Diwali | दीवाली के पावन दिन मां लक्ष्मी-भगवान गणेश की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है. मां लक्ष्मी धन – समृद्धि और सौभाग्य की देवी कही जाती है तो वहीं भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहलाते हैं. मान्यता है कि दिवाली की रात्रि इन दोनों की पूजा करने से जीवन में धन, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होने के साथ घर में सुख – समृद्धि और सौभाग्य का आगमन भी होता हैं. दीवाली के दिन घरों में विशेष रूप से साफ – सफाई, सजावट और दीपक जलाएं जाते हैं तो वहीं दीवाली के शुभ अवसर पर नई लक्ष्मी – गणेश की मूर्तियों को लाकर विधिवत् स्थापति करके पूजा की जाती हैं लेकिन मन में सवाल आता है कि नई मूर्तियों को स्थापति करने के बाद पुरानी मूर्तियों का क्या करें ?
दीवाली के बाद पुरानी लक्ष्मी – गणेश की मूर्तियों का क्या करना चाहिए :
दीवाली के बाद लक्ष्मी – गणेश की पुरानी मूर्तियों को कुछ करना इस बात पर निर्भर करता है कि मूर्ति किस वस्तु या धातु से बनी है :
1) मिट्टी से बनी मूर्तियाँ :
मिट्टी की मूर्ति को पूजा के लिए अति शुभ और पवित्र माना जाता है क्योंकि मिट्टी की मूर्तियां नश्वरता और नए जीवन का प्रतीक मानी जाती हैं. दीवाली में मिट्टी से बनी लक्ष्मी – गणेश की नई मूर्ति को स्थापित करके पूजा किया जाता है ऐसी मान्यता है कि नई मूर्तियों लाने से जीवन में नई ऊर्जा और शुभता का प्रवाह होता हैं लेकिन नयी मूर्तियों को स्थापित करने के बाद पुरानी मूर्तियों को भूलकर भी किसी अपवित्र स्थान पर नहीं रखना चाहिए और ना ही कहीं पर फेंकना ही चाहिए बल्कि पुरानी लक्ष्मी – गणेश की मिट्टी की मूर्तियों को भाईदूज के बाद श्रद्धापूर्वक किसी साफ नदी, तालाब या फिर साफ बहते जल में विसर्जित करें लेकिन अगर यह संभव नहीं हो रहा है तो घर में ही एक बाल्टी में साफ जल और गंगाजल को डालकर उसमें मूर्ति को विसर्जित करें और मिट्टी को के घुल जाने के बाद उस पानी की किसी पौधें या फिर गमलें में डाल दे. मिट्टी की बनी लक्ष्मी – गणेश की मूर्तियों को मंगलवार के दिन विसर्जन ना करें और ना ही सूर्यास्त के बाद मूर्तियों को विसर्जित करें.
2) धातु से बनी मूर्तियां :
धातु जैसे कि सोना, चांदी, तांबा या फिर पीतल से बनी लक्ष्मी – गणेश की मूर्तियों को हर साल बदलने की आवश्यकता नहीं होती हैं बल्कि गंगाजल से साफ करके और सुगंधित फूलों से सजाकर दीवाली में पूजन किया जाता है. मान्यता है कि धातु को स्थायी और पवित्र तत्व माना जाता है यही कारण है कि धातु निर्मित मूर्तियां स्थायी मानी गई है और ऐसी मूर्तियां लंबे समय तक पूजनीय मानी जाती हैं. धातु से बनी लक्ष्मी – गणेश की मूर्तियों को गंगाजल से अच्छी तरह से साफ करके अगले साल दीवाली पूजन के लिए या घर की तिजोरी या मंदिर में सम्मानपूर्वक रखें.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
मिट्टी से बनी मूर्तियां किसका प्रतीक मानी जाती है ?
नश्वरता और नए जीवन का.
मिट्टी से बनी मूर्तियों को किस दिन विसर्जित नहीं करना चाहिए ?
मंगलवार.
धातु से बनी मूर्तियां किसका प्रतीक होती हैं ?
स्थायी और पवित्र.
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