Sankatnashan Ganesh Stotra Niyam | नारद पुराण में वर्णित श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र नारद मुनि के द्वारा कहा गया है और इसमें इस स्तोत्र के माध्यम से मिलने वाले फायदों के बारे में बताया गया है. मान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ करने से साधक के जीवन के संकट मिटने के साथ ही मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है तो वहीं विद्यार्थी इस स्तोत्र का नियमित पाठ करें तो उनको विद्या प्राप्ति होती है, धन की इच्छा रखने वाले को धन, संतान की चाह रखने वाले को संतान की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि ऐसी कोई भी सिद्धि और मनोकामना नहीं है जिसे श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र के पाठ से प्राप्त नहीं किया जा सकता लेकिन इन सभी फायदे को प्राप्त करने के लिए आवश्यक होता हैं इस स्त्रोत का नियमों के साथ पाठ किया जाए.
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र को पढ़ने के नियम :
1) शुरुआत करने का दिन :
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ नियमित रूप रोजाना सुबह करना सर्वश्रेष्ठ होता है लेकिन अगर यह संभव नहीं है तो प्रत्येक बुधवार या फिर चतुर्थी तिथि को पाठ करना शुभ होता हैं.
2) पूजा की तैयारी :
पाठ करने वाले दिन सुबह उठकर स्नानादि करके स्वच्छ साफ वस्त्र को धारण करें और मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और फिर इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर स्थापित करें.
3) पूजा की वस्तुएं :
भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष घी के दीपक और धूप को जलाएं और गणेशजी को दुर्वा, पीले पुष्प को अर्पित करके मोदक या फिर लड्डू का भोग लगाएं.
4) शुभ समय :
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ त्रिसंध्या यानि कि सुबह, दोपहर और शाम के समय करना बहुत ही शुभ माना जाता है लेकिन तीनों समय संभव नहीं हो रहा हो तो रोजाना नियमित रूप से सुबह के समय पाठ करना उत्तम माना जाता हैं.
5) मन की शुद्धता :
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करते समय मन पूरी तरह से शुद्ध, शांत रखें और गणेश जी के बारह नामों जैसे कि वक्रतुंड, एकदंत, कृष्णा पिगाक्ष आदि का ध्यान करें.
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र पढ़ने के फायदे :
1) बाधाओं और संकटों से मुक्ति :
भगवान श्री गणेश विध्नहर्ता और विध्नविनाशक कहलाते हैं यही कारण है कि श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का नियमित पाठ करने से साधक के जीवन की सभी विध्न बाधाएं दूर होने के साथ ही जीवन के संकटों से भी मुक्ति मिलती है इसके अलावा बिगड़े हुए या रुके हुए कार्य भी बनने लगते हैं.
2) धन और समृद्धि में वृद्धि :
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से साधक को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होने के साथ ही उसके जीवन में सफलता, उन्नति और खुशहाली का भी आगमन होता हैं.
3) विद्या और ज्ञान की प्राप्ति :
भगवान गणेश को विद्या और बुद्धि के देवता कहा जाता है इसलिए अगर इस स्तोत्र का पाठ विद्यार्थी वर्ग करें तो इनके ज्ञान, विद्या और मानसिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता हैं.
4) संतान सुख की प्राप्ति :
पुत्र या फिर संतान सुख की प्राप्ति के लिए इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए. मान्यता है कि इससे भगवान श्री गणेश की कृपा से पुत्र की प्राप्ति होती हैं.
5) रोग से मुक्ति :
मान्यता है कि श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है जिससे कि सारे रोग, भय और तनाव से मुक्ति मिलती हैं.
6) मोक्ष की प्राप्ति :
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित होता है और इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक को सांसारिक सुखों की प्राप्ति होने के साथ मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष की भी प्राप्ति होती हैं.
7) मनोकामनाओं की पूर्ति :
मान्यता है कि श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र का सच्ची श्रद्धा और सच्चे मन से पाठ करने से छह महीने में सकारात्मक परिणाम मिलने के साथ ही एक साल के अंदर सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं.
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FAQ – सामान्य प्रश्न
किस पुराण में श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र को वर्णित किया गया हैं ?
नारद पुराण
श्री संकट नाशन गणेश स्तोत्र पाठ की शुरुआत किस दिन से करनी चाहिए ?
बुधवार या चतुर्थी तिथि.
विद्या और बुद्धि के देवता किनको कहा जाता है ?
भगवान गणेश.
अस्वीकरण (Disclaimer) : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना ज़रूरी है कि madhuramhindi.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता हैं.


