Pitru Paksha | हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है जो कि भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक होती है. धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों पूर्वज धरती लोक आते हैं और उनको खुश करने के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है जिसकी पितृ की आत्मा को शांति मिले और परिवार में उनका आशीर्वाद बना रहे. पितृ पक्ष के समय काले तिल का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता हैं जैसे कि जल में काले तिल डालकर तर्पण किया जाता है तो वहीं काले तिल से बनी वस्तुओं को भी चढ़ाया जाता हैं.
जानते हैं पितरों के तर्पण में काले तिल का प्रयोग क्यों किया जाता है :
धार्मिक मान्यता है कि पितरों को आकर्षित करने और तर्पण को स्वीकार करवाने में काले तिल में शक्ति होती हैं यही कारण है कि काले तिल को जल में डालकर पितरों को तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलने के साथ ही पूर्वजों की कृपा परिवार के ऊपर रहती हैं. ज्योतिष शास्त्र में भी पितरों के श्राद्ध में काले तिल के महत्त्व को बताया गया हैं कि काले तिल का प्रयोग करने से पितृ दोष से संबंधित ग्रह राहु, केतु और शनि को शांत किए जाने के साथ ही इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी कम होते है जिसका सकारात्मक प्रभाव परिवार पर पड़ता हैं. माना जाता है कि पितृ पक्ष में तिल का उपयोग पितरों के तर्पण और श्राद्ध में करने से पितृ दोष, कुल में आने वाली बाधाएं, संतान दोष, धन-हानि जैसे दोषों से मुक्ति मिलने के साथ ही जीवन में सफलता के रास्ते भी खुलते हैं.
काले तिल को पितृ पक्ष में प्रयोग करने के धार्मिक और आध्यात्मिक :
भगवान विष्णु की उत्पत्ति :
गरुड़ पुराण के अनुसार काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है. पौराणिक कथानुसार हिरण्यकश्यप ने जब अपने अत्याचारों से अपने ही पुत्र प्रह्लाद को प्रताड़ित किया तब भगवान विष्णु बहुत क्रोधित हुए और उनके शरीर से पसीने की बूंद निकलकर धरती पर गिरकर काले तिल में परिवर्तित हो गया जिसके कारण से इसको बहुत पवित्र और दिव्य माना गया हैं और भगवान विष्णु पितरों के आराध्य माने जाने से पितरों के तर्पण और श्राद्ध में काले तिल का विशेष महत्व होता हैं.
यमलोक की यातना से छुटकारा :
धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध और तर्पण करने में काले तिल का प्रयोग करने से पितरों को यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलने के साथ ही उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता हैं.
बुरी शक्ति और नकारात्मकता का नाश :
धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में तर्पण में काले तिल का प्रयोग करने से बुरी शक्तियां दूर रहने के साथ ही यह पितरों को पूजा का पूरा फल प्रदान करने में सहायता करता है.
पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति :
धार्मिक मान्यतानुसार जल में काले तिल को मिलाकर पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है जिससे कि पूर्वजों की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.
पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण और श्राद्ध में कुशा का प्रयोग करने के महत्व को :
पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण और श्राद्ध में काले तिल के साथ कुशा का भी प्रयोग करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है. मान्यता है कि कुशा पवित्र होने के साथ ही इनको जड़ों में भगवान ब्रह्मा, इसके मध्य में भगवान विष्णु और शीर्ष पर भगवान शिव का वास होने के कारण से श्राद्ध कर्म में कुशा का प्रयोग करना चाहिए.
क्यों पितरों के तर्पण में भूलकर भी सफेद तिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए :
पितरों के तर्पण और श्राद्ध में केवल काले तिल का ही इस्तेमाल करना चाहिए भूलकर भी सफेद तिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में सफेद तिल का संबंध शुक्र ग्रह और चन्द्रमा से माना जाता है जिसका उपयोग शुभ कार्यों और मांगलिक कार्य के साथ सुख – समृद्धि से जुड़े कर्मकांडों में उपयोग होता है तो वहीं पितृ कर्मकांड पितरों की आत्मा शांति से संबंधित अनुष्ठान होता है यही कारण है कि काले तिल को श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठानों में आवश्यक और महत्वपूर्ण माना गया हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
पितरों के तर्पण और श्राद्ध में किस चीज का प्रयोग किया जाता है ?
काले तिल.
काले तिल की उत्पत्ति किससे हुई है ?
भगवान विष्णु के पसीने से.
पितरों के तर्पण में काले तिल के साथ और किसका प्रयोग होता हैं ?
कुशा.
कुशा की जड़ में किसका वास होता है ?
ब्रह्मा जी.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


