के नियमित पाठ करने से चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती हैं इसलिए शिव भक्तों को इस स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए लेकिन इस स्त्रोत का पाठ करने के वैदिक नियमों का पालन करना चाहिए जिससे कि इसका पूर्ण लाभ मिल सकें.
शिव रक्षा स्त्रोत कब करना चाहिए :
1) सोमवार का दिन :
सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार का दिन व्रत, पूजन के साथ मंत्र जाप और स्त्रोत का पाठ करना लाभकारी सिद्ध होता है. कहा जाता है कि सोमवार के दिन शिव रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने के साथ ही जीवन के सारे कष्ट दूर होने के अलावा आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती हैं.
2) प्रदोष व्रत :
हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाएं जाने वाले प्रदोष व्रत भगवान शिव की समर्पित होता है और इस दिन शिव रक्षा स्त्रोत का जाप करना लाभदायक होने के साथ भगवान शिव के साथ माता पार्वती की कृपा भी प्राप्त होती हैं.
3) महाशिवरात्रि :
महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे शुभ दिन होता है और इस दिन भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए भक्त उनकी प्रार्थना और भक्ति के रूप में शिव रक्षा स्त्रोत का जाप किया करते हैं.
4) संकट के समय :
जब भी जीवन में चुनौतियों, बाधाओं या खतरे का सामना करना पड़े तो भगवान शिव से सुरक्षा और मार्गदर्शन के शिव रक्षा स्त्रोत का जाप करना चाहिए जिससे कि संकटों और बाधाओं से मुक्ति मिल सकें.
5) विशेष कार्यों से पहले :
किसी भी विशेष कार्यों को करने से पहले शिव रक्षा स्त्रोत का जाप करना चाहिए जिससे कि भगवान शिव का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होने के साथ ही बाधाओं से सुरक्षा और सफलता की प्राप्ति हो सकें.
शिव रक्षा स्त्रोत कैसे करना चाहिए :
शिव रक्षा स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ सुबह ब्रह्म मुहूर्त या फिर शाम की पूजा के समय करना बहुत अत्यंत शुभ माना गया है विशेषकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सावन के महीने के समय करना चाहिए. शिव रक्षा स्त्रोत का पाठ सुबह स्नानादि करने के बाद साफ स्वच्छ आसन पर बैठकर भगवान शिव की पूजा विधिवत यानि कि भगवान शिव को सफेद पुष्प, बेलपत्र अर्पित करके उनके समक्ष धूप और घी के दीपक जलाकर पूरी श्रद्धा के साथ स्त्रोत का पाठ करना चाहिए और पाठ के बाद ” ॐ नमः शिवाय ” मंत्र का जाप करें मान्यता है कि इससे स्त्रोत का जाप करना अति लाभदायक सिद्ध होता हैं.
शिव रक्षा स्त्रोत करने के फायदे :
1) शत्रु और भय का नाश होना :
शिव रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से शत्रुओं का भय दूर होने के साथ ही मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती हैं.
2) सुरक्षा कवच :
शिव रक्षा स्त्रोत एक अमोघ रक्षा कवच निर्मित करता है जिससे कि यह नकारात्मक शक्तियों, भूत, पिशाच और बुरी नज़र से रक्षा करता हैं.
3) ग्रह दोष से मुक्ति :
शिव रक्षा स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव कम करने में सहायक होने के साथ ही यह ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती हैं.
4) मनोकामनाएं पूर्ण करने में :
शिव रक्षा स्त्रोत का श्रद्धा भाव और सच्चे मन से पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही जीवन में धन, सुख और समृद्धि की भी प्राप्ति होती हैं.
5) लंबी उम्र और सफलता :
शिव रक्षा स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ करने से जीवन में सफलता, विजय, यश और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं.
6) रोगों से मुक्ति :
शिव रक्षा स्त्रोत का नियमित रूप से पाठ करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिलने के साथ ही पुरानी बीमारियों से राहत मिलती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
1) शिव रक्षा स्त्रोत किस ऋषि के द्वारा रचित है ?
याज्ञवल्क्य ऋषि.
2) शिव रक्षा स्त्रोत कब करना चाहिए ?
सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सावन माह.
3) शिव रक्षा स्त्रोत का पाठ करने के बाद किस मंत्र का जाप करना चाहिए ?
ॐ नमः शिवाय.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.



